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चिनूक हेलीकॉप्टर

चिनूक हेलीकॉप्टर

चिनूक हेलीकॉप्टर

चिनूक हेलीकॉप्टर (Chinook Helicopter), जिसे औपचारिक रूप से CH-47 चिनूक कहा जाता है, दुनिया के सबसे शक्तिशाली और भरोसेमंद सैन्य परिवहन हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है. इसे अमेरिकी कंपनी बोइंग ने विकसित किया है और इसका उपयोग कई देशों की सेनाएं भारी सामान और सैनिकों की तेज आवाजाही के लिए करती हैं. इसकी सबसे बड़ी पहचान इसका ड्यूल-रोटर (दो पंखों वाला) डिजाइन है, जो इसे असाधारण स्थिरता और भारी वजन उठाने की क्षमता प्रदान करता है.

CH-47 चिनूक पहली बार 1960 के दशक में सेवा में आया था. इसके बाद से इसे लगातार आधुनिक तकनीक के साथ उन्नत किया जाता रहा है. यह हेलीकॉप्टर लगभग 10 से 12 टन तक का भार उठाने में सक्षम है, जिसमें तोपें, सैन्य वाहन, रसद सामग्री और आपातकालीन उपकरण शामिल होते हैं. इसकी गति लगभग 280 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जो इसे अन्य भारी हेलीकॉप्टरों की तुलना में तेज बनाती है.

चिनूक हेलीकॉप्टर का उपयोग केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है. प्राकृतिक आपदाओं के समय यह राहत और बचाव कार्यों में भी अहम भूमिका निभाता है. बाढ़, भूकंप या हिमस्खलन जैसी स्थितियों में यह दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने में बेहद उपयोगी साबित हुआ है. इसके अलावा यह सैनिकों की तैनाती, मेडिकल इवैक्यूएशन और मानवीय सहायता अभियानों में भी प्रयोग किया जाता है.

भारत ने भी अपनी वायुसेना के बेड़े में CH-47F(I) चिनूक हेलीकॉप्टरों को शामिल किया है. ये हेलीकॉप्टर विशेष रूप से ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में संचालन के लिए उपयुक्त हैं. लद्दाख और अरुणाचल जैसे क्षेत्रों में इनकी उपयोगिता रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.

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