भारत में सालाना 40 लाख रुपये कमाना किसी के लिए भी बड़ी उपलब्धि हो सकती है. लेकिन अगर इसी के सामने अमेरिका में करीब 1.89 करोड़ रुपये सालाना कमाने का मौका मिले, तो? सोशल मीडिया पर इसी सवाल को लेकर चर्चा हो रही है. कंटेंट क्रिएटर उमंग चौधरी ने वीडियो शेयर करते हुए इसपर ही बात की है. उन्होंने बताया कि वह 40 लाख रुपये के भारतीय पैकेज के बजाय अमेरिका में 2 लाख डॉलर यानी करीब 1.89 करोड़ रुपये की सालाना सैलरी चुनेंगे. इसकी वजह उन्होंने सिर्फ ज्यादा कमाई नहीं, बल्कि बचत और करियर में आगे बढ़ने के मौके भी हैं.
क्यों अमेरिका की नौकरी को तरजीह दे रहे हैं उमंग?
उमंग चौधरी ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में भारत और अमेरिका की सैलरी की तुलना की. उन्होंने कहा कि अगर विकल्प भारत में 40 लाख रुपये सालाना कमाने या अमेरिका में 1 लाख डॉलर कमाने के बीच हो, तब भी वह अमेरिका को चुनेंगे. अब उमंग के इस बयान से लोग लगातार सवाल कर रहे हैं कि आखिर वह ऐसा क्यों कर रहे हैं?
इसपर उमंग ने तर्क दिया है कि अमेरिका में टेक्नोलॉजी क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवर शुरुआती दौर में करीब 1 लाख डॉलर की सैलरी से शुरुआत कर सकते हैं. उनके मुताबिक, दो से तीन साल में यह कमाई बढ़कर 2 लाख डॉलर तक पहुंच सकती है. हालांकि, यह उनकी ओर से बताई गई संभावित करियर ग्रोथ है, हर कर्मचारी के लिए इसकी गारंटी नहीं है.
2 लाख डॉलर की सैलरी में कितनी बचत का दावा?
वीडियो में उमंग ने 2 लाख डॉलर सालाना कमाई का एक हिसाब भी समझाया. उनके अनुमान के मुताबिक, इस आय का करीब 20 से 25 फीसदी हिस्सा टैक्स में चला जाएगा. उन्होंने टैक्स के लिए लगभग 50 हजार डॉलर का अनुमान लगाया. इसके अलावा, उन्होंने सालाना रहने और दूसरे खर्चों के लिए करीब 50 हजार डॉलर का बजट बताया. इस हिसाब से उनके मुताबिक, कोई व्यक्ति हर साल करीब 1 लाख डॉलर बचा सकता है.
उमंग का कहना है कि अगर कोई पेशेवर तीन से पांच साल तक इतनी बचत कर पाता है, तो वह अच्छी खासी संपत्ति बना सकता है. उन्होंने पांच साल में करीब 5 करोड़ रुपये तक की बचत की संभावना बताई. यह गणना उनके अपने अनुमान पर आधारित है. चूकिं वास्तविक बचत टैक्स, रहने की जगह, परिवार, स्वास्थ्य बीमा और जीवनशैली जैसे खर्चों के हिसाब से अलग हो सकती है.
सिर्फ पैसा नहीं, करियर ग्रोथ भी है वजह
उमंग ने अमेरिका में काम करने के फायदे को सिर्फ सैलरी तक सीमित नहीं रखा. उनके मुताबिक, वहां तीन से पांच साल काम करने से पेशेवर अनुभव और सोच में भी बदलाव आ सकता है. इस दौरान मिलने वाला एक्सपोजर आगे के करियर में मददगार हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में कुछ साल काम करने के बाद व्यक्ति के पास कई विकल्प होते हैं. वह भारत लौट सकता है, किसी दूसरे देश जा सकता है या अमेरिका में ही रह सकता है. यह फैसला परिवार, रिश्तों और वीजा की स्थिति जैसे पहलुओं पर निर्भर करता है. इसके अलावा उमंग ने साफ हवा और बेहतर रहन-सहन की संभावनाओं को भी अमेरिका जाने के पक्ष में गिनाया.
सोशल मीडिया पर क्या है लोगों की राय
उमंग के इस विचार पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं. एक यूजर ने कहा कि वह भारत में 40 लाख रुपये की सैलरी पर रहना पसंद करेगा क्योंकि परिवार और दोस्तों के साथ रहने का सुकून उसके लिए ज्यादा मायने रखता है. उसने यह भी कहा कि भारत में 40 लाख की सैलरी आगे चलकर 60 से 80 लाख रुपये या उससे ज्यादा भी हो सकती है. वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा कि भारत में परिवार और दोस्तों के करीब रहना और रोजमर्रा के कामों में मदद मिलना भी एक बड़ा फायदा है. वहीं, एक यूजर ने अमेरिका में ज्यादा टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स, कार इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस के खर्चों की ओर ध्यान दिलाया.
भारत और अमेरिका की सैलरी की तुलना में खर्च भी अहम
इस चर्चा से एक बात साफ है कि सिर्फ सैलरी के आंकड़े देखकर यह तय करना मुश्किल है कि किस देश में नौकरी करना ज्यादा फायदेमंद होगा. अमेरिका में कमाई ज्यादा हो सकती है, लेकिन वहां टैक्स, घर, स्वास्थ्य बीमा और रोजमर्रा के खर्च भी अलग स्तर के होते हैं. वहीं, भारत में 40 लाख रुपये की सालाना सैलरी पर रहने का अनुभव शहर, परिवार और खर्च करने की आदतों के हिसाब से बदल सकता है.
आजतक एजुकेशन डेस्क