साइंस फिक्शन हुआ सच! अब शर्ट की आस्तीन पर चलाएं वीडियो, जानें क्या है ये नया आविष्कार?

अब फोन निकालने की जरूरत नहीं, अपनी शर्ट की स्लीव पर ही वीडियो देखिए, कैलकुलेटर चाइए या बॉडी टेम्परेचर चेक कीजिए! नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) के वैज्ञानिकों ने दुनिया की पहली ऐसी पहनने योग्य टचस्क्रीन स्लीव बनाई है, जो 50 बार मशीन वॉश करने के बाद भी बिल्कुल सुरक्षित रहती है. इस शानदार खोज की टीम में भारतीय शोधकर्ता श्वेतिका चतुर्वेदी भी शामिल हैं.

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वॉशिंग मशीन में 50 बार धोने पर भी खराब नहीं होगी यह अनोखी टचस्क्रीन! सिंगापुर यूनिवर्सिटी में भारतीय शोधकर्ता का कमाल (Photo: news.nus.edu.sg) वॉशिंग मशीन में 50 बार धोने पर भी खराब नहीं होगी यह अनोखी टचस्क्रीन! सिंगापुर यूनिवर्सिटी में भारतीय शोधकर्ता का कमाल (Photo: news.nus.edu.sg)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई द‍िल्ली ,
  • 23 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:00 PM IST

कल्पना कीजिए कि आपको अपना बॉडी टेम्परेचर चेक करना हो, कोई वीडियो देखना हो या कैलकुलेटर चलाना हो. और इसके लिए आपको जेब से फोन निकालने की भी जरूरत न पड़े. आप बस अपनी शर्ट की आस्तीन (Sleeve) पर टैप करें और आपका काम हो जाए! यह सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लग सकता है, लेकिन नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर (NUS) के वैज्ञानिकों ने इसे सच कर दिखाया है.

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NUS के रिसर्चर्स ने एक ऐसी टचस्क्रीन स्लीव विकसित की है जिसे कपड़ों में आसानी से बुना जा सकता है. यह साधारण कपड़े को एक डिजिटल इंटरफेस में बदल देती है. इस स्मार्ट प्रोटोटाइप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इमेज और वीडियो दिखाने के साथ-साथ टच पर रिएक्ट करती है और दूसरे डिवाइस से वायरलेस तरीके से कनेक्ट भी हो सकती है. सबसे मजेदार बात यह है कि इसे 50 बार मशीन में धोने के बाद भी इसकी चमक और टच रिस्पॉन्स पर कोई असर नहीं पड़ा है.

इस बड़ी कामयाबी के पीछे जो रिसर्च टीम है, उसमें गर्व की बात यह है कि एक भारतीय शोधकर्ता श्वेतिका चतुर्वेदी (जो NUS में रिसर्च एसोसिएट हैं) भी शामिल हैं.

धागों से बनी टचस्क्रीन का कमाल

21 अक्टूबर 2026 को प्रतिष्ठित जर्नल 'नेचर' में पब्लिश इस रिसर्च में एक ऐसे फ्लेक्सिबल टेक्सटाइल डिस्प्ले के बारे में बताया गया है, जिसे खास तौर पर तैयार किए गए इलेक्ट्रॉनिक फाइबर्स (रेशों) से बनाया गया है. शोधकर्ताओं का दावा है कि यह कपड़े में इंटीग्रेट होने वाली दुनिया की पहली टचस्क्रीन है.

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पारंपरिक स्क्रीन्स की तरह इसमें किसी कड़क या रिज्ड पैनल का इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स को फाइबर्स के अंदर फिट किया गया है ताकि उन्हें कपड़े में आसानी से पिरोया जा सके.

NUS के असिस्टेंट प्रोफेसर तुराल खुदएव के नेतृत्व में टीम ने एक स्लीव में 54-पिक्सेल फाइबर्स को जोड़कर 168 mm लंबी और 105 mm चौड़ी स्क्रीन तैयार की है. इस स्क्रीन का रेजोल्यूशन 96×54 पिक्सल है और यह 30 फ्रेम प्रति सेकंड की स्पीड से रिफ्रेश हो सकती है. जब आप इस फाइबर पर उंगली से प्रेस करते हैं, तो इसका टच-संवेदनशील लेयर एक्टिव हो जाता है और सिस्टम भांप लेता है कि उंगली कहां पड़ी है, जिसके बाद संबंधित पिक्सेल चमक उठता है.

क्या-क्या कर सकती है यह 'स्मार्ट स्लीव'?

यह प्रोटोटाइप सिर्फ तस्वीरें दिखाने तक सीमित नहीं है. यह वीडियो चला सकती है, कैलकुलेटर रन कर सकती है, फोटो गैलरी दिखा सकती है, कम्पास (दिशा-सूचक) का काम कर सकती है, वॉइस कमांड सुन सकती है और ब्लूटूथ के जरिए तस्वीरें भी रिसीव कर सकती है.

इसके अलावा, रिसर्चर्स ने इसमें एक ऐसा माइक्रोफोन, स्पीकर और सेंसर्स भी जोड़े हैं जो तापमान, मूवमेंट, आसपास की ब्राइटनेस और मैग्नेटिक डायरेक्शन को माप सकते हैं. आस्तीन के नीचे लगाया गया टेम्परेचर सेंसर शरीर का तापमान मापकर उसे स्क्रीन पर दिखा सकता है. आने वाले समय में हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए यह तकनीक बेहद क्रांतिकारी साबित हो सकती है.

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और हां, इसे आसानी से धोया भी जा सकता है!

पियरबल इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि कपड़े मुड़ते हैं, खींचते हैं और उन्हें रोज धोया भी जाता है. ऐसे में नाज़ुक इलेक्ट्रॉनिक्स का टिक पाना मुश्किल होता है. लेकिन NUS की टीम ने साबित कर दिया कि डिटर्जेंट से 50 बार धोने के बाद भी उनकी यह स्मार्ट स्लीव पहले जैसी ही बेहतरीन कंडीशन में रही. इसके अलावा, इसे 5 मिमी के दायरे में 1,000 बार मोड़ने पर भी इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा. यह कपड़ा बिल्कुल आम कपड़ों की तरह लचीला और हवादार (ब्रीदेबल) बना रहता है.

हालांकि, यह तकनीक अभी भी एक रिसर्च प्रोटोटाइप है और स्मार्टफोन की जगह लेने में इसे अभी वक्त लगेगा. टीम का अगला लक्ष्य इसकी स्क्रीन के रेजोल्यूशन को बेहतर बनाना और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जोड़ना है. अगर यह प्रयास सफल रहे, तो आने वाले दिनों में हमारे कपड़े सिर्फ पहनने की चीज नहीं, बल्कि हमारी डिजिटल लाइफ का डायरेक्ट स्क्रीन और सेंसर बन जाएंगे!

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