14 साल की उम्र में बना दी AI कंपनी, बुर्ज खलीफा में है ऑफिस, कौन हैं जैनम जैन? 

भारतीय मूल के जैनम जैन ने स्कूल जाने की उम्र में कुछ ऐसा कमाल कर दिखाया है जिसे देख हर कोई हैरान है. 14 साल की उम्र में उन्होंने AI स्टार्टअप की कंपनी खड़ी कर दी है. यहां तक तो ठीक था लेकिन उनका ऑफिस का पता बुर्ज खलीफा है, जो 141 मंजिल में मौजूद है.  लोग उनकी इस उपलब्धि को देखकर हैरान हैं. 

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कौन हैं जैनम जैन जिन्होंने 14 साल की उम्र में कर दिया कमाल. कौन हैं जैनम जैन जिन्होंने 14 साल की उम्र में कर दिया कमाल.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:59 AM IST

जहां 14 साल की उम्र में बच्चे स्कूल जाते हैं, दुबई में एक लड़का 141 मंजिल पर अपने ऑफिस में जाता है. इसे पढ़ने के बाद भले ही ये बात आपको अजीब लगे लेकिन यह सच है. 14 साल के जैनम जैन कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसमें सुनने के बाद हर कोई हैरान है. उन्होंने इतनी कम उम्र में दुनिया की सबसे ऊंची इमारत में अपना ऑफिस बना लिया है. जैनम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप खड़ा कर दिया है. ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, वह दुबई के सबसे युवा एआई संस्थापक है. 

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कौन हैं जैनम जैन?

जैनम जैन दुबई के सबसे कम उम्र के एआई फाउंडर हैं. वह भारतीय मूल के हैं. जैनम TEDx स्‍पीकर भी हैं. उनके नाम दो पेटेंट हैं. इसके साथ ही उन्होंने एक किताब भी लिखी है. साथ ही 1,45,000 से ज्यादा सब्सक्राइबर्स वाली यूट्यूब कम्युनिटी बनाई है. 

6 साल की उम्र में पहला सबक 

कर्ली टेल्स मिडिल ईस्ट से बात करते हुए जैनम ने कहा कि उद्यमिता का पहला सबक तब मिला जब वे सिर्फ 6 साल के थे. जैनम ने बताया कि जब वे सिर्फ 6 साल के थे, तब उनके पिता उन्हें पहली बिजनेस मीटिंग में ले गए थे. इस अनुभव ने उनमें बिजनेस को लेकर जिज्ञासा पैदा की जो समय के साथ और बढ़ती गई. उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल पढ़ाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि लोगों से मिलने, इवेंट्स में जाने और नए अनुभवों से सीखकर समझा कि बिजनेस कैसे काम करता है. 13 साल की उम्र में उन्होंने 105 दिनों के भीतर अपनी IGCSE कक्षा 10 की परीक्षाएं पूरी कीं और एक अलग रास्ता चुना, ताकि वे अपने उद्यमिता के लक्ष्यों पर ज्यादा ध्यान दे सकें. 

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केवल यहीं पर नहीं रुकना 

बात करते हुए उन्होंने बताया कि मंगो इंजन का लक्ष्य कंपनियों को मार्केटिंग और लीड मैनेजमेंट से लेकर न्यूजलेटर और ग्राहक संचार तक के कामों को आसान बनाने के लिए किया जाता है. यह इस समय बीटा (टेस्टिंग) चरण में है और कई कंपनियां इसमें रुचि दिखा रही हैं. 10 साल की उम्र से ही वे खुद को 50 दिनों की चुनौतियां देते रहे हैं, जैसे 50 किताबें पढ़ना, 50 नेटवर्किंग इवेंट्स में जाना और लगभग 6,000 किलोमीटर यात्रा करके उद्यमियों से मिलना और उनसे सीखना. 

सोच रखो बड़ी 

जैनम के बारे में केवल यही बात सबसे नहीं है कि उनका ऑफिस बुर्ज खलीफा में है,बल्कि उनके सीखने का तरीका भी बेहद अलग है. उनकी कहानी बताती है कि शिक्षा सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं होती. जिज्ञासा, लोगों से बातचीत और वास्तविक अनुभवों ने उनकी सफलता में बड़ी भूमिका निभाई है.

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