हेमंत सोरेन ने मांगें मानीं पर हाईकोर्ट ने द‍िया स्टे! क्या बेजा गया झारखंड का छात्र आंदोलन? जानें आगे क्या होगा

झारखंड सरकार ने JPSC JSSC CGL की कई भर्ती परीक्षाओं पर रोक लगाने की मांगें मान ली थीं. लंबे समय से चल रही भूख हड़ताल कर रहे छात्रों ने इसे जीत मानते हुए खुशि‍यां मनाईं, लेकिन दूसरी तरफ इन भर्त‍ियों से सेलेक्ट लोग थे जो जॉब कर रहे थे या न‍ियुक्त‍ि प्रक‍िया से गुजर रहे थे. हाईकोर्ट ने इनके पक्ष को सुना और सरकार के फैसलों पर रोक लगा दी, अब सवाल है कि क्या ये अनशन बेजा हो गया?

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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार ने दिया था बड़ा फैसला (Photo: PTI) झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार ने दिया था बड़ा फैसला (Photo: PTI)

मानसी मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:30 PM IST

झारखंड की राजनीति और प्रतियोगी छात्रों के भविष्य से जुड़ा एक बड़ा मोड़ सामने आया है. हेमंत सोरेन सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर धांधली के आरोपों के बाद JSSC-CGL, 11th-13th JPSC, CDPO और FSO समेत कुल 22 भर्ती प्रक्रियाओं और परीक्षाओं को रद्द कर दिया था. हालांकि, झारखंड हाईकोर्ट ने इस फैसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार की रद्द करने वाली अधिसूचनाओं पर अंतरिम स्टे लगा दिया है.

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2300 से 2600 कर्मचारियों को मिली सीधी राहत
मीडिया रिपोर्ट्स और याचिकाकर्ता के वकीलों के आंकड़ों के मुताबिक, 22 रद्द की गई परीक्षाओं में से 4 मुख्य भर्ती परीक्षाएं ऐसी थीं जिनमें अभ्यर्थी चयनित होकर पदों पर तैनात हो चुके थे. हाईकोर्ट के इस फैसले से सीधे तौर पर सेवा में बहाल रहने वाले कर्मचारियों का ब्योरा इस प्रकार है. 

JSSC Combined Graduate Level (JSSC-CGL): 1,932 चयनित अभ्यर्थी, जिनकी नौकरी रद्द हो गई थी.
11th–13th JPSC Combined Civil Services: 342 नवनियुक्त अधिकारी (डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी आदि).
Child Development Project Officer (CDPO): 64 अधिकारी.
Food Safety Officer (FSO): 54 पद.

कुल मिलाकर 2,392 से अधिक नियुक्त (Joined) अफसरों व कर्मचारियों की नौकरियां बर्खास्त होने से बच गई हैं. वहीं, प्रक्रिया में शामिल अन्य पदों को मिलाकर यह आंकड़ा 2600 के पार पहुंचता है.

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2600 से ज्यादा नौकरियां बचीं, लेकिन छात्रों में आक्रोश बरकरार

हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर से जहां सेवा में आ चुके अभ्यर्थियों के चेहरे पर खुशी लौटी है, वहीं दूसरी ओर धांधली का आरोप लगाकर परीक्षा रद्द कराने की मांग पर अड़े छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है. भूख हड़ताल पर लंबे समय तक बैठे रहे छात्र नेता राहुल क्रांति ने इस फैसले के बाद सोरेन सरकार की कानूनी मंशा और तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

छात्र नेता राहुल क्रांति का क्या कहना है?

राहुल कुमार ने कहा कि सरकार के फैसले को माननीय उच्च न्यायालय ने जिस तरह से स्टे लगाया है, उसमें सरकार की सरासर गलती है. सरकार ने अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा. सरकार को चाहिए था कि CID रिपोर्ट के साथ अपना पक्ष मजबूती से रखे, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया. यह छात्रों के साथ सरासर धोखा है. सरकार को सीनियर एडवोकेट उतारना चाहिए था, लेकिन जूनियर एडवोकेट उतारे गए. सरकार ने अपनी कोई जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत नहीं की, जिसके कारण उच्च न्यायालय ने परीक्षा रद्द करने के फैसले पर स्टे लगा दिया. छात्र अब चुप नहीं बैठेंगे. आज मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया जाएगा और आगे की रणनीति बनाकर सरकार को पूरी ताकत से घेरा जाएगा.

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तो क्या बेजा (बेकार) गई भूख हड़ताल?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि परीक्षा रद्द कराने और सीबीआई/सीआईडी जांच की मांग को लेकर छात्रों द्वारा किया गया आंदोलन क्या बेजा चला गया? सरकार ने भले ही प्रदर्शनकारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनकी सभी मांगें मान ली थीं लेकिन हाईकोर्ट ने माना कि बिना किसी ठोस व्यक्तिगत जांच और नेचुरल जस्टिस के नियमों का पालन किए चयनित अधिकारियों को हटाना गलत है. इससे 2600 से अधिक परिवारों की आजीविका बच गई है.

वहीं राहुल क्रांति जैसे छात्र नेताओं का मानना है कि भूख हड़ताल बेजा नहीं गई है. सरकार की 'कमजोर पैरवी' और CID रिपोर्ट कोर्ट में पेश न करने के कारण ऐसा हुआ है. छात्र अब कानूनी खामियों के खिलाफ लड़ाई को सड़क से लेकर नए सिरे तक ले जाने की तैयारी में हैं. हाईकोर्ट के इस स्टे के बाद झारखंड में एक बार फिर नियुक्तियों को लेकर कानूनी और सियासी घमासान तेज होना तय है.

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