कौन है स्नेहा राजगुरु जिन्होंने 29 साल में ले ली रिटायरमेंट? नौकरी छोड़ शुरू किया ये काम  

29 साल की उम्र में जहां लड़कियां अपने करियर में आ बढ़ने के लिए मेहनत करती है लेकिन पुणे की एक कंपनी में काम करने वाली ये महिला ने इस उम्र में रिटायरमेंट लेने का फैसला किया. उनकी कहानी सोशल मीडिया पर उनकी कहानी तेजी से वायरल हो रही है. इसके बाद उन्होंने शहर की भागदौड़ से दूर एक धीमी और खेती पर आधारित जिंदगी अपनाई. 

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नौकरी छोड़कर कर शुरू किया ये काम. नौकरी छोड़कर कर शुरू किया ये काम.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:23 PM IST

एक महिला ने दावा किया है कि उसने 29 साल की उम्र में रिटायरमेंट ले लिया. इसके बाद उसने पारंपरिक नौकरी और कामकाजी जिंदगी से अलग खेती-किसानी पर आधारित धीमी और शांत लाइफस्टाइल अपना ली. इंस्टाग्राम रील में स्नेहा राजगुरु ने बताया कि उनकी रिटायरमेंट की सोच चार चीजों पर आधारित है— जमीन,  खाना, प्रकृति और आत्मनिर्भर जीवन.

इतनी कम उम्र में रिटायरमेंट को लेकर उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और कम उम्र में रिटायरमेंट लेने का उनका यह अनोखा तरीका लोगों का ध्यान खींच रहा है. 

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क्या है उनकी चार लेवल प्लानिंग? 

उन्होंने वीडियो में आगे बताया कि उनका पहला कदम एक छोटा सा जमीन खरीदना है और उसे अपनी पहचान देना है.  इसके बाद उनका दूसरा काम फलदार पेड़ लाना है. उनका कहना है कि पेड़ धीरे-धीरे आपके साथ बढ़ते हैं, उन्हें ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती और वे लंबे समय तक फल देते हैं. 

इसके बाद उन्होंने बताया कि उनका तीसरा काम अपना खुद का खाना उगाना है.  स्नेहा राजगुरु ने इसे लेकर कहा है कि इससे खाद्य सुरक्षा बढ़ती है और लॉकडाउन या युद्ध जैसी स्थिति में बाहरी व्यवस्थाओं पर निर्भरता कम हो सकती है. चौथा कदम है जमीन को फूलों और हरियाली से भरना. उनका मानना है कि रोजाना प्रकृति और खूबसूरती के बीच रहने से मन को सुकून मिलता है. वह लोगों को ऐसी जगह बनाने की सलाह देती हैं, जो सिर्फ उनकी जरूरतें पूरी न करे बल्कि मन और आत्मा को भी खुशी दे. 

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क्या है रिटायरमेंट का मतलब? 

राजगुरु बताती हैं कि रिटायरमेंट का मतलब किसी तय उम्र में नौकरी छोड़ना नहीं है. उनके मुताबिक, यह अपनी जिंदगी जीने का तरीका बदलने और लगातार दबाव की जगह सुकून को चुनने के बारे में है. उनका मानना है कि रिटायरमेंट उम्र पर नहीं बल्कि शांति और संतुष्टि से जुड़ी है. उनका यह विचार उन लोगों को पसंद आ रहा है, जो खेती, खुद का खाना उगाने और प्रकृति के करीब रहकर जिंदगी जीना चाहते हैं. 

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