ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ बड़े पैमाने पर जवाबी हमला किया है. ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन का इस्तेमाल करके खाड़ी के कई देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों और इजरायल के ठिकानों को निशाना बनाया.
इन हमलों में बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एयरपोर्ट, बंदरगाह और सैन्य ठिकाने प्रभावित हुए हैं. ईरान की यह कार्रवाई अमेरिका-इजरायल के हमलों का जवाब है, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई बड़े नेता मारे गए थे.
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ईरान ने किन-किन हथियारों का इस्तेमाल किया?
ईरान ने अपनी सबसे मजबूत मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल किया है. मुख्य हथियार इस प्रकार हैं...
ईरान की रणनीति मोज़ेक डिफेंस पर आधारित है. इसका मतलब है कि पूरे देश में छिपे हुए छोटे-छोटे लॉन्चर से मिसाइल और ड्रोन छोड़े जाते हैं. इससे दुश्मन को सभी जगहों पर हमला करना मुश्किल हो जाता है.
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किन-किन जगहों पर हमला हुआ?
ईरान ने मुख्य रूप से अमेरिका के इन बड़े सैन्य अड्डों को निशाना बनाया...
इसके अलावा इजरायल के तेल अवीव में एयरबेस और आर्मी कमांड मुख्यालय पर भी हमले हुए. इन हमलों से हवाई अड्डे, बंदरगाह और तेल व्यापार प्रभावित हुआ है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. कई देशों ने यात्रा चेतावनी जारी की है.
रक्षा विशेषज्ञों की राय क्या है?
इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में रक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे ने कहा कि ईरान ने ऑपरेशन लायन राइज के बाद से इजरायल-अमेरिका के हमले के लिए पूरी तैयारी की थी. चीन का समर्थन भी मिला है. ईरान की यह जवाबी कार्रवाई बहुत सोची-समझी और नियंत्रित है. यह युद्ध एकतरफा नहीं होगा. दोनों तरफ और खाड़ी देशों को भी भारी नुकसान होगा. यह क्षेत्रीय संघर्ष है जिसका वैश्विक असर होगा.
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अमेरिका और सहयोगियों की प्रतिक्रिया
अमेरिका और उसके अरब सहयोगी देशों ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की है. उन्होंने इसे लापरवाह और अनियंत्रित बताया और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा कहा है. गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि उनके पास संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा और सामूहिक रक्षा का अधिकार है. अमेरिका और इजरायल ने कहा है कि वे जवाबी कार्रवाई जारी रखेंगे.
अभी स्थिति क्या है?
युद्ध अभी भी जारी है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव बहुत ज्यादा है. ईरान की रणनीति साफ है – सस्ते ड्रोन और मिसाइलों से दुश्मन की हवाई रक्षा को थकाना और फिर बड़े हमलों से महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट करना. दुनिया भर में डिप्लोमेसी की कोशिशें चल रही हैं ताकि युद्ध और न फैले. अभी हालात बहुत नाजुक हैं.
मंजीत नेगी