हाथों में लहराता तिरंगा, 'वी वांट जस्टिस' के गूंजते नारे, खराब मौसम के बीच वॉटरप्रूफ शीट ताने सड़कों पर डटे युवा, और मंच से हुंकार भरता एक अनिश्चितकालीन अनशन... यह नजारा भले ही दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर की याद दिलाता हो, लेकिन इस वक्त आंदोलन की यह कहानी लिखी जा रही है झारखंड की राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और बापू वाटिका की गलियों में.
देश ने अभी NEET और पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली में जेन-जी छात्रों का उग्र और अनोखा प्रदर्शन देखा ही था कि अब 'रांची का जंतर-मंतर मोमेंट' भी बड़ा आकार ले चुका है. जेपीएससी (JPSC 14th) और जेएसएससी (JSSC-CGL) परीक्षाओं में कथित धांधली, OMR सीट में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन सोमवार को लगातार छठे (6th) दिन में प्रवेश कर गया.
छोटे से विरोध से 'राज्यव्यापी आंदोलन' का सफर
ये प्रदर्शन किसी राजनीतिक दल का तैयार किया हुआ एजेंडा नहीं था. इसकी शुरुआत रांची के बापू वाटिका मैदान में कुछ सौ परेशान छात्रों के शांत जमावड़े से हुई थी. लेकिन देखते ही देखते, सोशल मीडिया के दौर में जेन-जी की एकजुटता ने इसे एक राज्यव्यापी जन-आंदोलन में बदल दिया.
जैसे दिल्ली के आंदोलनों में सोनम वांगचुक जैसे चेहरे शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अनशन पर बैठे थे, ठीक उसी तर्ज पर रांची में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने मोर्चा संभाल लिया है. वे 14वीं JPSC परीक्षा को तुरंत रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया की सीबीआई (CBI) जांच की मांग को लेकर बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
मानसून के बादल तो छट जाएंगे, पर भ्रष्टाचार का साया कब हटेगा?
रांची में बीते दिनों मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली की कड़क भी इन छात्रों के हौसले को नहीं डिगा सकी. 'इंडिया टुडे' की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, जब बारिश के बीच एक प्रदर्शनकारी से पूछा गया कि वे इस विकट परिस्थिति में कैसे टिके हुए हैं, तो एक युवा छात्र ने कहा कि झारखंड के आसमान पर मानसून के बादल तो छाए ही हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के काले बादलों ने राज्य के लाखों छात्रों के भविष्य को ढंक लिया है. जब तक ये भ्रष्टाचार के बादल नहीं छंटते, हमारा यह आंदोलन थमने वाला नहीं है. स्टेडियम में गूंजता एक और कैची नारा इस आंदोलन की रूह को बयां करता है, सरकार जागे, इसलिए खुद रातों को जाग रहे हैं.
CJP का मिला साथ, क्या राष्ट्रीय स्तर पर फिर सुलगेगी आग?
जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, हेमंत सोरेन सरकार पर प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है. इस आंदोलन को अब राष्ट्रीय स्तर पर छात्रों के हक में आवाज उठाने वाली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का भी समर्थन मिल गया है. CJP के संस्थापकों ने आंदोलनकारी छात्रों से बात कर उनकी मांगों को सही ठहराया है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपना समर्थन देने का औपचारिक ऐलान किया है. लेकिन अब सवाल ये भी है कि क्या सीजेपी उसी तीव्रता से झारखंड के आंदोलन को सपोर्ट करेगी. सोशल मीडिया पर लगातार छात्र उनसे एक मंच पर साथ आने को कह रहे हैं.
Gen-Z का मैसेज साफ है: 'सिस्टम बदलो या फिर परिणाम भुगतो'
2026 का यह दौर बता रहा है कि आज का छात्र अब सिर्फ कमरों में बैठकर किताबों तक सीमित रहने वाला नहीं है. सोशल मीडिया की ताकत, निष्पक्षता की जिद और अधिकारों के प्रति जागरूकता ने टियर-2 और टियर-3 शहरों के छात्रों को भी अपने अधिकारों के लिए 'जंतर-मंतर' जैसा मंच तैयार करने की हिम्मत दे दी है. रांची का यह प्रदर्शन महज एक परीक्षा रद्द कराने की मांग नहीं, बल्कि राज्यों के ढर्रे पर चल रहे भर्ती बोर्ड्स के खिलाफ युवाओं की सीधी जंग है.
आजतक एजुकेशन डेस्क