नौकरी में अनिश्चितता तब तक किसी कर्मचारी को महसूस नहीं होती है, जब तब कंपनी की ओर से कोई मैसेज या ईमेल न आ जाए. सुबह आंख खुलते ही छंटनी का मेल आ जाए, तो करियर को लेकर चिंता बढ़ जाती है. लेकिन कंपनी भी छंटनी के नए-नए तरीके अपनी रही है.
यह सुबह-सुबह आया हुआ टर्मिनेशन मेल हो सकता है, अप्रेजल मीटिंग में लिया गया फैसला या फिर HR की ओर से नौकरी छोड़ने के बदले आर्थिक पैकेज का ऑफर. कुछ मामलों में कर्मचारी के पास नौकरी छोड़ने का विकल्प होता है, जबकि कुछ में कंपनी खुद यह फैसला लेती है.
माइक्रोसॉफ्ट ने भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में शामिल कुछ टीमों के करीब 60,000 पात्र कर्मचारियों को वॉलंटरी बायआउट का ऑप्शन दिया है. इसके जरिए कर्मचारी आर्थिक पैकेज लेकर कंपनी छोड़ सकते हैं. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब माइक्रोसॉफ्ट AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश कर रहा है और अपने वर्कफोर्स को कारोबारी जरूरतों के हिसाब से बदल रहा है.
क्या सभी कर्मचारी को छोड़नी होगी नौकरी?
इस समय लोगों के बीच जो सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है कि वह ये है कि क्या सभी 60,000 कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया जाएगा? तो इसका जवाब है नहीं. अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ना, जरूरी छंटनी जैसा नहीं है. लेकिन यह ऑफर वर्कप्लेस की जानी-पहचानी चिंता को फिर से सामने लाता है. क्या होगा जब कोई कंपनी यह तय करती है कि उसे अलग वर्कफोर्स की जरूरत है?
बायआउट और सुबह-सुबह नौकरी से निकालने के ईमेल से लेकर परफॉर्मेंस से जुड़ी नौकरी में कटौती और बड़े ऑर्गनाइज़ेशनल बदलावों तक, लेऑफ कई तरह के हो सकते हैं. हर लेऑफ के अपने फैसले, अनिश्चितताएं और बीच में फंसे लोगों के लिए नतीजे होते हैं. यहां लेऑफ के चार शेड्स के बारे में बताया गया है, जिन्हें हर एम्प्लॉई को समझना चाहिए.
क्या है छंटनी के चार शेड्स?
छंटनी का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है कि कंपनी अचानक कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दे. कई बार वह आर्थिक पैकेज देकर खुद नौकरी छोड़ने का विकल्प कर्मचारियों को देती है. तो कभी परफॉर्मेंस रिव्यू या संगठन में बदलाव के नाम पर यह कदम उठाया जाता है. टेक सेक्टर में हाल के घटनाक्रम बताते हैं कि छंटनी के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं और हर स्थिति में कर्मचारियों के सामने चुनौतियां भी अलग होती हैं.
Microsoft के वॉलंटरी एग्जिट ऑफर से लेकर Oracle के कर्मचारियों को सुबह-सुबह मिले टर्मिनेशन ईमेल, Qualcomm में परफॉर्मेंस रिव्यू के बाद संभावित जॉब कट और Adidas के टेक संगठन में बदलाव तक, छंटनी के कई रूप सामने आए हैं. ऐसे में कर्मचारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि इन सभी स्थितियों में क्या अंतर है और उनका करियर पर क्या असर पड़ सकता है.
बायआउट- पैसे देकर कंपनी नौकरी छोड़ने को कहती है...
Microsoft ने 2026 में अपने कुछ पात्र कर्मचारियों के लिए वॉलंटरी एग्जिट ऑफर दिया है. इस कार्यक्रम के तहत कंपनी के चुनिंदा विभागों में इंटरनल लेवल 70 या उससे नीचे के योग्य कर्मचारियों को आर्थिक सहायता के साथ नौकरी छोड़ने का ऑप्शन दिया है. यह ऑफर भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में शामिल कुछ संगठनों पर लागू है. हालांकि, Microsoft के सभी कर्मचारी इसके पात्र नहीं हैं. यह कंपनी में होने वाली सामान्य छंटनी से बहुत अलग है. बायआउट में कर्मचारी को शर्तों के मुताबिक नौकरी छोड़ने का विकल्प मिलता है, जबकि अनिवार्य छंटनी में कंपनी खुद नौकरी खत्म करने का फैसला करती है.
कर्मचारी के लिए ऐसे ऑफर को स्वीकार करने से पहले कई बातों पर विचार करना जरूरी है. इनमें मिलने वाला पैकेज, दूसरी नौकरी मिलने की संभावना, स्वास्थ्य बीमा, भविष्य की आर्थिक जरूरतें और नई नौकरी खोजने में लगने वाला समय शामिल हैं. आर्थिक पैकेज मिलने का मतलब यह नहीं है कि नौकरी छोड़ने का फैसला आसान हो जाता है.
सुबह-सुबह टर्मिनेशन ईमेल
इसके साथ ही कुछ कर्मचारियों को कंपनी में छंटनी की जानकारी अचानक मिलती है. Oracle के मामले में सितंबर 2026 में कुछ कर्मचारियों को सुबह-सुबह ईमेल भेजकर बताया गया कि कंपनी में बदलाव की वजह से उनके पद खत्म कर दिए गए हैं. भेजे गए ईमेल में कंपनी ने उनके लास्ट वर्किंग दिन के बारे में भी जानकारी दी. कंपनी ने इस दौर में प्रभावित कर्मचारियों की कुल संख्या सार्वजनिक नहीं की.
ऐसी स्थिति में कर्मचारी को नौकरी जाने के साथ कई सवालों का सामना करना पड़ सकता है. उसे यह जानना होता है कि सेवरेंस पैकेज कितना मिलेगा, बकाया भुगतान कब होगा, कंपनी के सिस्टम का एक्सेस कब बंद होगा और आगे नौकरी की तलाश कैसे शुरू करनी है.
बायआउट और इस तरह के टर्मिनेशन में बड़ा अंतर यह है कि बायआउट में कर्मचारी के पास विकल्प हो सकता है, जबकि टर्मिनेशन ईमेल मिलने पर नौकरी खत्म करने का फैसला कंपनी ले चुकी होती है.
अप्रेजल के बाद छंटनी- जब परफॉर्मेंस पर आती है बात
छंटनी का एक रूप ऐसा भी है, जिसमें कर्मचारियों के परफॉर्मेंस रिव्यू को ध्यान में रखा जाता है. Qualcomm में 2026 के वार्षिक कर्मचारी रिव्यू के बाद वैश्विक स्तर पर जॉब कट की तैयारी की खबरें सामने आई हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी के CEO Cristiano Amon ने परफॉर्मेंस कल्चर मजबूत करने और लगातार उम्मीदों पर खरे नहीं उतरने वाले क्षेत्रों पर ध्यान देने की बात कही थी. कंपनी ने प्रस्तावित छंटनी में प्रभावित होने वाले पदों की संख्या सार्वजनिक नहीं की थी.
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि परफॉर्मेंस आधारित छंटनी और सामान्य संगठनात्मक बदलाव एक जैसे नहीं होते. संगठनात्मक बदलाव में किसी कर्मचारी का पद खत्म हो सकता है, भले ही उसका प्रदर्शन अच्छा रहा हो. वहीं, परफॉर्मेंस पर आधारित फैसलों में कर्मचारी के मूल्यांकन की भूमिका हो सकती है.
कंपनी की ओर से बताई गई वजह अपने आप यह साबित नहीं करती कि नौकरी गंवाने वाला हर कर्मचारी कमजोर प्रदर्शन कर रहा था. ऐसे मामलों में कर्मचारियों के लिए अपने काम का रिकॉर्ड रखना, मैनेजर से नियमित फीडबैक लेना और अपनी स्किल्स को अपडेट करना उपयोगी हो सकता है.
रिस्ट्रक्चरिंग- काम का तरीका बदल रही है कंपनी
कई बार छंटनी किसी एक कर्मचारी के प्रदर्शन या अचानक लागत घटाने तक सीमित नहीं होती. कंपनी अपने संगठन, टीमों और काम करने के तरीके में बड़े बदलाव करती है. इसे रिस्ट्रक्चरिंग कहा जाता है.
Adidas ने भारत में अपने टेक संगठन में कर्मचारियों की संख्या घटाने की पुष्टि की थी. कंपनी के मुताबिक, यह कदम कामकाज को सरल बनाने, जरूरी क्षमताओं को मजबूत करने और संगठन के ढांचे को कारोबारी जरूरतों के तैयार करने के लिए लिया गया था. कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव से भारत के टेक संगठन के 20 प्रतिशत से कम कर्मचारी प्रभावित हुए थे.
Adidas ने यह भी कहा था कि भारत उसके लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना हुआ है और वह जरूरी क्षमताओं में निवेश जारी रखेगी. इसका मतलब है कि रिस्ट्रक्चरिंग हमेशा किसी देश या पूरे विभाग से कारोबार समेटने का संकेत नहीं होती. कंपनी कुछ पद खत्म करते हुए दूसरे क्षेत्रों में निवेश या भर्ती जारी रख सकती है.
लेकिन कर्मचारियों के लिए ऐसी स्थिति में अनिश्चितता बनी रहती है, क्योंकि किसी उद्योग का बढ़ना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसमें मौजूद हर नौकरी सुरक्षित रहेगी.
छंटनी के इन तरीकों में क्या है अंतर?
इन चारों स्थितियों में नौकरी जाने का जोखिम हो सकता है लेकिन इनके पीछे की प्रक्रिया एक दूसरे से काफी अलग हो सकती है. बायआउट में कर्मचारी को शर्तों के साथ नौकरी छोड़ने का विकल्प दिया जाता है. टर्मिनेशन में कंपनी नौकरी खत्म करने का फैसला करती है. परफॉर्मेंस आधारित छंटनी में कर्मचारी के मूल्यांकन की भूमिका हो सकती है, जबकि रिस्ट्रक्चरिंग में कंपनी अपने संगठन और काम करने के तरीके में बदलाव करती है.
कर्मचारियों के लिए सबसे जरूरी है कि वे नौकरी से जुड़े किसी भी फैसले की शर्तों को ध्यान से पढ़ें, बकाया भुगतान और दूसरे लाभों की जानकारी लिखित में लें और आगे की आर्थिक योजना बनाएं. साथ ही, यह भी समझें कि वॉलंटरी एग्जिट ऑफर, परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान और अनिवार्य छंटनी एक ही चीज नहीं हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क