18 साल की उम्र में बना सबसे युवा प्रोफेसर, तोड़ा 306 साल पुराना रिकॉर्ड  

18 साल की उम्र में जहां युवा आगे की पढ़ाई का सपना देखते हैं, वहां नाथन थॉमस ने कुछ ऐसा कर दिया है जो हर किसी को हैरान कर रहा है. उन्होंने केवल 18 साल 346 दिन की उम्र में दुनिया के सबसे कम उम्र के प्रोफेसर बन गए हैं. उनकी इस उपलब्धि से 306 साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया है. केवल 10 साल की उम्र में उन्होंने कॉलेज में एडमिशन लिया और अब वह अपने ही उम्र के छात्रों को पढ़ा रहे . 

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18 साल की उम्र में बन गया प्रोफेसर. (Photo: Guinness world records) 18 साल की उम्र में बन गया प्रोफेसर. (Photo: Guinness world records)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:28 AM IST

नाथन थॉमस की कहानी उन युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं, जो अपने करियर में आगे बढ़ना चाहते हैं. जिस उम्र में युवा आगे की पढ़ाई करने के लिए कॉलेज में एडमिशन लेते हैं. वहीं, नाथन अपने ही उम्र के बच्चों को पढ़ा रहे हैं. इस उपलब्धि के साथ ही उन्होंने 306 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया. अमेरिका के फ्लोरिडा निवासी नाथन ने 18 साल 346 दिन की उम्र में कॉलेज प्रोफेसर बनकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है. 

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सबसे कम उम्र के बनें प्रोफेसर 

नाथन को मियामी डेड कॉलेज में इंजीनियरिंग इंस्ट्रक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया है. यहां वे इंजीनियरिंग के छात्रों को प्रोग्रामिंग और टेक्निकल विषय पढ़ाते हैं. लेकिन इस दौरान जो बात सबसे ज्यादा अलग है, वह ये है कि उनके क्लास में कई छात्र ऐसे हैं, जो खुद उनके उम्र के हैं. 

10 साल की उम्र में गए कॉलेज 

नाथन ने बेहद ही छोटी उम्र में कॉलेज जाना शुरू कर दिया था. इसके बाद वह फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी पहुंचे जहां पर उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की.

जब उम्र केवल एक नंबर बनकर रह जाए 

अपनी ही उम्र के करीब के छात्रों को पढ़ाना नाथन को कभी भी परेशान नहीं करता. उनका मानना ​​है कि सीखना उम्र से नहीं बल्कि जिज्ञासा और प्रतिबद्धता से निर्धारित होता है. उनके अनुसार, हर कोई एक ही कारण से क्लास में आता है और वह है सीखना, सुधार करना और आगे बढ़ना. नाथन के लिए सबसे बड़ी खुशी तब होती है, जब छात्र किसी मुश्किल विषय को आखिरकार आसानी से समझ जाते हैं. इंजीनियरों के परिवार में पले-बढ़े होने का भी उनकी रुचियों को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान रहा. उन्होंने अक्सर अपनी मां को गणित को रुचिकर बनाने और कम उम्र से ही साइंस में एक मजबूत आधार विकसित करने में मदद करने का श्रेय दिया है. 

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इंजीनियरिंग से जुड़ा है परिवार 

बता दें कि नाथन ऐसे परिवार से आते हैं, जहां इंजीनियरिंग का माहौल रहा है. बचपन से ही उन्हें मैथ और साइंस में रुचि रही है. वह बताते हैं कि उनकी मां ने मैथ के मुश्किल सवालों को आसानी से समझाने में उनकी मदद की .  

टीचिंग के साथ कर रहे लॉ की पढ़ाई 

इंजीनियरिंग पढ़ाने के साथ-साथ नाथन यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी स्कूल ऑफ लॉ में कानून की पढ़ाई भी कर रहे हैं. इतना ही नहीं वह आगे चलकर  बौद्धिक संपदा कानून यानी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ की फील्ड में काम करना चाहते हैं. उनका लक्ष्य साइंस एंड टेक्नोलॉजी से जुड़े नए आविष्कारों की कानूनी सुरक्षा में योगदान देना है.   

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