वायुसेना प्रमुख के फ्रांस दौरे से 114 राफेल समेत कई वेपन डील को बढ़त

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की फ्रांस यात्रा ने 114 राफेल विमानों की मेगा डील को नई गति दी है. दसॉल्ट, साफरान, एमबीडीए और थेल्स जैसी कंपनियों के साथ चर्चा से रक्षा औद्योगिक साझेदारी मजबूत हुई.

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भारतीय वायु सेना प्रमुख एपी सिंह फ्रांसीसी एयरफोर्स के अधिकारियों से मिलते हुए. (Photo: IAF) भारतीय वायु सेना प्रमुख एपी सिंह फ्रांसीसी एयरफोर्स के अधिकारियों से मिलते हुए. (Photo: IAF)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 05 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:52 PM IST

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह की तीन दिवसीय फ्रांस यात्रा भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रही है. इस यात्रा के दौरान नई दिल्ली कई बड़े सैन्य सौदों और संयुक्त विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है, जिनमें भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद शामिल है. यह दौरा सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि भारत की रक्षा आधुनिकीकरण योजनाओं को मजबूत करने और फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने की दिशा में एक ठोस कदम है.

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एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने फ्रांस के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ विस्तृत बैठकें कीं और दसॉल्ट, साफरान, थेल्स, तथा एमबीडीए जैसी प्रमुख रक्षा कंपनियों के साथ भी चर्चा की. यह यात्रा इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि भारतीय वायुसेना अपनी स्क्वॉड्रन संख्या बढ़ाने के लिए 114 नए लड़ाकू विमान खरीदने की योजना बना रही है. फ्रांस में पहले से ही सेवा में मौजूद दसॉल्ट का राफेल विमान इस डील का केंद्र बिंदु है. 

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यात्रा के दौरान वायुसेना प्रमुख ने द्विपक्षीय सहयोग, दोनों वायुसेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता और भविष्य की तकनीकों पर चर्चा की. उन्होंने मॉन्ट-डे-मार्सन एयर कॉम्बैट सेंटर का दौरा किया और A-400M परिवहन विमान में उड़ान भी भरी, जिससे उन्हें आधुनिक युद्ध संचालन और ताकत प्रदर्शन की नई समझ मिली.

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114 राफेल विमानों की खरीद की प्रगति

भारतीय वायुसेना की स्क्वॉड्रन संख्या लगातार घट रही है. ऐसे में 114 राफेल विमानों की खरीद बहुत जरूरी मानी जा रही है. पहले भारत 36 राफेल विमान खरीद चुका है, जो पहले ही अपनी बेहतरीन क्षमताओं के लिए प्रसिद्ध हैं. नई डील में तकनीकी हस्तांतरण, स्वदेशी उत्पादन और लंबी अवधि के रखरखाव समझौते शामिल होने की संभावना है. 

यह सौदा न सिर्फ वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाएगा बल्कि मिसाइल, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम जैसी एडवांस तकनीकों को भी भारत लाएगा. फ्रांस के साथ यह साझेदारी हाल के संघर्षों और ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों के बाद भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करेगी.

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प्रमुख फ्रांस कंपनियों के साथ औद्योगिक साझेदारी

यात्रा का एक अहम हिस्सा फ्रांसीसी रक्षा उद्योग से जुड़ी कंपनियों के साथ बैठकें थीं. साफरान कंपनी अब भारत के एयरो-इंजन कार्यक्रम की महत्वपूर्ण साझेदार बन गई है. वह भारतीय स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट - AMCA के लिए भविष्य के इंजन प्रौद्योगिकी समाधानों पर चर्चा कर रही है. इससे भारत को स्वदेशी इंजन बनाने में बड़ी मदद मिल सकती है.

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मिसाइल निर्माता MBDA, जो राफेल पर Meteor बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल और SCALP क्रूज मिसाइल सप्लाई करता है, भारत की लंबी दूरी की सटीक हमले की क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है. वहीं थेल्स कंपनी एवियोनिक्स, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीकों में अपना योगदान दे रही है. इन बैठकों से साफ है कि भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने से आगे बढ़कर संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी विकास पर जोर दे रहा है.

प्रधानमंत्री की फ्रांस यात्रा से पहले महत्वपूर्ण दौरा

एयर चीफ मार्शल सिंह की यह यात्रा प्रधानमंत्री की इस माह फ्रांस यात्रा से ठीक पहले हुई है. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग अब खरीदारी तक सीमित नहीं रह गया है. यह तकनीकी हस्तांतरण, स्थानीय विनिर्माण और संयुक्त विकास की ओर बढ़ रहा है. मेक इन इंडिया अभियान के तहत फ्रांस के साथ साझेदारी को और गहरा करने की कोशिश की जा रही है.

भारत हाल के वर्षों में अपनी रक्षा नीति में बदलाव ला रहा है. अब लक्ष्य है कि विदेशी कंपनियों के साथ काम करते हुए स्वदेशी उद्योग को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी कर सके बल्कि अन्य देशों को भी उपकरण और तकनीक उपलब्ध करा सके.

मेक इन इंडिया और रक्षा आधुनिकीकरण की नई दिशा

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यह यात्रा भारत की व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण योजनाओं का हिस्सा है. सरकार का प्रयास है कि भविष्य के कार्यक्रमों की नींव मजबूत की जाए. फ्रांस के साथ साझेदारी में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा मिल रहा है. राफेल डील के साथ-साथ इंजन तकनीक, मिसाइल सिस्टम और एवियोनिक्स में सहयोग से भारतीय वायुसेना की क्षमता में गुणात्मक वृद्धि होने की उम्मीद है. 

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