IAS अधिकारी बनने में जितनी मेहनत लगती है लेकिन इसे छोड़कर राजनीति में आना ये बड़ा फैसला होता है. ये बात इसलिए उठी है क्योंकि यूपी कैडर की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने कुछ समय पहले अपना पद छोड़ा और अब वह राजनीति में एंट्री करने के लिए तैयार हैं. इसकी जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट करके दी. हालांकि, वह अभी तक किसी पार्टी में शामिल नहीं हुई हैं. उनका कहना है कि प्रशासन में काम करते हुए उन्होंने कई ऐसी परेशानियां देखीं, जिसका समाधान केवल सरकारी व्यवस्था में रहकर नहीं किया जा सकता है. उनके इस कदम के बाद से ही उन अफसरों को लेकर चर्चा होने लगी है, जिन्होंने भी ऐसा ही किया था. इस लिस्ट में कई बड़े नाम शामिल हैं. चलिए जानते हैं.
दिव्या मित्तल
इस लिस्ट में पहला नाम दिव्या मित्तल का नाम सबसे पहला है. बता दें कि वह 2013 बैच की यूपी कैडर की अधिकारी हैं. इसके साथ ही उन्होंने आईआईटी दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई की. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने विदेश में भी काम किया.
इस लिस्ट में ये नाम है शामिल
हालांकि, दिव्या मित्तल ऐसी पहली अधिकारी नहीं हैं, जिन्होंने अपनी प्रशासनिक सेवा को छोड़कर राजनीति का दामन पकड़ा है. इससे पहले कई अधिकारी ऐसा कर चुके हैं. इनमें शाह फैसल, अश्विनी वैष्णव और अर्जुन राम मेघवाल जैसे नाम शामिल हैं.
शाह फैसल
जम्मू-कश्मीर से ताल्लुकात रखने वाले शाह फैसल ने 2010 में सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल किया था. लंबे समय से IAS अधिकारी के पद पर काम करने के बाद उन्होंने 2019 में इस्तीफा दे दिया और बाद में जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट नाम से राजनीतिक दल बनाया. हालांकि, उनका ये सफर कुछ खास आगे तक नहीं गया. इसके बाद 2020 में पार्टी से दूरी बना ली. लेकिन उनका इस्तीफा सरकार ने स्वीकार नहीं किया और बाद में इस्तीफा वापस लेने का आवेदन किया. इसके बाद से साल 2022 में सरकार ने इसे स्वीकार करते हुए IAS सेवा बहाल कर दिया था.
अश्विनी वैष्णव का प्रशासन से राजनीति तक सफर
इसके अलावा राजनीति में आने से पहले अश्विनी वैष्णव प्रशासनिक सेवा का हिस्सा रहे हैं. 1994 बैच के IAS अधिकारी के तौर पर उन्होंने ओडिशा कैडर में काम किया. अपने प्रशासनिक करियर के दौरान वह बालासोर और कटक के कलेक्टर भी रहे. बाद में उनकी जिम्मेदारी केंद्र में बढ़ी और उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में काम किया. वह तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के डिप्टी सेक्रेटरी और फिर प्राइवेट सेक्रेटरी रहे.
इसके बाद से साल 2008 में उन्होंने सरकारी सेवा छोड़ दी. इसके बाद वैष्णव ने अमेरिका के Wharton School से MBA किया और निजी क्षेत्र में कदम रखा. उन्होंने GE Transportation और Siemens जैसी कंपनियों में काम किया है. आगे चलकर उन्होंने अपनी कंपनियां भी शुरू कीं. इसके बाद उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ. साल 2019 में वह राज्यसभा पहुंचे और 2021 में केंद्र सरकार में मंत्री बने. फिलहाल उनके पास रेल मंत्रालय के साथ संचार तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की जिम्मेदारी है.
अजीत जोगी
प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आने वाले अधिकारियों की इस लिस्ट में अजीत जोगी का नाम भी शामिल है. 1968 बैच के अधिकारी जोगी ने सरकारी सेवा के बाद राजनीति का रुख किया और आगे चलकर छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने. राजनीति में आने से पहले वह जिला कलेक्टर के पद पर तैनात थे. इसी दौरान उन्होंने सक्रिय राजनीति में जाने का फैसला किया. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कहने पर वह कांग्रेस में शामिल हुए थे. इस तरह अजीत जोगी का सफर एक प्रशासनिक अधिकारी से शुरू होकर देश की सक्रिय राजनीति और फिर एक नए राज्य के पहले मुख्यमंत्री तक पहुंचा.
लंबी है ये लिस्ट
अश्विनी वैष्णव और अर्जुन राम मेघवाल अकेले ऐसे नाम नहीं हैं, जिनका करियर प्रशासन से राजनीति तक पहुंचा. सिविल सेवा का अनुभव रखने वाले कई अधिकारी बाद में राजनीति में भी सक्रिय हुए हैं. इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा का नाम शामिल है, जो राजनीति में आने से पहले IAS अधिकारी रह चुके हैं. इसी तरह अजीत जोगी ने भी प्रशासनिक सेवा में काम करने के बाद राजनीति का रुख किया और आगे चलकर छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने. पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह भी IAS अधिकारी रहे हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क