8 साल के बच्चे का कमाल! AI से बनाया ऐसा ऐप, जो जंगली जानवरों के हमले से करता है अलर्ट

कनाडा के आठ साल के वियोहन सयूरन ने AI तकनीक का उपयोग कर 'अर्बन वाइल्ड वॉच' नामक एक मुफ्त ऐप बनाया है, जो जंगली जानवरों की मौजूदगी की रिपोर्ट करता है और सुरक्षा उपाय बताता है. यह ऐप जानवरों की सटीक लोकेशन साझा नहीं करता ताकि जानवरों को नुकसान न पहुंचे.

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8 साल के वियोहन के दिमाग में आया आइडिया, और AI से बना दिया वाइल्डलाइफ सेफ्टी ऐप!. (YouTube/@Viyoohan S and Urban Wild Watch) 8 साल के वियोहन के दिमाग में आया आइडिया, और AI से बना दिया वाइल्डलाइफ सेफ्टी ऐप!. (YouTube/@Viyoohan S and Urban Wild Watch)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:20 PM IST

जब कनाडा के मरखम शहर में रहने वाले आठ साल के वियोहन सयूरन के पड़ोस में अचानक कोयोटी (जंगली कुत्ते) और भालू घूमने लगे, तो इस नन्हे बच्चे के जेहन में एक सीधा सा सवाल कौंधा कि क्या ऐसा कोई तरीका नहीं हो सकता कि लोग जानवरों को नुकसान पहुँचाए बिना एक-दूसरे को इस खतरे से आगाह कर सकें?

इसी मासूम सवाल का नतीजा है 'अर्बन वाइल्ड वॉच' एक बिल्कुल मुफ्त ऐप, जिसे वियोहन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया है.

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यह ऐप लोगों को इलाके में दिखने वाले कोयोटी, भालू, लोमड़ी, हिरण और अन्य जंगली जानवरों की मौजूदगी की रिपोर्ट करने की सुविधा देता है. इतना ही नहीं, अगर कोई जानवर घायल है या उसका बच्चा भटक गया है, तो उसकी सूचना देने के साथ-साथ यह ऐप सुरक्षित रहने के उपाय भी बताता है. 5 जून 2026 को लॉन्च हुए इस ऐप पर जुलाई तक कनाडा और अमेरिका से 150 से अधिक जानवरों के देखे जाने की एंट्री दर्ज की जा चुकी थीं.

कनाडा में इंसानों और जंगली जानवरों का आमना-सामना कोई नई बात नहीं है. अकेले टोरंटो शहर की बात करें तो वर्ष 2024 में कोयोटी दिखने की 2,584 रिपोर्ट दर्ज की गई थीं, जिनमें सुरक्षा से जुड़ी 303 घटनाएं और कुत्तों पर हमले के 91 मामले शामिल थे.

सख्त नियम: ऐप पर नहीं दिखेगी जानवर की सटीक लोकेशन

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'अर्बन वाइल्ड वॉच' की एक अनोखी खासियत इसे बाकी सभी ट्रैकिंग ऐप्स से अलग बनाती है. यह ऐप जानवर की सटीक लोकेशन कभी जाहिर नहीं करता, बल्कि सिर्फ उस पूरे इलाके का अनुमानित दायरा दिखाता है. इसके पीछे 8 साल के वियोहन की बड़ी ही परिपक्व सोच है. वह नहीं चाहता था कि लोग किसी जानवर को देखने या उसके साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए मौके पर भीड़ जुटा लें.

अपने यूट्यूब वीडियो में इस फीचर की वजह बताते हुए वियोहन कहते हैं कि मैंने इसे इस तरह इसीलिए डिजाइन किया ताकि लोग सोशल मीडिया पर फोटो डालने के चक्कर में वहां भागे-भागे न पहुंच जाएं. इससे जानवर डर सकता है और इंसान व जानवर दोनों की जान खतरे में पड़ सकती है.

AI से कोडिंग का झंझट खत्म

इस विचार को एक काम करते हुए वेब ऐप में बदलने के लिए वियोहन ने AI टूल्स का सहारा लिया. उसने अपने विचारों को व्यवस्थित करने के लिए क्लाउड का इस्तेमाल किया और आसान अंग्रेजी निर्देशों को काम करने वाले ऐप में ढालने के लिए लवेबल की मदद ली.

यह न सिर्फ वियोहन की समझदारी की कहानी है, बल्कि इस बात की मिसाल भी है कि कैसे AI तकनीक नई पीढ़ी के सीखने और काम करने के तरीके को बदल रही है. वियोहन को अपना आइडिया टेस्ट करने के लिए हफ्तों बैठकर कोडिंग की एक-एक लाइन लिखने की जरूरत नहीं पड़ी.

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और सबसे खूबसूरत बात? उसका मकसद कोई 'इम्प्रेसिव' गैजेट बनाना नहीं था, वह तो बस इतना चाहता था कि इंसान और बेजुबान जानवर एक ही इलाके में एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित रह सकें.

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