बेंगलुरु स्थित एचएएल एयरपोर्ट ने भारतीय विमानन इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है. यहां देश का पहला रिक्वायर्ड नेविगेशन परफॉर्मेंस कैटेगरी एच यानी आरएनपी कैट एच हेलीकॉप्टर अप्रोच सिस्टम शुरू कर दिया गया है. यह सैटेलाइट आधारित सटीक नेविगेशन प्रणाली खास तौर पर हेलिकॉप्टरों के लिए बनाई गई है.
एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एएआई द्वारा विकसित इस प्रणाली को एचएएल के टेस्ट पायलटों ने उड़ान परीक्षणों के जरिए मान्य किया और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी डीजीसीए ने इसे मंजूरी दी. इस नई व्यवस्था से हेलीकॉप्टर अब ऊबड़-खाबड़ इलाके और शहरी बाधाओं से बचते हुए बहुत सटीक और अनुकूलित रास्ते पर उड़ान भर सकते हैं. इससे हर मौसम में सुरक्षित पहुंच संभव हो गई है.
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आरएनपी कैट एच एक आधुनिक सैटेलाइट गाइडेड प्रिसिजन नेविगेशन सिस्टम है जो सिर्फ हेलिकॉप्टरों के लिए डिजाइन किया गया है. पारंपरिक नेविगेशन तरीकों की तुलना में यह प्रणाली हेलीकॉप्टर को बहुत सटीक रास्ते पर उड़ान भरने में मदद करती है. एचएएल एयरपोर्ट पर इस सिस्टम के लागू होने से हेलीकॉप्टर का अप्रोच समय 12 मिनट से घटकर सिर्फ चार मिनट रह गया है.
यह बदलाव न सिर्फ समय बचाता है बल्कि ईंधन की खपत भी कम करता है. यात्री तथा चालक दल की सुरक्षा बढ़ाता है. शहरी इलाकों में ऊंची इमारतों और पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरते समय यह प्रणाली बाधाओं से बचने में विशेष रूप से उपयोगी साबित होती है.
सुरक्षा और दक्षता में बड़ा सुधार
इस नई प्रणाली से हेलीकॉप्टर ऑपरेशन की सुरक्षा काफी बढ़ गई है. अब पायलट सैटेलाइट सिग्नल के आधार पर सटीक रास्ता अपना सकते हैं जिससे खराब मौसम में भी लैंडिंग आसान हो जाती है. एयर एंबुलेंस और बचाव अभियानों जैसे महत्वपूर्ण मिशनों के लिए यह व्यवस्था बेहद फायदेमंद है क्योंकि तेजी से पहुंचने से जानें बचाई जा सकती हैं.
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साथ ही रोटरी विंग यानी हेलीकॉप्टर और फिक्स्ड विंग यानी साधारण विमानों के संचालन को एक साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है. इससे हवाई क्षेत्र की क्षमता भी बढ़ती है. शहर के ऊपर शोर का स्तर कम होने से स्थानीय लोगों को भी राहत मिलेगी.
एचएएल के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर रवि के ने इस उपलब्धि को देश के विमानन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है. उन्होंने कहा कि आरएनपी कैट एच हेलीकॉप्टर अप्रोच का संचालन शुरू होना सुरक्षा, दक्षता और पहुंच को बढ़ाता है.
यह प्रणाली पूरे देश के अन्य हवाई अड्डों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने के लिए मिसाल पेश करती है. एचएएल बेंगलुरु एयरपोर्ट पर रोजाना करीब 50 हेलिकॉप्टर मूवमेंट होते हैं. लंबे समय से चली आ रही बुनियादी ढांचे की कमी को इस लॉन्च ने पूरा कर दिया है. अब यहां हेलिकॉप्टर ऑपरेशन ज्यादा सुरक्षित और स्मार्ट हो गए हैं.
भारत में हेलिकॉप्टर सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है. पर्यटन, चिकित्सा आपात स्थिति, आपदा राहत और व्यावसायिक यात्राओं में हेलिकॉप्टर की मांग बढ़ रही है. ऐसे में आरएनपी कैट एच जैसी आधुनिक प्रणाली पूरे देश में लागू होने से हेलिकॉप्टर संचालन को नई ऊंचाई मिलेगी.
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पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर क्षेत्र और घने शहरी इलाकों में यह तकनीक विशेष रूप से कारगर साबित होगी. एएआई और डीजीसीए के सहयोग से विकसित यह प्रणाली स्वदेशी क्षमताओं को भी मजबूत करती है. भविष्य में अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर भी इसी मॉडल को अपनाया जा सकता है जिससे पूरे देश में हेलिकॉप्टर सेवाएं ज्यादा विश्वसनीय बनेंगी.
यह उपलब्धि भारतीय विमानन क्षेत्र में तकनीकी प्रगति का प्रतीक है. एचएएल एयरपोर्ट ने न सिर्फ खुद को अद्यतन किया है बल्कि पूरे देश के लिए एक नया मानक स्थापित किया है. सुरक्षित, तेज और पर्यावरण के अनुकूल हेलिकॉप्टर संचालन की दिशा में यह एक बड़ा कदम है. आने वाले समय में ऐसी और पहलें भारतीय आसमान को और सुरक्षित तथा कुशल बनाएंगी.
शिवानी शर्मा