चिनूक से हॉवित्जर की रैपिड तैनाती, भारतीय सेना ने दिखाया एयर मोबिलिटी का दम

भारतीय सेना ने ईस्टर्न कमांड के ब्रह्मास्त्र कोर के तहत चिनूक हेलिकॉप्टर से अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर रेजिमेंट की अंडरस्लंग ट्रेनिंग कर रैपिड तैनाती की क्षमता दिखाई. सेना का कहना है कि इससे मुश्किल और दुर्गम इलाकों में कॉम्बैट एसेट्स तेजी से पहुंचाकर उभरती ऑपरेशनल जरूरतों का तुरंत जवाब देना आसान होगा.

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चिनूक हेलीकॉप्टर हॉवित्जर ले जा रहा है. (Photo- ITG) चिनूक हेलीकॉप्टर हॉवित्जर ले जा रहा है. (Photo- ITG)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:17 PM IST

भारतीय सेना ने अपनी रैपिड एयर डिप्लॉयमेंट क्षमता का प्रदर्शन किया है. ईस्टर्न कमांड के तहत ब्रह्मास्त्र कोर ने चिनूक हेलिकॉप्टर के जरिए अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर यानी ULH रेजिमेंट की तेजी से तैनाती का अभ्यास किया. इस ट्रेनिंग का मकसद आर्टिलरी फायरपावर को एयर मोबिलिटी के साथ जोड़कर युद्धक क्षमता को तेजी से ऑपरेशनल एरिया तक पहुंचाना है.

इस अभ्यास के दौरान अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर को चिनूक हेलिकॉप्टर के जरिए अंडरस्लंग तरीके से ले जाने और तैनात करने की क्षमता को परखा गया. इससे सेना को ऐसे इलाकों में अपनी फायरपावर तेजी से पहुंचाने में मदद मिलेगी, जहां पारंपरिक तरीकों से भारी हथियारों और आर्टिलरी को ले जाना मुश्किल होता है.

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मुश्किल इलाकों में तेजी से तैनाती

सेना की यह क्षमता खास तौर पर कठिन और चुनौतीपूर्ण इलाकों के लिए अहम है. ऐसे क्षेत्रों में सड़कों और पारंपरिक जमीनी रास्तों की सीमाओं के कारण भारी आर्टिलरी की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो सकती है. चिनूक जैसे हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर के जरिए जरूरी युद्धक संसाधनों को तेजी से आगे के इलाकों में पहुंचाया जा सकता है.

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इस ट्रेनिंग से सेना की पहुंच, मोबिलिटी और तेजी को मजबूत करने के साथ ऑपरेशनल तैयारियों को भी बढ़ावा मिलता है. अभ्यास ने यह दिखाया कि भारतीय सेना जरूरत पड़ने पर चुनौतीपूर्ण इलाकों में अपनी युद्धक क्षमता को तेजी से तैनात कर सकती है और उभरती ऑपरेशनल जरूरतों के मुताबिक प्रभावी प्रतिक्रिया दे सकती है.

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