शाहेद-136 ड्रोन ईरान का सबसे खतरनाक और सस्ता हथियार है जिसे सुसाइड ड्रोन कहा जाता है. यह ड्रोन एक बार लॉन्च होने के बाद खुद को टारगेट पर मारकर विस्फोट कर देता है. ईरान ने इसे 2021 से इस्तेमाल करना शुरू किया लेकिन 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस ने इसे बड़े पैमाने पर यूज किया तो दुनिया भर में इसकी ताकत का अंदाजा लगा.
हाल के समय में ईरान ने खुद इस ड्रोन से खाड़ी के कई देशों और अमेरिकी बेस पर हमले किए हैं. इसकी वजह से इजरायल, अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन जैसे देशों में अलर्ट रहता है. लोग रात में सो नहीं पाते क्योंकि ये ड्रोन रात में आते हैं. हवाई रक्षा को चकमा देकर हमला करते हैं. ईरान का दावा है कि यह ड्रोन बहुत सस्ता है और बड़े हमलों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
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शाहेद-136 ड्रोन की तकनीकी खासियतें क्या हैं?
शाहेद-136 ड्रोन की लंबाई करीब 3.5 मीटर, चौड़ाई यानी विंगस्पैन 2.5 मीटर और वजन लगभग 200 किलोग्राम होता है. यह डेल्टा विंग डिजाइन वाला है जो इसे हवा में स्थिर रखता है. इसमें पुशर प्रोपेलर इंजन लगा होता है जो MD-550 या उसका कॉपी है और यह पिस्टन इंजन है. अधिकतम स्पीड 185 किलोमीटर प्रति घंटा है.
रेंज 2000 से 2500 किलोमीटर तक बताई जाती है जिससे यह बहुत दूर के टारगेट तक पहुंच सकता है. इसमें 30 से 50 किलोग्राम का हाई एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन वॉरहेड लगा होता है जो बड़े विस्फोट करता है. गाइडेंस सिस्टम में GPS और INS इस्तेमाल होता है जो पहले से प्रोग्राम करके टारगेट पर भेजता है.
यह ड्रोन ट्रक से लॉन्च होता है और कई ड्रोन एक साथ लॉन्च करके स्वार्म अटैक कर सकता है. सस्ता होने की वजह से ईरान और रूस हजारों बना सकते हैं.
यह ड्रोन कितना खतरनाक और प्रभावी है?
शाहेद-136 की सबसे बड़ी ताकत इसकी कम कीमत और लंबी रेंज है. एक ड्रोन की कीमत सिर्फ 20,000 से 50,000 डॉलर बताई जाती है जबकि महंगे मिसाइल सिस्टम लाखों-करोड़ों में आते हैं. यह हवाई रक्षा को थका देता है क्योंकि दुश्मन को हर ड्रोन को रोकने के लिए महंगे मिसाइल इस्तेमाल करने पड़ते हैं.
यूक्रेन युद्ध में रूस ने इसे गेरान-2 नाम से इस्तेमाल किया और हजारों लॉन्च करके यूक्रेन की बिजली, शहरों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए. ईरान ने इसे हूती, हिजबुल्लाह जैसे ग्रुप्स को दिया और खुद इस्तेमाल किया. ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में खाड़ी के देशों पर शाहेद-136 से हमले किए जिससे कुवैत, बहरीन, यूएई जैसे देशों में अमेरिकी दूतावास और बेस पर खतरा बढ़ गया. यह ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ता है. रडार से बचना आसान होता है.
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किन-किन देशों पर इसका असर पड़ा है?
शाहेद-136 ने कई देशों को प्रभावित किया है. रूस ने यूक्रेन पर हजारों इस्तेमाल किए. ईरान ने इराक, सीरिया में अमेरिकी बेस पर, यमन के हूती ने सऊदी और यूएई पर और अब हाल के हमलों में खाड़ी के 5-6 देशों पर. कुल मिलाकर ईरान से जुड़े ग्रुप्स और रूस के जरिए यह 10-14 देशों तक पहुंचा है जैसे यूक्रेन, इजरायल, अमेरिका के बेस, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन, जॉर्डन, इराक आदि.
इन देशों में लोग रात में डरते हैं क्योंकि हमले अचानक और बड़े पैमाने पर होते हैं. अमेरिका ने खुद शाहेद-136 की कॉपी बनाकर इस्तेमाल शुरू किया है ताकि ईरान को जवाब दे सके. लेकिन ईरान की ताकत यह है कि यह सस्ता और बड़े संख्या में उपलब्ध है.
भविष्य में शाहेद-136 का क्या रोल होगा?
शाहेद-136 ने ड्रोन युद्ध को बदल दिया है. अब देश बड़े मिसाइल के बजाय सस्ते ड्रोन से हमला कर सकते हैं. ईरान और रूस मिलकर इसे और बेहतर बना रहे हैं. रूस में फैक्ट्री लगाकर हजारों बना रहे हैं. ईरान नए वर्जन जैसे जेट पावर्ड या बेहतर गाइडेंस वाले बना रहा है. यह स्वार्म अटैक के लिए इस्तेमाल हो सकता है जहां सैकड़ों ड्रोन एक साथ आकर हवाई रक्षा को ओवरलोड कर दें.
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कई देश अब इसके खिलाफ सस्ते तरीके ढूंढ रहे हैं जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर या छोटे ड्रोन से काउंटर. लेकिन अभी तक यह कई देशों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. रातों की नींद उड़ा रहा है. ईरान का यह हथियार साबित कर रहा है कि महंगे हथियारों के दौर में सस्ता और स्मार्ट ड्रोन कितना खतरनाक हो सकता है.
ऋचीक मिश्रा