कहते हैं ना कि कभी-कभी अपनों की कड़वी बात ही ज़िंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन जाती है. अगर किसी से कहा जाए कि जो लड़का 10वीं और 12वीं के प्री-बोर्ड में फेल हो गया हो, वह आगे चलकर IIT से इंजीनियरिंग करेगा, IPS अफ़सर बनेगा और फिर अमेरिका में जाकर देश का नाम रोशन करेगा तो शायद कोई यकीन न करे.
लेकिन बिहार के सिवान के रहने वाले और वर्तमान में मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी की कहानी कुछ ऐसी ही है. जिस अफसर को कभी पढ़ाई में कमजोर मान लिया गया था, उन्हें अब अमेरिका में ‘द एशियन हीरो अवार्ड 2026’ से नवाजा जाएगा.
क्यों मिल रहा है यह बड़ा सम्मान?
13 दिसंबर 2026 को अमेरिका के फ्लोरिडा (टाम्पा) में 7वां 'वर्ल्ड फेयर एंड फेस्टिवल' आयोजित होने जा रहा है. इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर आईपीएस मोहिबुल्लाह अंसारी को 'एसोसिएशन ऑफ वर्ल्ड फेयर एंड फेस्ट यूएसए' की तरफ से सम्मानित किया जाएगा.
उन्हें यह अवार्ड पुलिस सेवा में उनके शानदार नेतृत्व, बेदाग ईमानदारी, बेहतरीन पब्लिक सर्विस और समाज कल्याण में दिए गए अनोखे योगदान के लिए दिया जा रहा है. दुनियाभर से जुटने वाली हस्तियों के बीच बिहार के इस आईपीएस अफ़सर का सम्मानित होना पूरे देश के लिए गर्व की बात है.
जब पिता के कड़वे ताने ने जगाया सोया हुआ हौसला
मीडिया को दिए इंटरव्यू में मोहिबुल्लाह अंसारी ने अपना सफर बताया है. उन्होंने बताया कि कैसे उनका शुरुआती दौर संघर्षों से भरा था. स्कूली दिनों में वे पढ़ाई में काफी पिछड़े हुए थे. 10वीं और 12वीं के प्री-बोर्ड में जब उनका रिजल्ट खराब आया, तो घर में सन्नाटा पसर गया. उनके पिता ने गुस्सा होकर एक तीखा ताना मारा, 'सपना तो IIT जाने का देखते हो, लेकिन पहले पास होने लायक नंबर तो ले आओ!'
पिता की यह बात मोहिबुल्लाह के दिल में तीर की तरह चुभ गई. उन्होंने इसे अपनी इंसल्ट मानने के बजाय एक चुनौती की तरह लिया. उसी दिन से उन्होंने खुद को कमरों में बंद किया, दिन-रात एक कर दिए और अपनी पढ़ाई की दिशा ही बदल डाली.
IIT दिल्ली से कॉर्पोरेट नौकरी, फिर खाकी की तरफ कदम
पिता के ताने से जो पढ़ाई का जुनून शुरू हुआ, उसने कभी रुकने का नाम नहीं लिया. उन्होंने न सिर्फ JEE मेंस और एडवांस्ड क्लियर किया, बल्कि 2011 में देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली में केमिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया. बीटेक पूरा करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक एक बड़ी कंपनी में काम किया, लेकिन दिल में देश सेवा का जज़्बा था. साल 2015 में वे नौकरी छोड़कर दिल्ली आ गए और सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए. शुरुआती झटकों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी.
लगातार मेहनत के बाद अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया 381वीं रैंक हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुने गए. मुजफ्फरपुर में खाकी वर्दी पहनकर अपराधियों के छक्के छुड़ाने वाले मोहिबुल्लाह अंसारी की यह कहानी हर उस छात्र के लिए एक मिसाल है, जो एक-दो परीक्षाओं में कम नंबर आने या फेल होने पर हिम्मत हार जाता है.
आजतक एजुकेशन डेस्क