उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के युवाओं के लिए एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसके बाद अब चरित्र सत्यापन के इंतजार में किसी भी युवा की सरकारी नौकरी नहीं अटकेगी. आइए जानते हैं योगी सरकार की इस नई भर्ती नीति के हर एक पहलू के बारे में.
वेरिफिकेशन से पहले ही मिलेगा 'प्रोविजनल नियुक्ति पत्र'
अभी तक का नियम यह था कि चयन होने के बाद जब तक पुलिस और प्रशासन की तरफ से चरित्र सत्यापन की फाइनल रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक युवाओं को नियुक्ति पत्र नहीं मिलता था. इसमें महीनों का वक्त बर्बाद होता था. लेकिन अब सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है. नई नीति के तहत, सामान्य पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को सत्यापन पूरा होने से पहले ही प्रोविजनल नियुक्ति पत्र जारी कर दिया जाएगा. यह नियम सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों की सीधी भर्तियों पर लागू होगा.
पुलिस के चक्कर काटने से मुक्ति, 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
सबसे बड़ी राहत यह है कि अब अभ्यर्थियों को पुलिस थाने या अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. सामान्य मामलों में युवाओं से न तो पूछताछ होगी और न ही कोई अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाएंगे. पुलिस सत्यापन मौजूदा अभिलेखों के आधार पर ही होगा, जिसके लिए भौतिक रूप से मौजूद रहना जरूरी नहीं होगा. सरकार ने निर्देश दिया है कि स्थानीय पुलिस और अभिसूचना इकाई को 30 दिनों के भीतर अपनी सत्यापन रिपोर्ट सौंपनी होगी. अगर इसमें देरी होती है, तो गृह विभाग तुरंत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराएगा.
शर्तों के साथ नौकरी और बाद में पुष्टि
व्यवस्था यह की गई है कि अभ्यर्थियों को शर्तों के आधार पर तुरंत नौकरी दे दी जाएगी और जब बाद में पुलिस वेरिफिकेशन की फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी, तब सेवा की पुष्टि कर दी जाएगी. इसके अलावा, जो कर्मचारी पहले से ही सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, उनका दोबारा वेरिफिकेशन नहीं कराया जाएगा.
सिर्फ एफआईआर से नहीं छिनेगी नौकरी, लेकिन गंभीर अपराधों पर जीरो टॉलरेंस
नई नीति में यह भी साफ किया गया है कि सिर्फ किसी थाने में एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने मात्र से किसी युवा का नौकरी का अवसर नहीं छीना जाएगा. फैसला अपराध की श्रेणी और मामले की वास्तविक स्थिति के आधार पर लिया जाएगा. हालांकि, यदि कोई व्यक्ति हत्या, दुष्कर्म, पेपर लीक, नकल गिरोह या साइबर ठगी जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसे सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी. इसके अलावा, आवेदन में किसी भी तरह की जानकारी छिपाने या गलत तथ्य देने पर नियुक्ति तुरंत रद्द कर दी जाएगी. यदि किसी की प्रतिकूल रिपोर्ट भी आती है, तो भी अभ्यर्थी को अपनी बात रखने और सुनवाई का पूरा मौका दिया जाएगा.
योगी सरकार के इस कदम से साफ है कि सरकार का मकसद चयन प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और पूरी तरह से युवा-বান্ধव बनाना है, ताकि होनहार युवाओं को कागजी औपचारिकताओं के जाल में न उलझना पड़े.
संतोष शर्मा