हममें से ज्यादातर लोग सफाई को एक काम या जिम्मेदारी की तरह देखते हैं, जिसे अक्सर मजबूरी में करना पड़ता है. लेकिन जापान में सफाई को बच्चों की शिक्षा का एक अहम हिस्सा माना जाता है. वहां, छोटी कक्षा के बच्चे भी अपनी क्लास की सफाई और देखभाल करते हैं. इतना ही नहीं वे अपने साथियों को खाना परोसने और स्कूल के कुछ हिस्सों की सफाई में भी मदद करते हैं. इस तरह बच्चों में छोटी उम्र से ही जिम्मेदारी, अनुशासन और मिलकर काम करने की आदत विकसित की जाती है.
सुनने में ऐसा लगता है कि यह जापान सरकार का कोई नियम होगा, लेकिन ऐसा नहीं है. यह एक परंपरा है जिसे देश के ज्यादातर स्कूल अपनी सुविधा के हिसाब से अपनाते हैं. जापानी स्कूलों में बच्चों द्वारा सफाई करने की यह आदत इतनी आम है कि इसे कई एनीमे सीरीज में भी दिखाया गया है.
क्या है जापान की ओसोजी परंपरा?
जापान में ओसजी का मतलब होता है सफाई. वह भी छोटी-मोटी सफाई नहीं बल्कि गहराई से की गई सफाई. यहां पर साल के अंत में घरों की सफाई की जाती है जिसे लोग नए साल का स्वागत साफ-सफाई के साथ करते हैं.
स्कूलों में सफाई
जापानी छात्र अपने स्कूल को साफ रखना अपने जीवन और संस्कृति का हिस्सा मानते हैं और इस काम से उन्हें कोई घृणा नहीं होती. यह अधिकांश भारतीय स्कूलों की छात्र संस्कृति से बिलकुल अलग है, जहां छात्र स्कूल की संपत्ति को नष्ट करने को एक विकृत उपलब्धि के रूप में मनाते हैं. जापान के स्कूलों में बच्चों को सिखाया जाता है कि जिस जगह का इस्तेमाल करो, उसे साफ छोड़ना भी आपकी जिम्मेदारी है. इससे बचपन से ही उनमें सफाई, अनुशासन और जिम्मेदारी की आदत विकसित होती है.
जब बच्चों को पता होता है कि बाद में उन्हें खुद ही अपनी क्लास साफ करनी है, तो वे कूड़ा फैलाने से भी बचते हैं. यही वजह है कि जापानी स्कूलों में साफ-सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है. जापान में स्कूलों की सफाई की इस परंपरा को गक्को सोजी कहा जाता है. माना जाता है कि इसकी शुरुआत बौद्ध शिक्षाओं से हुई, जो सिखाती हैं कि अपने शरीर और आसपास की जगह को साफ रखना बहुत जरूरी है.
विशेषज्ञों का भी मानना है कि साफ और व्यवस्थित माहौल से मन शांत रहता है और ध्यान लगाने में आसानी होती है. इसलिए जापान में बच्चों को छोटी उम्र से ही सफाई की आदत सिखाई जाती है. हालांकि, कई दूसरे देशों में घरेलू और सफाई के काम को अभी भी कम महत्व दिया जाता है. यही वजह है कि वहां स्कूलों की पढ़ाई में ऐसी व्यवस्था को शामिल करना आसान नहीं है, हालांकि कुछ स्कूलों ने इसकी शुरुआत कर दी है.
जापानी स्कूलों में सफाई के काम में क्या-क्या शामिल होता है?
जापान में स्कूली बच्चे अपनी कक्षाओं में झाड़ू-पोछा लगाते हैं, धूल झाड़ते हैं, गलियारों, सीढ़ियों, दरवाजों और खिड़कियों की सफाई करते हैं और कई स्कूलों में तो बाथरूम भी साफ करते हैं. हालांकि, प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को बाथरूम साफ करने का काम नहीं दिया जाता है और ये काम उन्हें बड़े होने पर सौंपा जाता है.
परोसते हैं खाना
जापान के स्कूलों में बच्चे एक-दूसरे को दोपहर का खाना भी परोसते हैं और खाना खाने के बाद मिलकर सफाई करते हैं. कई स्कूलों में अलग से सफाई कर्मचारी नहीं होते. अगर होते भी हैं, तो वे सिर्फ मरम्मत या ऐसी जगहों की गहरी सफाई करते हैं, जहां बच्चे नहीं पहुंच सकते. रोजमर्रा की सफाई की जिम्मेदारी छात्रों की होती है.
स्कूल को साफ रखने के लिए जापान में बच्चे बाहर के जूते उतारकर स्कूल के अंदर अलग जूते पहनते हैं, ताकि धूल-मिट्टी अंदर न आए. वहीं, सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाला कपड़ा भी छात्र अपने घर से लेकर आते हैं. शिक्षक छात्रों को उचित समय सारणी बनाकर उनकी सहायता करते हैं, जिसमें प्रत्येक छात्र को कुछ निश्चित कार्य सौंपे जाते हैं. इस तरह किसी भी छात्र को अनुचित रूप से बार-बार शौचालय साफ करने का काम नहीं करना पड़ता.
जापान के स्कूलों में बड़े छात्रों को अक्सर छोटी कक्षाओं के बच्चों के साथ रखा जाता है. इससे छोटे बच्चों को उनसे सीखने का मौका मिलता है, जबकि बड़े छात्रों में जिम्मेदारी और नेतृत्व की भावना विकसित होती है. साथ ही जिन बच्चों के घर में भाई-बहन नहीं होते, उन्हें भी स्कूल में परिवार जैसा माहौल महसूस होता है.
सफाई की आदत बच्चों को क्या सिखाती है?
जापान में माना जाता है कि अगर बच्चों को छोटी उम्र से अपने आसपास की जगह साफ रखने की आदत सिखाई जाए, तो वे बड़े होकर भी सार्वजनिक जगहों का सम्मान करते हैं और उन्हें गंदा नहीं करते हैं. इससे बच्चों को यह समझ आता है कि स्कूल या समाज को साफ रखना सिर्फ किसी कर्मचारी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है. इसी सोच को जापानी स्कूलों में गक्को सोजी के जरिए बढ़ावा दिया जाता है. इससे बच्चों के मन में यह भावना भी आती है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता.
सफाई के दौरान बच्चे मिलकर काम करते हैं, जिससे उनमें टीमवर्क, सहयोग और दूसरों की मदद करने की आदत विकसित होती है. यही वजह है कि वे आगे चलकर जिम्मेदार और अनुशासित नागरिक बनते हैं.
कई लोग मानते हैं कि बचपन से दी गई यही सीख जापान के लोगों के व्यवहार में भी दिखाई देती है. वहां सार्वजनिक जगहों पर लोग नियमों का पालन करते हैं, साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं और दूसरों की सुविधा का सम्मान करते हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क