दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के बाहर मंगलवार को सुरक्षा बढ़ा दी गई है. लेफ्ट संगठनों ने दोपहर 3 बजे प्रदर्शन का ऐलान किया है. इसके मद्देनजर मौके पर भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है. वहीं, BNSS की धारा 163 लागू किए जाने की जानकारी है. हालांकि, फिलहाल प्रदर्शन स्थल खाली पड़ा है और वहां प्रदर्शनकारी नजर नहीं आ रहे हैं.
दो दशक से नहीं हुआ है चुनाव
बता दें कि जामिया में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से नहीं हुए हैं. छात्रों की मांग है कि छात्रसंघ बहाल किया जाए और चुनाव कराने की समयसीमा तय हो. इसी मांग को लेकर 12 अक्टूबर से विरोध-प्रदर्शन और भूख हड़ताल शुरू हुई थी. प्रदर्शनकारी छात्रों ने अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और सुरक्षा कर्मचारियों के व्यवहार की जांच कराने की मांग को लेकर भी लगातार प्रदर्शन कर रही है.
26 अक्टूबर को छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत के बाद प्रशासन ने छात्रसंघ चुनाव कराने, प्रदर्शन के दौरान जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने तथा सुरक्षा कर्मचारियों के आचरण की जांच के लिए समिति बनाने का आदेश जारी किया. हालांकि, चुनाव की तारीख अभी तय नहीं हुई है. आदेश के मुताबिक, चुनाव छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद कराए जाएंगे.
पुलिस ने क्या एक्शन लिया?
लगातार हो रहे प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में लिया. पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई और विश्वविद्यालय के मुख्य गेट बंद कर दिए गए. इसके बाद कुछ छात्र गेट फांदकर परिसर में दाखिल हुए. वहीं, 27 अक्टूबर को विश्वविद्यालय ने प्रदर्शनकारियों को धरना स्थल खाली करने का कानूनी नोटिस भी दिया.
क्या आंदोलन खत्म हो गया?
विश्वविद्यालय ने चुनाव, निलंबन और सुरक्षा कर्मचारियों के आचरण की जांच को लेकर कदम उठाए हैं, लेकिन चुनाव की प्रक्रिया संविधान को मंजूरी मिलने पर निर्भर है. प्रशासन ने प्रदर्शन समाप्त करने को कहा है, जबकि छात्रों की कुछ मांगें लंबित होने की बात सामने आई है. इसलिए इसे आंदोलन पूरी तरह खत्म होने के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा.
अंशुल सिंह