IIT दिल्ली में 31 साल के MSc फिजिक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद छात्रों का प्रदर्शन जारी है. अपनी मांगों पर अड़े छात्रों का कहना है कि वह प्रशासन के जवाब से सहमत नहीं हैं. उन्होंने इसे “अपर्याप्त और टालमटोल वाला” बताते हुए अपनी मांगों को मानने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है. 24 अगस्त की देर शाम लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में हुई छात्र बैठक के मिनट्स के अनुसार, प्रदर्शनकारी छात्रों ने ऋषिकेश की स्थिति को मुख्य रूप से उनके मेडिकल इतिहास के जरिए पेश किए जाने पर आपत्ति जताई है. छात्रों का आरोप है कि प्रशासन के जवाब में ऋषिकेश की मां, दोस्तों, फिजिक्स विभाग के सहपाठियों और कैंपस के अन्य सदस्यों द्वारा उनकी समस्याओं और उनके समाधान के तरीके को लेकर कही गई बातों को “कमतर करके दिखाया गया और नजरअंदाज किया गया.
बाहरी जांच समिति पर भी उठे सवाल
छात्रों ने IIT दिल्ली की ओर से गठित बाहरी जांच समिति की संरचना पर भी सवाल उठाए हैं. खास तौर पर उन्होंने उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी और IIT दिल्ली के पूर्व छात्र अशोक कुमार को समिति में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई है. प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि अतीत में छात्र प्रदर्शनों को रेडिकलाइजेशन और डिजिटल टेररिज्म जैसे शब्दों से जोड़ने वाली उनकी सार्वजनिक टिप्पणियों के कारण संवेदनशील और निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल खड़े होते हैं. छात्रों ने मांग की है कि समिति का दोबारा से गठन किया जाए और इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाए.
छात्रों की मांग
1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग
छात्रों ने ऋषिकेश के परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की अपनी मांग भी दोहराई है. उनका कहना है कि प्रशासन ने मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति और संस्थान के बेनेवोलेंट फंड तथा स्वैच्छिक योगदान के जरिए आर्थिक मदद की बात कही है लेकिन किसी निश्चित मुआवजा राशि का स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया. छात्रों ने इसे टालमटोल वाला जवाब बताते हुए प्रशासन से मुआवजे की राशि पर स्पष्ट प्रतिबद्धता की मांग की है.
मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर पारदर्शिता की मांग
इसके साथ ही छात्रों ने बाहरी ओम्बड्सपर्सन नियुक्त करने के प्रस्ताव का स्वागत किया, लेकिन कहा कि सिर्फ शिकायत निवारण की व्यवस्था बनाना पर्याप्त नहीं होगा. उन्होंने IIT दिल्ली से छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए मौजूदा प्रोटोकॉल को सार्वजनिक करने और इन व्यवस्थाओं में किसी तरह की कमी होने पर उसकी समीक्षा करने की मांग की है, ताकि कैंपस में व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए जा सकें. छात्रों ने मेंटल हेल्थ से जूझ रहे छात्रों के लिए प्रशासन की ओर से बताए गए “माता-पिता के सहयोग” के संदर्भ पर भी सवाल खड़ा किया है. उनका कहना है कि छात्रों को साथियों का सहयोग, समान शैक्षणिक अवसर और संवेदनशील एवं सहयोगी कैंपस माहौल भी मिलना चाहिए.
प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कार्रवाई न करने का आश्वासन मांगा
छात्रों ने कुछ फैकल्टी सदस्यों की ओर से प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के खिलाफ की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने IIT दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी से अपनी बातों को दोहराने की मांग की है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ संस्थान, दिल्ली पुलिस या किसी बाहरी एजेंसी की ओर से कोई दंडात्मक या बदले की कार्रवाई नहीं की जाएगी.
IIT दिल्ली ने क्या कहा?
वहीं, इस मामले में IIT दिल्ली ने कहा कि ऋषिकेश कुमार ने जुलाई 2025 में एमएससी फिजिक्स कार्यक्रम में दाखिला लिया था और पहले सेमेस्टर में उनका अकादमिक प्रदर्शन अच्छा रहा था. संस्थान के मुताबिक, मार्च 2026 में उन्हें मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हुईं. संस्थान के काउंसलर और मनोचिकित्सक ने उन्हें लगातार माता-पिता की निगरानी में रहने की सलाह दी थी. इसके बाद उन्होंने दूसरे सेमेस्टर से नाम वापस ले लिया और अपने माता-पिता के साथ कैंपस के बाहर रहने लगे. संस्थान ने बताया कि जुलाई 2026 में IIT दिल्ली लौटने के बाद उनके मेडिकल रिकॉर्ड की दोबारा समीक्षा की गई और उन्हें फिर माता-पिता की निगरानी में रहने की सलाह दी गई. इसके बाद उन्होंने तीसरे सेमेस्टर से नाम वापस लेने के लिए आवेदन किया, जिसे फिजिक्स विभाग ने मंजूरी दे दी.
दो हफ्ते में रिपोर्ट देगी बाहरी समिति
IIT दिल्ली ने ऋषिकेश की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच के लिए एक External Inquiry Committee गठित की है. समिति छात्रों, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों से बात करेगी, मौजूदा प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं की समीक्षा करेगी और सुधार के सुझाव देगी. समिति को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. समिति में उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी और IIT दिल्ली के पूर्व छात्र अशोक कुमार, AIIMS दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर प्रताप शर्मा, दो छात्र प्रतिनिधि और रजिस्ट्रार शामिल हैं. रजिस्ट्रार समिति के सचिव और संयोजक की भूमिका में हैं. संस्थान ने ऋषिकेश के परिवार को मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति और बेनेवोलेंट फंड के जरिए आर्थिक सहायता देने की भी बात कही है. इसके अलावा फैकल्टी, छात्रों और कर्मचारियों के स्वैच्छिक योगदान से एक अलग फंड बनाने का प्रस्ताव रखा गया है.
अनमोल नाथ