भारतीय नौसेना अब पारंपरिक विध्वंसक युद्धपोत यानी डेस्ट्रॉयर से आगे निकल चुकी है. प्रोजेक्ट 18 मूल रूप से डेस्ट्रॉयर के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह 11 से 13 हजार टन विस्थापन वाला क्रूजर स्तर का विशाल युद्धपोत बन गया है. यह जहाज हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में से एक होगा.
इसमें इतनी एडवांस क्षमताएं भरी जा रही हैं कि यह एक साथ ड्रोन स्वार्म, बैलिस्टिक मिसाइल और हाइपरसोनिक हथियारों से लड़ने में सक्षम होगा. यह न सिर्फ आज के खतरों के लिए है, बल्कि 2040 और उसके बाद की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है.
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प्रोजेक्ट 18 भारतीय नौसेना की भविष्य की रीढ़ बनेगा. पहले इसे मध्यम आकार के डेस्ट्रॉयर के रूप में सोचा गया था, लेकिन बढ़ते खतरे और नई तकनीकों को देखते हुए डिजाइन को पूरी तरह बदल दिया गया. अब इसका विस्थापन 11 से 13 हजार टन होगा, जो इसे क्रूजर श्रेणी में ला खड़ा करता है.
नौसेना इस प्रोजेक्ट के तहत 10 से 12 जहाज बनाने की योजना बना रही है. कुल लागत 10 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है. यह कार्यक्रम मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का बड़ा उदाहरण बनेगा. जहाज का डिजाइन इतना एडवांस है कि इसमें भविष्य की तकनीकों को आसानी से जोड़ा जा सकेगा.
शक्तिशाली हथियार प्रणाली
इस जहाज की सबसे बड़ी ताकत उसके हथियार हैं. इसमें 144 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) सेल लगाए जाएंगे, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सबसे भारी हथियार वाले जहाजों में इसे शामिल करेगा.
ये हथियार जहाज को दुश्मन के किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की क्षमता देंगे.
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एडवांस टेक्नोलॉजी और स्टेल्थ फीचर्स
प्रोजेक्ट 18 में इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिक प्रोप्लशन सिस्टम लगाया जाएगा. इससे जहाज ज्यादा चुपके से चल सकेगा. तेज स्पीड मिलेगी और भविष्य में डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स (जैसे लेजर) के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध होगी.
जहाज में 50 से 100 kW वाले टैक्टिकल लेजर हथियार शुरू से ही डिजाइन में शामिल किए गए हैं. ये ड्रोन स्वार्म को नष्ट करने में बेहद कारगर साबित होंगे. रडार सिस्टम भी स्वदेशी होगा. DRDO का S-band AESA रडार 500 KM से ज्यादा दूरी पर लक्ष्य को ट्रैक कर सकेगा. यह रडार दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को बहुत पहले पहचान लेगा.
स्वदेशीकरण और आधुनिक डिजाइन
इस जहाज में 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होगा. इससे न सिर्फ विदेशी निर्भरता कम होगी बल्कि भारतीय उद्योग को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा. जहाज पर ऑटोमेशन की वजह से क्रू की संख्या 25 से 30 प्रतिशत कम कर दी गई है. इससे ऑपरेशन ज्यादा कुशल बनेगा. नौसेना का लक्ष्य है कि यह जहाज पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक पर आधारित हो और भविष्य में निर्यात भी किया जा सके.
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आज के युद्धक्षेत्र में खतरे बदल चुके हैं. ड्रोन स्वार्म, हाइपरसोनिक मिसाइलें और बैलिस्टिक हमले आम हो गए हैं. प्रोजेक्ट 18 इन्हीं सभी खतरों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. यह एक साथ कई मोर्चों पर लड़ने की क्षमता रखेगा. इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिक प्रोप्लशन और लेजर हथियार इसे ऊर्जा और स्टेल्थ के मामले में आगे रखेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि यह जहाज भारतीय नौसेना को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाएगा.
प्रोजेक्ट 18 भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है. चीन के बढ़ते नौसैनिक विस्तार और हिंद महासागर में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए यह जहाज नौसेना को मजबूत जवाब देने की क्षमता देगा. 10-12 जहाजों का बेड़ा तैयार होने पर भारतीय नौसेना की स्ट्राइक और डिफेंस क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.
ऋचीक मिश्रा