Exclusive: 91 कॉलेज, 829 करोड़ का बजट... फिर भी 96% DU छात्र प्राइवेट PG माफिया के भरोसे क्यों?

पीजी के एक महीने का किराया, सालाना फीस से भी ज्यादा है. ये हम नहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र कह रहे हैं. सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद से छात्रोें और उनके माता-पिता में डर का माहौल है. लेकिन सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है. अब छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सवाल कर रहे हैं कि आखिर कहां हैं बच्चों के लिए हॉस्टल?

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करोड़ों का बजट फिर भी पीजी माफियो के भरोसे छात्र. (Photo Credit: Sanjay Kumar) करोड़ों का बजट फिर भी पीजी माफियो के भरोसे छात्र. (Photo Credit: Sanjay Kumar)

अमित भारद्वाज

  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:02 PM IST

दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल बनाने की रफ्तार पिछले एक दशक में बेहद धीमी रही है. विश्वविद्यालय में करीब 2.5 लाख छात्र हर साल एडमिशन लेते हैं, लेकिन हॉस्टल की सुविधा सिर्फ करीब चार प्रतिशत छात्रों को ही मिल पाती है....

6 सितंबर को रविवार के दोपहर दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास मौत और तबाही का मंजर देखने को मिला. सत्य न‍िकेतन की पीजी बिल्डिंग अचानक ढह गई, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में बेहतर भविष्य की नींव रखने आए सात छात्रों की मौत हो गई. अब साउथ कैंपस के छात्र इसे हादसा नहीं, बल्कि हत्या बता रहे हैं. वे मृत छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं. साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन से उनका बड़ा सवाल है कि हमारे हॉस्टल आखिर कहां हैं?

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देश के अलग-अलग राज्यों से आते हैं

बता दें कि डीयू में पढ़ने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र पढ़ने आते हैं, लेकिन सभी छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में उन्हें मजबूरी में छोटे, भीड़भाड़ वाले इलाकों में PG या किराए के कमरों में रहना पड़ता है. राजधानी कॉलेज के एक छात्र ने बताया कि अगर रहने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होगी, तो छात्रों को संकरी गलियों और असुरक्षित इमारतों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. उन्होंने बताया कि उनका अपना PG भी कॉलेज से दूर एक संकरी और अंधेरी गली में है. 

(Photo Credit: Sanjay Kumar)

ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो... 

सत्य न‍िकेतन हादसे के बाद छात्रों के मन में अब भी डर का माहौल है. ARSD कॉलेज की तीसरे वर्ष की छात्रा प्रिया दत्त ने बताया कि रविवार दोपहर जब PG के पास की इमारत गिरी, तो ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो, उन्हें लगा कि शायद वे जिंदा नहीं बच पाएंगी. प्रिया का PG उस इमारत के ठीक बगल में था जो गिर गई. उनके PG को भी असुरक्षित घोषित किया गया है. यह इमारत लोहे के खंभों के सहारे खड़ी है और इसे चरणबद्ध तरीके से गिराया जाएगा. हादसे के समय प्रिया अपना मोबाइल फोन लेकर PG से बाहर निकलने में सफल रहीं. असम की रहने वाली प्रिया का सवाल है कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय देश की बड़ी यूनिवर्सिटी में से एक है, तो प्रशासन छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल क्यों नहीं बना रहा है? 

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PG का एक महीने का किराया, सालाना फीस से भी ज्यादा

वहीं, मैत्रेयी कॉलेज की छात्रा सौम्या ने भी सत्य निकेतन में धरना दिया. वह छात्रों की सुरक्षा और हॉस्टल की कमी के लिए जवाबदेही की मांग कर रही थीं. उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय इतना प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय है, तो क्या छात्रों को रहने जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं मिलनी चाहिए? DU के 91 कॉलेज हैं, फिर भी छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल क्यों नहीं हैं? सौम्या ने यह भी बताया कि PG का महीने का किराया कई कॉलेजों की सालाना फीस से भी ज्यादा है. 

(Photo Credit: Sanjay Kumar)

2.5 लाख छात्रों के लिए बेहद कम हॉस्टल

दिल्ली में हुए PG हादसे ने डीयू की पुरानी परेशानी को एक बार फिर सबसे सामने ला दिया है. DU में हॉस्टल की सुविधा बहुत सीमित है. दिल्ली विश्वविद्यालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय में कुल 2.51 लाख छात्र नामांकित थे. जिसमें 

2,10,907 छात्र अंडरग्रेजुएट यानी UG कोर्स में थे. 
34,520 छात्र पोस्टग्रेजुएट और PhD कार्यक्रमों में थे. 
6,047 छात्र सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स में थे. 

विश्वविद्यालय के अपने रिकॉर्ड के अनुसार DU के कुल 91 कॉलेज हैं. विश्वविद्यालय को NAAC से A++ ग्रेड मिला हुआ है और NIRF यूनिवर्सिटी रैंकिंग में यह छठे स्थान पर है. 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक, DU को करीब 829 करोड़ रुपये का अनुदान मिला था, जबकि उसका कुल खर्च करीब 1,067 करोड़ रुपये रहा. अनुदान और खर्च के बीच का अंतर विश्वविद्यालय ने अपनी आंतरिक आय से पूरा किया. लेकिन जब हॉस्टल की बात आती है ,तो तस्वीर कुछ और ही होती है. 

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(Photo: PTI)

 
DU के हॉस्टल में करीब 2,800 सीटें

दिल्ली विश्वविद्यालय में करीब 19 यूनिवर्सिटी हॉस्टल हैं. इनमें से ज्यादातर हॉस्टल पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए हैं. हालांकि, कई हॉस्टल में UG छात्रों के लिए भी सीटों का प्रावधान है. इन यूनिवर्सिटी हॉस्टलों में कुल मिलाकर करीब 2,800 सीटें ही हैं. 

प्रमुख हॉस्टल और उनकी लगभग क्षमता इस प्रकार है:

गीतांजलि हॉस्टल- 120 सीटें
ग्वायर हॉल- 130 सीटें
इंटरनेशनल स्टूडेंट्स हाउस फॉर वुमेन- 98 सिंगल-बेड कमरे
जुबली हॉल- 110 सीटें
मानसरोवर हॉस्टल - 150 सीटें
मेघदूत हॉस्टल -90 सीटें
नॉर्थ ईस्टर्न स्टूडेंट्स हाउस फॉर वुमेन - 101 सीटें
पोस्टग्रेजुएट मेन्स हॉस्टल - 100 सीटें
राजीव गांधी हॉस्टल फॉर गर्ल्स - 520 सीटें
सरमाती पोस्टग्रेजुएट मेन्स हॉस्टल - 250 सीटें
अंडरग्रेजुएट हॉस्टल फॉर गर्ल्स - 560 सीटें

कुछ कॉलेजों ने खुद बनाए हॉस्टल

हालात ये हैं कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों ने अपने स्तर पर छात्रों के लिए हॉस्टल बनाए हैं लेकिन इन कॉलेजों में उपलब्ध सीटों को जोड़ने के बाद भी छात्रों की संख्या के मुकाबले हॉस्टल की सुविधा बहुत कम है. नॉर्थ कैंपस में सेंट स्टीफंस कॉलेज, SRCC, रामजस कॉलेज, हिंदू कॉलेज, किरोड़ी मल कॉलेज और इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वुमेन जैसे कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा है. साउथ कैंपस में श्री वेंकटेश्वर कॉलेज और लेडी श्रीराम कॉलेज ने भी अपने छात्रों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था की है. 

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कुल मिलाकर दिल्ली विश्वविद्यालय के करीब 15 कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा है. इन कॉलेजों को मिलाकर करीब 3,700 हॉस्टल सीटें उपलब्ध हैं. 

हॉस्टल वाले प्रमुख DU कॉलेज

सेंट स्टीफंस कॉलेज - 400 सीटें
हिंदू कॉलेज - 560 सीटें, नए हॉस्टल टेंडर दस्तावेजों के अनुसार
हंसराज कॉलेज - 230 सीटें, 2023-24 के रिकॉर्ड के अनुसार
किरोड़ी मल कॉलेज - करीब 150-170 सीटें
रामजस कॉलेज - 200 सीटें
श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) - 276 सीटें
मिरांडा हाउस - 360 से ज्यादा सीटें
दौलत राम कॉलेज - 200 से ज्यादा सीटें
इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वुमेन (IPCW) - 450 से ज्यादा सीटें, दो हॉस्टल
लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वुमेन (LSR) - 288 सीटें
श्री वेंकटेश्वर कॉलेज - 150 सीटें

जब दिल्ली विश्वविद्यालय और उसके कॉलेजों के सभी हॉस्टल की सीटों को मिलाकर देखा जाता है, तो कुल संख्या करीब 6,500 से 7,000 सीटों के आसपास होती है मतलब साफ है कि करीब 2.5 लाख छात्रों वाले विश्वविद्यालय में 4 प्रतिशत से भी कम छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध है. 

NHRC ने भी मांगा जवाब

अब ये मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है. ये राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच चुका है. 7 सितंबर को NHRC के प्र‍ियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली NHRC बेंच ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के चेयरमैन और दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया. NHRC ने दोनों से डीयू प्रशासन के साथ मिलकर हॉस्टल से जुड़े कई सवालों के ठोस जवाब देने को कहा है. इनमें वर्तमान हॉस्टल क्षमता, हॉस्टल की संख्या बढ़ाने की संभावना और मौजूदा हॉस्टल की सुविधाओं को बेहतर बनाने जैसे मुद्दे शामिल हैं. 

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