नए सैनिक स्कूलों पर RSS का कंट्रोल? राहुल गांधी के आरोपों का सरकार ने दिया जवाब

राहुल गांधी के इस आरोप पर कि नए सैनिक स्कूल RSS से जुड़ी संस्थाओं को दिए जा रहे हैं, रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्रों ने जवाब दिया है. उनका कहना है कि PPP मॉडल के तहत स्कूलों के चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और कई स्तरों की जांच के बाद ही मंजूरी दी जाती है. वहीं संसदीय समिति ने भी सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है.

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एक BJP सांसद ने इस आरोप का कड़ा विरोध किया और इसे सबूतों के साथ साबित करने को कहा (सांकेतिक फोटो) एक BJP सांसद ने इस आरोप का कड़ा विरोध किया और इसे सबूतों के साथ साबित करने को कहा (सांकेतिक फोटो)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:57 AM IST

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि नए सैनिक स्कूल RSS से जुड़ी संस्थाओं को सौंपे जा रहे हैं. इसका रक्षा विभाग के वरिष्ठ सूत्रों ने खंडन किया है. सूत्रों का कहना है कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत चयन प्रक्रिया पारदर्शी है और इसमें कई स्तरों पर जांच-पड़ताल होती है.

यह स्पष्टीकरण रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति की बैठक में हुई तीखी बहस के बाद आया है, जिसमें गांधी ने आरोप लगाया था कि सैनिक स्कूलों का "निजीकरण" किया जा रहा है और उनका प्रबंधन RSS से जुड़े संगठनों को सौंपा जा रहा है.

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रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ सूत्र ने इंडिया टुडे को बताया, 'PPP मॉडल के तहत नए सैनिक स्कूलों के चयन की प्रक्रिया काफी पारदर्शी है.'

एक BJP सांसद ने इस आरोप का कड़ा विरोध किया और गांधी से इसे दस्तावेजी सबूतों के साथ साबित करने को कहा.

समिति के अध्यक्ष राधा मोहन सिंह ने कहा है कि पैनल स्कूलों के प्रबंधन और कामकाज में निजी संस्थाओं की भूमिका के बारे में सरकार से विस्तृत जानकारी मांगेगा.

नए सैनिक स्कूलों का चयन कैसे होता है

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अक्टूबर 2021 में PPP मॉडल के तहत 100 नए सैनिक स्कूलों की स्थापना को मंजूरी दी थी. इनमें से तीन चरणों में 86 स्कूलों को मंजूरी दी गई है . बाकी स्कूलों के लिए चौथे चरण के तहत आवेदनों पर प्रक्रिया चल रही है.

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NGO, ट्रस्ट, सोसाइटी और निजी व सरकारी स्कूल 'ग्रीनफील्ड' या 'ब्राउनफील्ड' श्रेणी के तहत नया सैनिक स्कूल स्थापित करने के लिए आवेदन कर सकते हैं.

आवेदन एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जमा किए जाते हैं और सबसे पहले वर्दीधारी अधिकारियों वाली पांच सदस्यीय 'दस्तावेज जांच समिति' (Documents Scrutiny Committee) इनकी जांच करती है. यह पैनल देखता है कि आवेदक जमीन, बुनियादी ढांचे, खेल सुविधाओं और अन्य बुनियादी मानदंडों से जुड़ी जरूरतों को पूरा करता है या नहीं.

इस चरण को पार करने वाले स्कूलों का भौतिक निरीक्षण 'स्कूल मूल्यांकन समिति' (School Evaluation Committee) करती है, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर, जिले के नवोदय विद्यालय या केंद्रीय विद्यालय के प्रिंसिपल और निकटतम सैनिक स्कूल के प्रिंसिपल शामिल होते हैं.

समिति आवेदक की सुविधाओं की पुष्टि करती है और अपना मूल्यांकन सैनिक स्कूल सोसाइटी को सौंपती है.

इसके बाद रिपोर्ट की जांच 'मंजूरी समिति' (Approval Committee) करती है, जिसमें सैनिक स्कूल सोसाइटी के मानद सचिव, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के प्रतिनिधि और ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी आदि शामिल होते हैं.

मंजूरी के लिए नियम

रक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया में भौगोलिक विस्तार, जिले की जनसंख्या घनत्व और हर जिले में एक नया सैनिक स्कूल मंजूर करने के सिद्धांत को ध्यान में रखा जाता है.

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ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स की तुलना में मौजूदा ब्राउनफील्ड स्कूलों को प्राथमिकता दी जाती है. ब्राउनफील्ड आवेदकों में, बेहतर एकेडमिक रिकॉर्ड वाले स्कूलों को प्राथमिकता दी जाती है.

सूत्रों ने बताया कि प्राइवेट डे स्कूलों की तुलना में बोर्डिंग स्कूलों को भी प्राथमिकता दी जाती है.

नए सैनिक स्कूल डे स्कूल, रेजिडेंशियल स्कूल या डे-कम-बोर्डिंग संस्थानों के तौर पर चल सकते हैं. डे स्कूलों के लिए कम से कम छह एकड़ ज़मीन की ज़रूरत होती है, जबकि रेजिडेंशियल स्कूलों के लिए कम से कम आठ एकड़ ज़मीन चाहिए.

रक्षा सूत्रों ने कहा कि इस योजना का मकसद युवा छात्रों को ज़िम्मेदार नागरिक बनाना है. साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि कई चरणों वाली चयन प्रक्रिया राजनीतिक या वैचारिक जुड़ाव के बजाय निष्पक्ष मानदंडों पर आधारित है.

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