नौकरी करना आसान नहीं होता है. पहले आपको इंटर्न के तौर पर शुरू करना होता है फिर अपनी जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और फिर कहीं जाकर आपको आपके मन लायक काम करने का मौका मिलता है. लेकिन इस जर्नी में कई बार आपको फ्री में भी काम करना पड़ता है. ऐसी ही स्टोरी 35 साल के एक टेक्नीशियन ने शेयर की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपनी प्रेरणादायक स्टोरी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर शेयर की है.
उन्होंने बताया कि दिल्ली में एक बिना सैलरी वाली नौकरी से करियर शुरू करने के बाद उन्होंने एक इंटरनेशनल क्लाइंट के साथ काम करके करीब 1.15 करोड़ रुपये कमाए. उन्होंने ये भी बताया कि कम चर्चित इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक करने वाले इस क्लाउड एक्सपर्ट के मुताबिक, उन्होंने अपना करियर अपनी डिग्री, तकनीकी स्किल और काम के अनुभव के दम पर बनाया.
बिना सैलरी के किया काम
उनकी पोस्ट के मुताबिक, उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दिल्ली की एक संस्था में की जहां उन्होंने एक साल से भी कम समय तक बिना सैलरी के काम किया. इसके बाद वह 6 लाख रुपये सालाना पैकेज पर बेंगलुरु चले गए और करीब दो साल तक वहां काम किया. इसके बाद उन्हें दूसरी नौकरी में शुरुआत में 7 लाख रुपये सालाना मिले. करीब 4.7 साल में उनकी सैलरी बढ़कर 9 लाख रुपये सालाना हो गई.
फिर उन्होंने एक और कंपनी जॉइन की, जहां उनकी सैलरी पांच साल में 17 लाख रुपये से बढ़कर 35 लाख रुपये सालाना हो गई. बाद में उन्हें बेंगलुरु की एक कंपनी से 70 लाख रुपये सालाना का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने उस कंपनी में जॉइन नहीं किया. हालांकि, इस ऑफर से उन्हें अपने असली मार्केट वैल्यू का अंदाजा हुआ. लेकिन उनके जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट तब आया जब उन्होंने एक इंटरनेशनल क्लाइंट के साथ काम करना शुरू किया. करीब दो साल में इस भूमिका से उनकी कमाई बढ़कर लगभग 1.15 करोड़ रुपये हो गई.
ऑनलाइन उपस्थिति से मिली मदद
पोस्ट में पेशेवर ने बताया कि अपने करियर के शुरुआती सालों में उन्होंने एक्सट्रा काम से करीब 20 हजार रुपये की कमाई की है. उनके मुताबिक, लिंक्डइन पर उनकी मजबूत ऑनलाइन मौजूदगी ने उन्हें अतिरिक्त प्रोजेक्ट और कमाई के मौके दिलाने में मदद की. नौकरी बदलने और नए मौके पाने की तरीके पर उन्होंने कहा कि प्रोफेशनल्स को अपनी ऑनलाइन मौजूदगी मजबूत करनी चाहिए और खुद को ज्यादा से ज्यादा लोगों के सामने दिखाना चाहिए. पोस्ट में आगे बताया गया है कि उनके करियर में बीटेक डिग्री सबसे अहम रही. इसके आधार पर ही उन्हें ज्यादातर अवसर मिले. बाद में उन्होंने पोस्टग्रेजुएट डिग्री भी हासिल की, लेकिन उनका कहना है कि जिस नौकरी में उन्हें आखिरकार सफलता मिली, उसका उनकी पोस्टग्रेजुएट डिग्री से सीधा संबंध नहीं था.
16 घंटे काम करने के बाद बैलेंस
इस तकनीकी विशेषज्ञ ने बताया कि फिलहाल उनका वर्क-लाइफ बैलेंस अच्छा है. किसी जरूरी प्रोडक्शन समस्या को छोड़कर वह आमतौर पर शाम 5 बजे के बाद अपना लैपटॉप नहीं खोलते. हालांकि, करियर के शुरुआती दौर में ऐसा नहीं था और वह रोजाना करीब 16 घंटे तक काम करते थे. काम के अलावा वह स्थानीय क्लब स्तर पर क्रिकेट भी खेलते हैं. उनका कहना है कि व्यस्त करियर के साथ अपने शौक और निजी जिंदगी के लिए भी समय निकालना जरूरी है.
आजतक एजुकेशन डेस्क