तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में कहा कि राज्य की नई शिक्षा नीति का फोकस ‘Gen Alpha’ और ‘Gen Beta’ पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर होगा. उन्होंने आगे कहा कि दुनिया में शिक्षा के क्षेत्र में अपनाई जा रही बेहतरीन व्यवस्थाओं को तेलंगाना में लागू किया जाना प्राथमिकता है ताकि राज्य के छात्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें.
विधानसभा में शिक्षा पर हुई संक्षिप्त चर्चा में प्रस्तावित नई शिक्षा नीति को लेकर सदस्यों से सुझाव भी मांगे गए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार सभी सुझावों की समीक्षा करेगी और छात्रों के हित में कदम उठाएगी. नई शिक्षा नीति तैयार करने के लिए पहले ही शिक्षा आयोग का गठन किया जा चुका है. के. केशव राव के नेतृत्व वाली समिति शिक्षा आयोग की रिपोर्ट की भी समीक्षा करेगी.
शिक्षा बजट को 15 फीसदी तक बढ़ाने पर फोकस
इसके साथ ही रेवंत रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य वार्षिक बजट में शिक्षा के लिए आवंटन को बढ़ाकर 15 फीसदी करना है. उन्होंने बताया कि 2023-24 में तत्कालीन बीआरएस सरकार ने शिक्षा के लिए ₹19,093 करोड़ आवंटित किए थे. वहीं, कांग्रेस सरकार की ओर से 2024-25 में यह राशि बढ़ाकर ₹21,292 करोड़, 2025-26 में ₹23,108 करोड़ और 2026-27 में ₹26,647 करोड़ कर दी. सीएम की ओर से जारी आंकड़ों में बताया गया है कि पिछले तीन सालों में शिक्षा बजट 7,554 करोड़ की वृद्धि हुई है.
सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई अभिभावक बच्चों को दो साल की उम्र से ही प्राइवेट स्कूल में भेजना शुरू कर देते हैं. सरकारी स्कूलों में बच्चों के पांच साल की उम्र में दाखिले की व्यवस्था के कारण अभिभावक निजी स्कूलों की ओर जाते थे, जहां नर्सरी स्तर से अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई उपलब्ध होती है.
उन्होंने विधानसभा में बताया कि सरकार ने सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी शिक्षा शुरू की है और पहले वर्ष में 64,000 बच्चों को इसका लाभ मिला. नर्सरी से कक्षा 12 तक छात्रों और शिक्षकों के लिए मिड-डे मील की व्यवस्था भी मिलेगी. गुणवत्तापूर्ण और स्वच्छ नाश्ता व भोजन उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीकृत किचन विकसित किए गए हैं. साथ ही डाइट और कॉस्मेटिक चार्ज में भी बढ़ोतरी की गई है.
सरकारी स्कूलों में 86 हजार छात्रों का बढ़ा नामांकन
रेवंत रेड्डी ने कहा कि शिक्षा लोगों के जीवन में बदलाव लाने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है. सरकार की ओर से किए गए सर्वे के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक पिछड़ेपन की जड़ संपत्ति या हैसियत की कमी नहीं, बल्कि शिक्षा तक पहुंच का अभाव है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जब से उनके पास शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है, सरकारी स्कूलों में छात्रों का नामांकन 86,000 बढ़ा है। उन्होंने इसे शिक्षा मंत्री के तौर पर अपने प्रदर्शन का प्रमाण बताया.
55 दिनों में 10,006 शिक्षकों की भर्ती का दावा
वहीं, अगर शिक्षकों के भर्ती की बात करें, तो सीएम ने कहा कि शिक्षा उनके लिए जुनून है और उनका दृढ़ विश्वास है कि देश का भविष्य कक्षा में तैयार होता है. उन्होंने बताया कि सरकार के कार्यकाल के पहले वर्ष में 55 दिनों के भीतर 10,006 शिक्षक पदों को भरा गया. उनके अनुसार, यह भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की गई.
रेवंत रेड्डी ने पिछली बीआरएस सरकार पर शिक्षा क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि उसके 10 साल के शासन में केवल 7,857 शिक्षक पदों पर भर्ती की गई. उन्होंने पॉलीटेक्निक कॉलेजों से जुड़े GO 97 को लेकर हुए विवाद का भी उल्लेख किया. मुख्यमंत्री ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के शिक्षा और सिंचाई क्षेत्रों को मजबूत करने के प्रयासों को भी याद किया. उन्होंने कहा कि देश के कई शैक्षणिक संस्थान नेहरू द्वारा रखी गई नींव पर विकसित हुए.
अब्दुल बशीर