कौन हैं वृंदावन के ये ‘जेन जी बाबा’? 19 साल की उम्र में बने भागवत कथावाचक, लुक ने सोशल मीडिया पर मचाया तहलका

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक युवा संत का चेहरा खूब तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने आपने जरूर देखा होगा. सफेद कुर्ता, कंधे तक घुंघराले बाल, माथे पर चमकता वैष्णव तिलक और चेहरे पर तेज. ये और कोई नहीं बल्कि वृंदावन के श्री धाम गोदा विहार मंदिर के पीठाधीश्वर श्री स्वामी शाश्वत आचार्य जी महाराज, जिन्हें आज की युवा पीढ़ी 'Gen Z Baba' और 'Facecardaeshwar Guruji' कह रही है.

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कौन हैं Gen Z बाबा? (Photo: insta/@shri_shashwatacharya) कौन हैं Gen Z बाबा? (Photo: insta/@shri_shashwatacharya)

मदन गोपाल शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 01 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:55 AM IST

इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहे 19 साल के शाश्वत आचार्य जी महाराज के बारे में लोग जानने के लिए बहुत उत्सुक हैं. लोग जानना चाहते हैं कि वह क्या करते हैं, कहां रहते हैं और इतनी कम उम्र में उन्होंने कैसे यह सफलता हासिल की है. तो बता दें कि शाश्वत आचार्य जी महाराज का जन्म एक संत परिवार में हुआ. पिता स्वामी वृंदावन आचार्य जी महाराज खुद एक सिद्ध संत हैं, तो बचपन से ही घर में भजन-कीर्तन और शास्त्रों का माहौल था.

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परिवार के मुताबिक, जब अन्य बच्चे खिलौनों से खेलते थे, तब 4 साल के शाश्वत जी भागवत गीता के श्लोकों का उच्चारण करते थे. बताया जाता है कि उन्होंने मात्र 4 साल की उम्र में ही मंच पर बैठकर छोटी-छोटी कथाएं और प्रवचन देने शुरू कर दिया था. धीरे-धीरे उनकी वाणी में इतनी मधुरता और ज्ञान में इतनी गहराई बढ़ी, जिससे कथा सुनने वालों की संख्या लगातार बढ़ती गई. आज 19 साल की उम्र में वे वृंदावन के एक प्रतिष्ठित मंदिर के पीठाधीश्वर हैं, जो अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है. 

कौन हैं शाश्वत आचार्य जी महाराज?

श्री स्वामी शाश्वत आचार्य जी महाराज का जन्म 5 अगस्त 2007 को वृंदावन में हुआ था. उनके पिता स्वामी वृंदावन आचार्य जी महाराज भी संत हैं. शाश्वत आचार्य जी को वृंदावन स्थित श्री धाम गोदा विहार मंदिर का पीठाधीश्वर बताया जाता है. उनके मामा आशुतोष शुक्ला के मुताबिक, शाश्वत महाराज फिलहाल अपनी पढ़ाई और दीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया में हैं और परिवार के साथ वृंदावन में रहते हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी पढ़ाई गिरिराज महाराज लॉ कॉलेज, मथुरा से बीए-एलएलबी में बताई गई है. हालांकि, उनकी पढ़ाई की मौजूदा स्थिति और डिग्री पूरी होने की पुष्टि अलग से उपलब्ध नहीं है.

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चार साल की उम्र से भागवत कथा से जुड़ाव

शाश्वत आचार्य जी का पालन-पोषण ऐसे परिवार में हुआ, जहां धार्मिक गतिविधियां और आध्यात्मिक चर्चाएं रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थीं. परिवार की ओर से बताया जाता है कि बचपन से ही उनका झुकाव धार्मिक ग्रंथों और भजन-कीर्तन में रहा है. उन्होंने महज चार साल की उम्र से श्रीमद्भागवत कथा सुनाना शुरू कर दिया था. छोटी उम्र में ही वे मंच पर बैठकर कथा और प्रवचन करने लगे थे. समय के साथ उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई. 

सोशल मीडिया पर इन नामों से हो रहे वायरल 

वह अपने शांत स्वभाव, कंधे तक घुंघराले बाल, माथे पर चमकता वैष्णव तिलक और चेहरे पर अद्भुत तेज की वजह से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. सोशल मीडिया पर लोग उन्हें ‘जेन जी बाबा’ कहकर बुला रहे हैं. महज 19 साल की उम्र में भागवत कथा सुनाने वाले शाश्वत आचार्य जी महाराज अपनी कम उम्र और आध्यात्मिक जीवन को लेकर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. कुछ लोग उनके व्यक्तित्व की चर्चा कर रहे हैं, तो कई उनकी कथा और आध्यात्मिक गतिविधियों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
 

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