पूरे देश में हजारों की संख्या में जेईई एडवांस परीक्षा में थर्ड अटेंप्ट को लेकर अभियान चला रहे हैं. वो सोशल मीडिया के जरिये ये अभियान चला रहे हैं. इसी अभियान से जुड़े एक छात्र ने अपनी कहानी के जरिये इस मांग के पीछे छिपी सच्चाई को सभी तक पहुंचाने की कोशिश की है. यहां उनके शब्दों में ही उनकी कहानी हूबहू हम दे रहे हैं. उनकी निजता को ध्यान में रखते हुए नाम उजागर नहीं किया गया है.
मेरी कहानी: JEE एडवांस्ड में तीसरे प्रयास की मांग क्यों कर रहा हूं?
मैं झारखंड से आता हूं. एक साधारण परिवार से, जहां IIT सिर्फ एक कॉलेज का नाम नहीं था, बल्कि मेरे लिए और मेरे परिवार के लिए बेहतर जिंदगी की उम्मीद थी. मुझे JEE के बारे में बहुत देर से पता चला. मेरे किसी स्कूल के दोस्त या कोचिंग संस्थान से नहीं, बल्कि दिल्ली में रहने वाले एक दूर के रिश्तेदार के जरिए. वे एक बड़ी MNC में काम करते हैं. उन्हीं से पहली बार मुझे पता चला कि IIT जैसी संस्थाएं क्या हैं और वहां पहुंचना किसी छात्र और उसके परिवार की जिंदगी बदलने का पहला कदम हो सकता है.
तब तक मेरी 12वीं की बोर्ड परीक्षा हो चुकी थी. जब मुझे JEE के बारे में सही मायने में पता चला, तब जनवरी JEE Main के लिए केवल लगभग चार महीने बचे थे. इतने कम समय में मेरे पास न सही गाइडेंस थी, न तैयारी के लिए पर्याप्त रिसोर्सेज. मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया.
लेकिन IIT का सपना वहीं खत्म नहीं हुआ.
मैंने ड्रॉप लिया. मेरा सपना हमेशा से IIT के किसी टॉप संस्थान में पढ़ने का रहा है. वैसे भी मेरे जैसे परिवार के लिए एक अच्छी सरकारी संस्था में पढ़ना सिर्फ एजुकेशन नहीं है, ये अपने हालातों को बदलने का एक रास्ता है. मेरी पहली तैयारी में सबसे बड़ी समस्या रीसोर्सेज की थी. महंगी कोचिंग मेरे परिवार की पहुंच से बाहर थी. इसी दौरान, अप्रैल अटेंप्ट से पहले मेरे पिता का ट्रांसफर कर्नाटक के एक छोटे से गांव में हो गया और हमें वहां जाना पड़ा. परिस्थितियां लगातार बदलती रहीं, लेकिन मैंने अपनी तैयारी जारी रखने की कोशिश की.
फिर JEE एडवांस्ड का वो दिन आया जिसे मैं शायद कभी नहीं भूल पाऊंगा. एग्जाम से सिर्फ दो दिन पहले मेरे एक करीबी रिश्तेदार का निधन हो गया. उसी समय मुझे लगभग 103°F तेज बुखार हो गया और मुझे एक दिन अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. डॉक्टरों ने मुझे परीक्षा में न जाने की सलाह दी थी.
लेकिन मैं फिर भी परीक्षा देने गया.
उसका नतीजा ये हुआ कि एग्जाम हॉल में मेरी हालत बिगड़ गई और मैं लगभग बेहोश होने की स्थिति में था. वहां मौजूद लोगों ने मुझे ORS और ड्रिंक्स दिए और मेरी लगभग एक घंटे की परीक्षा प्रभावित हुई. जिस परीक्षा के लिए मैंने महीनों मेहनत की थी, उसमें मैं अपनी वास्तविक क्षमता के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाया. उसके बाद मेरे अंदर बहुत निराशा और गिल्ट था. मेरे कई दोस्त कॉलेज चले गए, लेकिन प्राइवेट कॉलेजों की फीस मेरे परिवार की पहुंच से बाहर थी. इसलिए मैंने दूसरा ड्रॉप लिया.
आज मैं JEE Advanced में तीसरे प्रयास की मांग इसलिए नहीं कर रहा हूं कि मुझे कोई प्रिविलेज यानी विशेष अधिकार चाहिए. मैं तो सिर्फ एक फेयर चांस चाहता हूं. जब JEE Main में तीन अटेंप्टस का अवसर है और NEET, CUET, AILET जैसी कई परीक्षाओं में मल्टीपल अपॉच्यूनिटी हैं, तो JEE एडवांस्ड में छात्रों को केवल दो अटेंप्ट तक सीमित क्यों रखा जाए?
मौजूदा नियमों के अनुसार अभ्यर्थी लगातार दो वर्षों में अधिकतम दो बार ही JEE Advanced परीक्षा दे सकते हैं. पहला प्रयास कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा वाले वर्ष और दूसरा प्रयास उसके ठीक अगले वर्ष (ड्रॉप इयर) में मान्य होता है. इसके बाद तीसरे प्रयास की अनुमति बिल्कुल नहीं मिलती है.
मेरी मांग है कि तीन लगातार वर्षों में JEE एडवांस के तीन अटेंप्ट दिए जाएं. अगर यह संभव नहीं माना जाता तो कम से कम तीन लगातार वर्षों में दो अटेम्प्ट की व्यवस्था पर विचार किया जाए. क्योंकि मेरे लिए IIT सिर्फ एक इंस्टीट्यूट नहीं है. यह अपने और अपने परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद है. मैं बस एक और मौका चाहता हूं, अपनी क्षमता साबित करने का.
मानसी मिश्रा