पाकिस्तान द्वारा भारत से सटी सीमा पर चीन द्वारा निर्मित लगभग 250 SH-15 सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोपों की तैनाती की रिपोर्ट के बीच भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. मंगलवार को विदेश मंत्रालय (MEA) के विकली मीडिया ब्रीफिंग के दौरान प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि आत्मरक्षा में जो भी जरूरी कदम होगा, भारत वो उठाएंगे.
पाकिस्तान द्वारा अपनी तोपखाने आधुनिकीकरण योजना के तहत की गई तैनाती से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि देखिए, ऑपरेशन सिंदूर के वक्त आपने देखा था कि हमने मुंह तोड़ जवाब दिया था. भारत राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जो भी जरूरी होगा, वो करेगा.
स्पष्ट है भारत का रुख
उन्होंने कहा कहा कि भारत का रुख सीमा पार आतंकवाद को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है. सीमा पार से आतंकवाद बंद हो, हमें अपने देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के लिए जो भी कदम उठाना पड़ेगा, वो उठाएंगे. भारत उसके लिए सतर्कता से तैनात है.
ब्रीफिंग के दौरान रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों को पूरी तरह से ढोंग करार दिया. उन्होंने कहा कि जून से अब तक पाक बलों की कार्रवाई में कम से कम 90 नागरिकों की जान जा चुकी है. पाकिस्तान वहां की जनता के विरोध और असंतोष को गोलियों, ब्लैकआउट और दमन के जरिए दबा रहा है.
ऑपरेशन सिंदूर में हुआ था PAK को नुकसान
दरअसल, मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की आर्टिलरी को बड़ा नुकसान पहुंचा था. अपनी इसी सैन्य कमजोरियों को दूर करने के लिए रावलपिंडी ने चीन की कंपनी नोरिंको (Norinco) से ये 250 सिस्टम हासिल किए हैं. ये कदम चीन और पाकिस्तान के बीच गहरे होते रक्षा संबंधों तथा संयुक्त सैन्य अभ्यासों को दिखाता है.
6x6 आर्मर्ड ट्रक चेसिस पर लगी 155mm/52-कैलिबर की ये हॉवित्जर सड़क पर 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है जो 53 से 72 किलोमीटर तक रॉकेट-असिस्टेड गोले दाग सकती है. इसका ऑटोमेटेड फायर-कंट्रोल और हाइड्रोलिक सिस्टम इसे काउंटर-बैटरी रडार से बचाते हुए तेजी से स्थान बदलने में मदद करता है.
पाकिस्तान की ये हाई-मोबिलिटी तोप सिस्टम सीमा पर भारत के सैन्य ठिकानों और लॉजिस्टिक रूट को अपनी रेंज में लेती है. भारत के पास ट्रैक्ड के-9 वज्र जैसे सुरक्षित सिस्टम हैं, लेकिन पाकिस्तान की व्हील्ड मोबिलिटी उसे बढ़त देती है. हालांकि, गंभीर आर्थिक दबाव के बीच इतनी बड़ी संख्या में इन प्रणालियों को बनाए रखना पाकिस्तान के लिए चुनौतीपूर्ण होगा.
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