फर्जी छात्र, फर्जी हाजिरी... पंजाब में करोड़ों का घोटाला! बच्चे गांव छोड़ गए, बंटती रही स्कॉलरशिप

पंजाब के शिक्षा विभाग पर लगे इन गंभीर आरोपों ने राज्य की प्राइमरी शिक्षा व्यवस्था के प्रशासनिक ढांचे पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. शिकायत के मुताबिक संगरूर के भिंडरा सेंटर के तहत आने वाले तीन प्रमुख स्कूलों GPS भिंडरा, GPS बालियां और GPS संतोखपुरा में बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा था. जानें पूरी इनसाइड स्टोरी.

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पंजाब में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा दाग: संगरूर के स्कूलों में स्कॉलरशिप और मिड-डे मील का बड़ा घोटाला? पंजाब में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा दाग: संगरूर के स्कूलों में स्कॉलरशिप और मिड-डे मील का बड़ा घोटाला?

पीयूष मिश्रा

  • नई दिल्ली/संगरूर,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:10 PM IST

पंजाब के संगरूर जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है. सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी एडमिशन (घोस्ट एड‍म‍िशन) और कागजों पर बच्चों की झूठी हाजिरी दर्ज करके अनुसूचित जाति (SC) के बच्चों के हक की स्कॉलरशिप, राशन और विकास अनुदान में बड़े पैमाने पर धांधली का खुलासा हुआ है.

यह मामला अब देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) तक पहुंच गया है. आयोग को सौंपी गई औपचारिक शिकायत याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक सुसंगठित सिंडिकेट के जरिए सालों से बच्चों के नाम पर आने वाले सरकारी पैसों की लूट मचाई जा रही थी.

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कैसे अंजाम दिया जाता था 'घोटाला'? 
शिकायत के मुताबिक, संगरूर के भिंडरा सेंटर के तहत आने वाले तीन प्रमुख स्कूलों GPS भिंडरा, GPS बालियां और GPS संतोखपुरा में यह फर्जीवाड़ा चल रहा था.

1. जो बच्चे गांव छोड़ गए, उनकी भी लगती रही अटेंडेंस
पलायन कर चुके प्रवासी मजदूरों के बच्चों का नाम स्कूल रिकॉर्ड से हटाने के बजाय उनकी फर्जी हाजिरी लगाई जाती रही. इतना ही नहीं, जो बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे थे या जिनका अस्तित्व ही नहीं था, उन्हें भी कागजों में दर्ज रखा गया.

2. स्कॉलरशिप, राशन और दवाओं की चोरी
'e-Punjab' और U-DISE पोर्टल पर छात्रों की संख्या बढ़ाकर दर्ज की गई. इसके एवज में SC छात्रों को मिलने वाली प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप, फ्री यूनिफॉर्म, किताबें और मिड-डे मील का राशन हड़प लिया गया. यहां तक कि बच्चों के लिए आने वाली एनीमिया (खून की कमी) की फोलिक एसिड गोलियों और दवाइयों तक में गबन के आरोप हैं.

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3. बिना परीक्षा दिए फर्जी प्रमोशन
पिछले 5 सालों से बच्चों के शारीरिक मूल्यांकन या परीक्षा लिए बिना ही फर्जी असेसमेंट शीट्स बनाकर e-Punjab पोर्टल पर अपलोड की जा रही थीं, जो कि राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट 2009 और आईटी एक्ट का सीधा उल्लंघन है.

आरटीआई का जवाब नहीं

घोटाले की परतें खोलने के लिए जब ग्रामीणों और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने तीन अलग-अलग आरटीआई (RTI) आवेदन दाखिल किए, तो शिक्षा अधिकारियों की मिलीभगत से जानकारी दबा दी गई. आरोप है कि जब भी कोई शिक्षक या नागरिक इस धांधली के खिलाफ आवाज उठाता था, तो उस पर झूठी शिकायतें दर्ज कराकर दूर-दराज इलाकों में तबादला कर दिया जाता था.

NCSC से केंद्रीय जांच और कार्रवाई की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ताओं ने स्थानीय जांच के बजाय NCSC मुख्यालय से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है. संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत आयोग से आग्रह किया गया है कि रिकॉर्ड्स को तुरंत सील करके पूरे मामले की पुलिस और एफआईआर (FIR) जांच कराई जाए. दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के प्रमोशन और सालाना वेतन वृद्धि पर तत्काल रोक लगाई जाए.

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