अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ बहाली और चुनाव की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन 13वें दिन भी जारी रहा. आंदोलन के बीच उस समय स्थिति और ज्यादा गरमाते हुए नजर आई जब एमएम हॉल में पुलिस के साथ पहुंची प्रॉक्टोरियल टीम चार युवकों को प्रॉक्टर ऑफिस लेकर गई. चल रहे आंदोलन के बीच शनिवार को देर रात छात्रों ने गेटों को बंद कर दिया . जिसे प्रॉक्टोरियल टीम ने ताले तोड़कर खुलवा दिया. छात्रों की ओर से लगाए गए तालों को तोड़कर अपने ताले लगाए गए.
इतना ही नहीं जिन चार युवाओं को गिरफ्तार किया गया था, जांच के दौरान तीन युवकों के एएमयू के बोनाफाइड छात्र होने की पुष्टि की गई, जबकि चौथे युवक आरिज का नाम पुलिस रिकॉर्ड में दो मुकदमे सामने आए. इसके बाद आरिज को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. इसके बाद से आरिज को छोड़े जाने की मांग को लेकर छात्र प्रॉक्टर कार्यालय पहुंच गए और वहां पर भी जमकर हंगामा किया.
खोला गया ताला
हालांकि, विरोध के दौरान बंद किए गए ताले को प्रॉक्टोरियल टीम ने ताले तोड़कर खुलवा दिया. रात करीब ढाई बजे टीम ने छात्रों की ओर से लगाए गए तालों को तोड़कर गेट खोल दिए और बाद में अपने ताले लगा दिए. हालांकि सेंटेनरी गेट पर छात्रों की ओर से लगाया गया ताला नहीं खुल सका. रविवार सुबह तक प्राक्टोरियल टीम इसे खोलने में जुटी हुई थी.
हॉस्टल से चार युवकों को लेकर जाने के बाद बढ़ा विवाद
मामला उस समय गरमा गया जब पुलिस प्रॉक्टोरियल टीम के साथ एमएम हॉल के अमीन हॉस्टल पहुंची और चार युवकों को पूछताछ के लिए प्रॉक्टर कार्यालय लाई. इसके बाद छात्रों का विरोध और तेज हो गया और कैंपस के चार प्रमुख गेट बंद कर दिए. विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान ने कहा कि कार्रवाई छात्रसंघ चुनाव को लेकर चल रहे धरने को देखते हुए नहीं की गई. उनके मुताबिक पुलिस को हॉस्टल में कुछ ऐसे लोगों के होने की सूचना मिली थी, जिनका पहले के मामलों से संबंध हो सकता है.
प्रॉक्टर के अनुसार, चार युवकों में से तीन छात्र थे और जांच के बाद उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि चौथे युवक से पूछताछ की जा रही थी. पुलिस ने भी बताया कि हॉस्टल में पहले हुई मारपीट के मामलों से जुड़े लोगों की मौजूदगी की सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई थी.
आखिर किस बात को लेकर हो रहा है विवाद?
13 दिन के इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह एएमयू छात्रसंघ चुनाव की मांग है. यूनिवर्सिटी में आखिरी छात्रसंघ चुनाव 2018-19 सत्र में हुआ था. एएमयू की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उस चुनाव से जुड़ा रिकॉर्ड भी मौजूद है. इसके बाद यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव नहीं हो सके. छात्रों का कहना है कि उन्हें अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिलना चाहिए और यूनिवर्सिटी को चुनाव की तारीख घोषित करनी चाहिए. साल 2019 में भी छात्रों ने चुनाव कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था. उस समय यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा था कि दाखिला प्रक्रिया चल रही है और पीएचडी प्रवेश परीक्षा के कारण तत्काल चुनाव की तारीख घोषित नहीं की जा सकती.
मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है
ये मामला यहीं पर नहीं रुका. छात्रसंघ चुनाव में देरी का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है. 2024 में दाखिल एक जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि 2019 से चुनाव नहीं होने के कारण छात्रों को प्रतिनिधित्व से वंचित होना पड़ रहा है. याचिका में एएमयू को छात्रसंघ चुनाव कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी. हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी से इस मामले में जवाब भी मांगा था. 2025 में भी चुनाव को लेकर मामला अदालत में पहुंचा. एक याचिका में दावा किया गया कि यूनिवर्सिटी ने दिसंबर 2025 में चुनाव कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन चुनाव नहीं हो सके.
यासिर फहद की भूख हड़ताल से भी बढ़ा मामला
छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर एमए उर्दू के छात्र यासिर फहद 21 सितंबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. छात्रों की मांग है कि छात्रसंघ को बहाल किया जाए और नए चुनाव कराए जाएं. इसी आंदोलन के दौरान कैंपस में प्रदर्शन और प्रशासन के साथ टकराव की घटनाएं सामने आई हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क