'आदिवासी कीड़े हैं... सिर्फ बच्चे पैदा करेंगे' 16 किमी मार्च न‍िकाल छात्राओं ने बताया दर्द, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की कमी और जेल जैसे माहौल के खिलाफ 20 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च निकाला. छात्रों ने प्राचार्य की बर्खास्तगी, जातिसूचक टिप्पणी करने वाले शिक्षकों की सजा और अभिभावकों के सम्मान की मांग की. कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और एक कमेटी गठित की है.

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बड़वानी के छात्र-छात्राओं ने पैदल मार्च कर जताई गंभीर समस्याएं बड़वानी के छात्र-छात्राओं ने पैदल मार्च कर जताई गंभीर समस्याएं

जैद अहमद शेख

  • बड़वानी (मध्य प्रदेश),
  • 25 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:24 PM IST

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में सेंधवा स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (जामली) के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने अपनी गंभीर समस्याओं को लेकर बगावती रुख अख्तियार कर लिया है. विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की कमी, शिक्षकों द्वारा जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणियों, और जेल जैसे माहौल से तंग आकर सैकड़ों छात्र-छात्राएं कड़ाके की धूप में करीब 20 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च निकालकर बड़वानी कलेक्टर कार्यालय की ओर निकल पड़े.

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रास्ते में सेंधवा एसडीएम आशीष, एसडीओपी अजय वाघमारे और सहायक आयुक्त रंजना सिंह ने विद्यार्थियों को समझाकर रोकने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे और पैदल मार्च जारी रखा.

'आदिवासी कीड़े हैं... सिर्फ बच्चे पैदा करेंगे': छात्राओं ने रोते हुए बयां किया दर्द

पैदल मार्च कर रही छात्राओं ने स्कूल प्रशासन और शिक्षकों पर बेहद गंभीर और असंवेदनशील आरोप लगाए. छात्राओं का कहना है कि शिक्षकों का व्यवहार बेहद शर्मनाक है. वे हमें कहते हैं कि 'आदिवासी लोग कीड़े हैं, गरीब हैं, अनपढ़ और गवार हैं. ये आदिवासी बच्चे पढ़कर क्या कर लेंगे, ज्यादा से ज्यादा 10वीं-12वीं पढ़कर इन्हें बच्चे ही तो पैदा करना है.' हमें डिमोटिवेट किया जाता है. पेरेंट्स मीटिंग में आने वाले हमारे माता-पिता की कोई इज्जत नहीं की जाती. हमें स्कूल में जेल की तरह बंद रखा जाता है.

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छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि 20 किलोमीटर पैदल चलने के बाद जब वे जुलवानिया पहुंचीं, तो कलेक्टर जयति सिंह ने उनकी पूरी बात सुने बिना ही 2 मिनट में औपचारिक आश्वासन देकर बात खत्म कर दी.

विद्यार्थियों की मुख्य मांगें

स्कूल में बदइंतजमी और सख्त पाबंदियों के जिम्मेदार प्राचार्य पर कार्रवाई हो.
आदिवासियों पर अभद्र टिप्पणी करने वाले शिक्षकों को तुरंत स्कूल से निकाला जाए.
पेरेंट्स मीटिंग में आने वाले माता-पिता के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए.
छात्राओं के आने-जाने और टहलने की पाबंदियों को खत्म कर सुगम माहौल दिया जाए.

आरोपों पर प्राचार्य की सफाई: 'स्वतंत्रता चाहते हैं बच्चे'

दूसरी ओर एकलव्य आवासीय विद्यालय के प्राचार्य अजीत कुमार ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उनका कहना था कि बच्चों ने मुझे कभी इस तरह की समस्या नहीं बताई. एडोलसेंट (किशोरावस्था) उम्र के बच्चों को मोबाइल और नियम-कायदों में बंधना अच्छा नहीं लगता. सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक जब उन्हें डिसिप्लिन में रखा जाता है, तो उन्हें कसकसाहट होती है. वे पूरी स्वतंत्रता चाहते हैं. जहां तक पेरेंट्स के अपमान का सवाल है, अगर अभिभावक खुद कहें कि उनके साथ अभद्र व्यवहार हुआ, तो मैं मान लूंगा.

कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश, बनाई कमेटी

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मामला बढ़ता देख बड़वानी की कलेक्टर जयति सिंह ने जुलवानिया में छात्रों से मुलाकात कर बिंदुवार चर्चा की. कलेक्टर ने बताया कि हमारे जिले के बच्चे सुबह से पैदल निकले थे, हमारी पूरी संवेदनाएं उनके साथ हैं. बच्चों ने शिक्षकों द्वारा जातिसूचक शब्द बोलने और स्कूल ऑडिटोरियम, काउंसलिंग जैसी समस्याएं उठाई हैं. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी गई है. जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर कड़ी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल, प्रशासन के आश्वासन के बाद छात्र जांच रिपोर्ट और ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं. विद्यार्थियों का कहना है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला और दोषी शिक्षकों को नहीं हटाया गया, तो वे उग्र आंदोलन की योजना बनाएंगे.

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