विदेश में नौकरी मिलने पर अक्सर लोग सैलरी को भारतीय रुपये में बदलकर देखते हैं. लेकिन किसी दूसरे देश में अच्छी कमाई का मतलब यह नहीं कि पूरी रकम बचत में चली जाएगी. ऑस्ट्रेलिया में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर चुकीं भारतीय महिला अनु शर्मा ने अपनी कमाई और खर्च का पूरा हिसाब साझा किया है. उन्होंने बताया कि करीब 1.33 करोड़ रुपये के सालाना पैकेज के बावजूद टैक्स, किराया और रोजमर्रा के खर्चों के बाद वह हर महीने लगभग 2 लाख से 2.7 लाख रुपये बचा पाती थीं.
गूगल में नौकरी के बाद ऑस्ट्रेलिया पहुंचीं अनु शर्मा
अनु शर्मा पहले भारत में Google में फुल टाइम सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करती थीं. इसके बाद 2026 की शुरुआत में वह ऑस्ट्रेलिया चली गईं, जहां उन्होंने Palantir Technologies में Forward Deployed Software Engineer के रूप में काम शुरू किया. उनकी LinkedIn प्रोफाइल के मुताबिक, अब वह अपना बिजनेस भी चलाती हैं. अनु ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में बताया कि वह अकेले ऑस्ट्रेलिया गई थीं. उन्होंने वहां मिलने वाली सैलरी के साथ-साथ टैक्स और रहने-खाने के खर्चों का भी ब्योरा दिया.
सालाना सैलरी करीब 1.33 करोड़ रुपये
अनु के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में उनकी सालाना सैलरी 2 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) थी. भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 1.33 करोड़ रुपये बैठती है. हालांकि, उन्होंने बताया कि इतनी बड़ी सैलरी का पूरा फायदा हाथ में नहीं आता, क्योंकि आय का एक बड़ा हिस्सा टैक्स में चला जाता था. उनके मुताबिक, करीब 40 फीसदी रकम टैक्स के रूप में कट जाती थी. इसके बाद सबसे बड़ा खर्च घर के किराये का था.
सिडनी में किराये पर खर्च होते थे 50 हजार रुपये हफ्ते के
इतना ही नहीं अनु ने आगे वीडियो में बताया कि सिडनी के सेंट्रल इलाके में एक बेडरूम वाले अपार्टमेंट का किराया उन्हें हर हफ्ते करीब 750 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर देना पड़ता था. भारतीय मुद्रा में यह लगभग 50 हजार रुपये होता है. इसके अलावा, वह हर हफ्ते किराने के सामान पर करीब 400 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी लगभग 27 हजार रुपये खर्च करती थीं. शहर में आने-जाने के लिए परिवहन पर हर सप्ताह करीब 100 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी 6,700 रुपये का खर्च आता था. इस तरह किराये, ग्रॉसरी और ट्रांसपोर्ट को मिलाकर उनका मासिक खर्च करीब 5,416 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी लगभग 3.61 लाख रुपये था.
हर महीने 2.7 लाख रुपये तक कर लेती थीं बचत
इन खर्चों और टैक्स के बाद भी अनु हर महीने करीब 3,000 से 4,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बचा पाती थीं. भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 2 लाख से 2.7 लाख रुपये के बीच होती है. अनु ने बताया कि उनके लिए ऑस्ट्रेलिया जाने का फैसला सिर्फ ज्यादा पैसे कमाने के लिए नहीं था. वहां का वर्क कल्चर और अकेले रहकर खुद को समझने का अनुभव भी उनके लिए मायने रखता था.
विदेश जाने से पहले सिर्फ सैलरी न देखें
अनु ने विदेश में नौकरी करने की योजना बना रहे लोगों को सलाह दी कि वे केवल सालाना पैकेज देखकर फैसला न लें. किसी देश में मिलने वाली सैलरी के साथ वहां का टैक्स, घर का किराया और रोजमर्रा के खर्च भी समझना जरूरी है. उनके मुताबिक, असली तुलना इस बात से होनी चाहिए कि सभी खर्चों के बाद हर महीने कितनी रकम बचती है.
आजतक एजुकेशन डेस्क