चीन राष्ट्रपति और सबसे कद्दावर नेता शी जिनपिंग की कहानी सिर्फ सत्ता के गलियारों तक सीमित नहीं है. उनके जीवन में एक ऐसा दौर भी आया, जब एक वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता के बेटे को महज 15 साल की उम्र में बीजिंग छोड़कर सुदूर गांव में जाकर किसानों के साथ रहना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. अपनी जिंंदगी को हमेशा किंंग साइज में जीने वाले चीन के सबसे ताकतवर नेता ने किन विषयों में पढ़ाई की और उनका संघर्ष कैसा रहा, आइए जानते हैं...
शी जिनपिंग के जीवन का निर्णायक मोड़ वही माना जाता है जब बचपन के संघर्ष उनके सामने थे. इन सभी कठिन हालातों से पार पाकर उन्होंने चीन की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों में से एक छिंगहुआ विश्वविद्यालय में पढ़ाई की, नौकरी के साथ उच्च शिक्षा हासिल की और अंततः चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और देश के राष्ट्रपति बने.
बड़े नेता के बेटे थे शी जिनपिंग, लेकिन बचपन हमेशा आराम में नहीं बीता
शी जिनपिंग का जन्म जून 1953 में हुआ. उनके पिता शी झोंगशुन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे और बाद में चीन के उप-प्रधानमंत्री भी रहे. इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि की वजह से शी जिनपिंग को चीन के 'राजनीतिक वंशज' यानी वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेताओं के परिवार से आने वाले नेताओं में गिना जाता है.
बचपन में शी ने बीयी स्कूल में पढ़ाई की. लेकिन उनके परिवार की राजनीतिक स्थिति ज्यादा समय तक स्थिर नहीं रही. 1962 में उनके पिता राजनीतिक शुद्धिकरण का शिकार हुए. इसके बाद परिवार पर राजनीतिक दबाव बढ़ता गया और सांस्कृतिक क्रांति के दौरान शी परिवार को गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
यानी जिस बच्चे का शुरुआती जीवन चीन के राजनीतिक अभिजात वर्ग के बीच बीता था, उसके सामने कुछ ही वर्षों बाद बिल्कुल अलग जिंदगी आने वाली थी.
15 साल की उम्र में बीजिंग से गांव भेजे गए
1969 में, करीब 15 साल की उम्र में, शी जिनपिंग को चीन के शान्शी प्रांत के लियांगजियाहे गांव भेज दिया गया. यह सांस्कृतिक क्रांति के दौरान युवाओं को शहरों से ग्रामीण इलाकों में भेजने के बड़े अभियान का हिस्सा था.
आधिकारिक जीवनी के मुताबिक 1969 से 1975 तक शी लियांगजियाहे में 'शिक्षित युवा' के तौर पर रहे और वहां पार्टी शाखा के सचिव की जिम्मेदारी भी संभाली. यह उनके जीवन का करीब सात साल लंबा ऐसा दौर था, जिसने आगे चलकर उनकी राजनीतिक छवि और सोच पर गहरा प्रभाव डाला.
गुफानुमा घर में रहते थे, किसानों के साथ करते थे काम
लियांगजियाहे में शी जिनपिंग ने किसी आलीशान सरकारी आवास में नहीं, बल्कि स्थानीय पारंपरिक याओदोंग यानी गुफानुमा घर में जीवन बिताया. उन्होंने किसानों के साथ रहकर खेती और दूसरे ग्रामीण काम किए.
यही वजह है कि शी जिनपिंग बाद के वर्षों में अपने लियांगजियाहे के अनुभवों का जिक्र करते रहे हैं. उनके जीवन की यह कहानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ साल पहले तक एक वरिष्ठ नेता के बेटे के रूप में उनका जीवन बीजिंग के राजनीतिक माहौल में बीत रहा था और अब वे ग्रामीण चीन में आम लोगों के बीच रह रहे थे.
गांव में ही कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ने की राह बनी
शी जिनपिंग ने जनवरी 1974 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता हासिल की. उसी दौर में उन्होंने लियांगजियाहे की पार्टी शाखा में सचिव के रूप में भी काम किया. चीन की आधिकारिक जीवनी में उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत को इसी ग्रामीण दौर से जोड़ा गया है.
यानी गांव का यह दौर सिर्फ उनके निजी संघर्ष का हिस्सा नहीं था, बल्कि यहीं से उनके राजनीतिक करियर की औपचारिक शुरुआत भी हुई.
फिर पहुंचे चीन की प्रतिष्ठित छिंगहुआ विश्वविद्यालय
1975 में शी जिनपिंग की जिंदगी ने एक और बड़ा मोड़ लिया. वे छिंगहुआ विश्वविद्यालय पहुंचे और वहां रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग में मूल कार्बनिक संश्लेषण की पढ़ाई की.
उन्होंने 1975 से 1979 तक छिंगहुआ में अध्ययन किया. खुद छिंगहुआ विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट भी पुष्टि करती है कि शी ने इसी अवधि में रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग में पढ़ाई की थी. सोर्सेज से मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने छिंगहुआ विश्वविद्यालय के रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग में मूल कार्बनिक संश्लेषण की पढ़ाई की.
छिंगहुआ के बाद शुरू हुआ प्रशासनिक करियर
1979 में छिंगहुआ की पढ़ाई पूरी करने के बाद शी जिनपिंग ने केंद्र सरकार और सेना से जुड़े प्रशासनिक ढांचे में काम शुरू किया. आधिकारिक जीवनी के मुताबिक उन्होंने राज्य परिषद और केंद्रीय सैन्य आयोग के सामान्य कार्यालयों में काम किया.
इसके बाद उनका करियर लगातार अलग-अलग प्रांतों में आगे बढ़ता गया. उन्होंने हेबेई, फुजियान, झेजियांग और शंघाई में पार्टी और प्रशासन की जिम्मेदारियां संभालीं. धीरे-धीरे वे चीन की पार्टी व्यवस्था की ऊपरी सीढ़ियों तक पहुंचते गए.
नौकरी करते हुए फिर से पढ़ाई की
शी जिनपिंग की शिक्षा की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. करीब दो दशक बाद उन्होंने फिर से छिंगहुआ विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा हासिल की.
1998 से 2002 के बीच उन्होंने छिंगहुआ विश्वविद्यालय के मानविकी और सामाजिक विज्ञान विद्यालय में मार्क्सवादी सिद्धांत और वैचारिक एवं राजनीतिक शिक्षा का एक सेवारत स्नातकोत्तर कार्यक्रम किया.
छिंगहुआ से ही हासिल की कानून में डॉक्टरेट की डिग्री
इसी अवधि के दौरान शी जिनपिंग ने कानून में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की. आधिकारिक चीनी जीवनी में उनकी योग्यता के तौर पर कानून में डॉक्टरेट दर्ज है. उनकी शोध का विषय चीन के ग्रामीण इलाकों में बाजार व्यवस्था के विकास से जुड़ा था. उनकी शोध-प्रबंध का शीर्षक “चीन के ग्रामीण बाजार के विकास पर एक प्रारंभिक अध्ययन” बताया जाता है. इसका व्यापक मतलब चीन में ग्रामीण बाजार व्यवस्था के विकास और बाजारोन्मुखीकरण का अध्ययन है.
यानी आज चीन की अर्थव्यवस्था और विकास मॉडल पर फैसले लेने वाले नेता की शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा था.
गांव के पार्टी सचिव से चीन के शीर्ष नेता तक
शी जिनपिंग का राजनीतिक सफर किसी एक छलांग का परिणाम नहीं था. लियांगजियाहे के गांव से शुरू हुई उनकी यात्रा कई प्रांतीय और केंद्रीय जिम्मेदारियों से गुजरती हुई आगे बढ़ी.
वे पहले हेबेई, फिर फुजियान और झेजियांग में महत्वपूर्ण पार्टी पदों पर रहे. 2007 में उन्हें शंघाई का पार्टी सचिव बनाया गया. उसी साल वे कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो स्थायी समिति में पहुंचे. यह चीन की सत्ता संरचना में उनके तेजी से ऊपर उठने का निर्णायक चरण था.
2012 में बने कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव
नवंबर 2012 में शी जिनपिंग को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति का महासचिव चुना गया. साथ ही वे केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष भी बने.
इसके अगले साल, मार्च 2013 में वे चीन के राष्ट्रपति बने.
इसके बाद से वे चीन की राजनीति के सबसे शक्तिशाली चेहरों में शामिल हैं.
शी जिनपिंग की पढ़ाई कितनी है?
1975-1979:
छिंगहुआ विश्वविद्यालय, रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग- मूल कार्बनिक संश्लेषण
1998-2002:
छिंगहुआ विश्वविद्यालय, मानविकी और सामाजिक विज्ञान विद्यालय- मार्क्सवादी सिद्धांत और वैचारिक एवं राजनीतिक शिक्षा का सेवारत स्नातकोत्तर कार्यक्रम
1998-2002:
कानून में डॉक्टरेट की डिग्री
शी जिनपिंग की कहानी को सिर्फ 'एक नेता की शिक्षा' के तौर पर देखना अधूरा होगा. यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने बचपन में राजनीतिक विशेषाधिकार देखे, फिर परिवार के राजनीतिक पतन का दौर देखा, सांस्कृतिक क्रांति की उथल-पुथल में 15 साल की उम्र में गांव भेजे गए, करीब सात साल ग्रामीण जीवन बिताया, फिर छिंगहुआ विश्वविद्यालय में रासायनिक अभियांत्रिकी पढ़ी और नौकरी के साथ कानून में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की.
इसके बाद उनका राजनीतिक सफर चीन के अलग-अलग प्रांतों से होता हुआ कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष तक पहुंचा. आज जब वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंच रहे हैं, तो उनके जीवन की यह यात्रा यह समझने का एक अहम जरिया भी है कि चीन के मौजूदा सर्वोच्च नेता का राजनीतिक व्यक्तित्व किन अलग-अलग अनुभवों से होकर बना.
(नोट: यहां दी गई जानकारी विभिन्न आधिकारिक सोर्स प्रदान करने वाली वेबसाइट से ली गई हैं.)
आजतक एजुकेशन डेस्क