बेंगलुरु की 'सबसे ज्यादा कमाई वाली नौकरियों' की एक लिस्ट ने करियर के तमाम गणित को उल्टा कर दिया है. जहां एक तरफ सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स दिन-रात कोडिंग और सैलरी हाइक के पीछे भाग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पीजी (PG) मालिकों, मकान मालिकों, वॉटर टैंकर चलाने वालों और ब्रोकर्स की बंपर कमाई की चर्चा हो रही है.
सोशल मीडिया (X) पर 'साक्षी' नाम की एक टेक-कमेंटेटर ने मजाकिया अंदाज़ में भारत के 'हाईएस्ट पेइंग करियर' की एक लिस्ट शेयर की है. इसमें दिखाया गया है कि कैसे आईआईटी की डिग्री या कोडिंग के बिना भी बेंगलुरु की बुनियादी जरूरतों (आवास और पानी) से तगड़ी कमाई हो रही है.
1. पीजी मालिक (PG Owner): एक कमरा, बड़ा बिजनेस
इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं पीजी मालिक. साक्षी के गणित के मुताबिक, एक ही कमरे में 3 लोगों को रखकर प्रति व्यक्ति 10 से 15 हजार रुपये तक वसूले जाते हैं. अगर मालिक 40,000 रुपये किराया भी दे रहा हो, तो भी सब काटकर हर महीने 1 से 1.5 लाख रुपये आसानी से बच जाते हैं. बेंगलुरु में हर साल आने वाले युवाओं के कारण सस्ते मकानों की मांग हमेशा बनी रहती है.
2. चाय-सिगरेट की दुकान: टेक इंडस्ट्री के असली मददगार
दूसरे नंबर पर टेक पार्कों के बाहर चाय-सिगरेट की दुकान चलाने वाले हैं. हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स अपनी थकावट मिटाने के लिए इन्हीं दुकानों पर निर्भर रहते हैं. 5 रुपये की सिगरेट 15 रुपये में बेचने और चाय-स्नैक्स के दम पर ये छोटे दुकानदार बिना किसी फंडिग, एमबीए या प्रेजेंटेशन के हर महीने 30,000 से 50,000 रुपये तक कमा लेते हैं.
3. बेंगलुरु के मकान मालिक: खरीदो, किराए पर दो और कमाओ
तीसरे नंबर पर आते हैं बेंगलुरु के मशहूर मकान मालिक. सीधा सा फॉर्मूला है 90 लाख का 2BHK फ्लैट खरीदो, 50 हजार रुपये महीने के किराए पर चढ़ाओ और हर साल किराया बढ़ाते रहो. न कोई परफॉर्मेंस रिव्यू, न देर रात तक काम करने का तनाव, बस हर महीने खाते में किराया आ जाता है.
4. वॉटर टैंकर मालिक: किल्लत का अपना अर्थशास्त्र
चौथे नंबर पर हैं वॉटर टैंकर चलाने वाले. शहर में पानी की किल्लत का फायदा उठाकर 1,200 से 1,500 रुपये प्रति टैंकर के हिसाब से दिन में कई चक्कर लगाए जाते हैं. जब भी पानी का संकट गहराता है, इनकी मांग और कमाई दोनों काफी बढ़ जाती है.
5. ब्रोकर (दलाल): परेशानी दूर करने की फीस
पांचवां नंबर ब्रोकर का है. सीलन वाले कमरे या मेट्रो से दूर के फ्लैट को भी किसी तरह किराए पर चढ़ाकर वे एक महीने का पूरा किराया कमीशन के तौर पर वसूल लेते हैं. किराएदार और मकान मालिक, दोनों से कमीशन लेकर वे बाजार की इसी मारामारी से कमाई करते हैं.
दूसरी तरफ सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स रात 2 बजे कर रहे कोडिंग...
इस पूरी लिस्ट का सबसे मजेदार पहलू यही है. जब पीजी मालिक, जमींदार और टैंकर वाले कमाई कर रहे होते हैं, तब आईटी इंजीनियर्स रात के 2 बजे तक कोडिंग (DSA प्रश्न) हल करने में लगे रहते हैं ताकि बेहतर जॉब या अप्रेजल मिल सके.
सोशल मीडिया पर लोगों ने भी चुटकी ली. एक यूजर ने लिखा, 'इंजीनियर्स ने सबसे मुश्किल रास्ता चुना, उन्हें कोडिंग सीखने के बजाय टैंकर खरीद लेना चाहिए था.' हालांकि ये आंकड़े केवल सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित एक अनुमान हैं, लेकिन इस मजाकिया लिस्ट ने एक कड़वी सच्चाई ज़रूर सामने ला दी है. बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहर में कभी-कभी सिर्फ हुनर ही नहीं, सही संपत्ति का होना भी बहुत मायने रखता है.
आजतक एजुकेशन डेस्क