चार दिन में अज्ञात लाश का अंतिम संस्कार, बाद में पता चला युवराज सिंह मनचंदा का था शव... DGP ने मानी ये बात

युवराज सिंह मनचंदा मर्डर केस में हरियाणा डीजीपी ने अज्ञात शव को संभालने और अंतिम संस्कार में कुछ कमियां मानी हैं. इस मामले में ZIPNET एंट्री, पोस्टमॉर्टम और पुलिस कार्रवाई पर कोर्ट ने भी सवाल उठाए हैं. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले में गुरुग्राम पुलिस के एक ASI को गिरफ्तार किया गया है (फोटो-ITG) इस मामले में गुरुग्राम पुलिस के एक ASI को गिरफ्तार किया गया है (फोटो-ITG)

नीरज वशिष्ठ

  • गुरुग्राम,
  • 29 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:29 PM IST

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अजय सिंघल ने दिल्ली के रियल एस्टेट प्रोफेशनल युवराज सिंह मनचंदा के शव को संभालने और उसका अंतिम संस्कार करने में पुलिस की ओर से कुछ कमियां होने की बात मानी है. युवराज का शव 10 सितंबर को गुरुग्राम के सेक्टर-70 में पानी से भरे एक गड्ढे से बरामद हुआ था. चार दिन बाद 14 सितंबर को उसकी पहचान नहीं होने के कारण पुलिस ने उसे अज्ञात शव मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था. बाद में पता चला कि वह शव युवराज मनचंदा का था, जिनकी कथित तौर पर उनकी पूर्व सहयोगी अन्या वत्स और उसके पार्टनर संयम सचदेवा ने हत्या की थी. दोनों को 16 सितंबर को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया था.

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युवराज सिंह मनचंदा 6 सितंबर को दिल्ली में मौजूद अपने घर से यह कहकर निकले थे कि वह गुरुग्राम में एक मीटिंग के लिए जा रहे हैं. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, उसी रात उनकी कथित तौर पर हत्या कर दी गई. पुलिस के अनुसार युवराज का शव करीब दो दिन तक एक गाड़ी में रखा गया और 8 सितंबर को बादशाहपुर के पास फेंक दिया गया. इसके बाद 10 सितंबर को गुरुग्राम पुलिस को सेक्टर-70 के पानी से भरे गड्ढे से सड़ा-गला शव मिला था. पुलिस ने मौका-ए-वारदात का मुआयना किया. वहां का वीडियो बनाया. रफ साइट प्लान तैयार करने के बाद शव को मॉर्चरी में भिजवा दिया था.

उधर, युवराज के परिवार ने 11 सितंबर को दिल्ली के लाजपत नगर थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. दिल्ली पुलिस ने 12 सितंबर को युवराज की तस्वीर और अन्य जानकारी ZIPNET पर अपलोड कर दी थी. ZIPNET कई उत्तरी राज्यों की पुलिस का साझा डेटाबेस है, जिसमें गुमशुदा शख्स और अज्ञात शव से जुड़ी जानकारी साझा की जाती है. इसके बावजूद गुरुग्राम पुलिस ने बरामद अज्ञात शव की जानकारी ZIPNET पर 16 सितंबर को अपलोड की, यानी शव का अंतिम संस्कार होने के दो दिन बाद. इसी देरी को इस केस में उठे सबसे अहम सवालों में से एक माना जा रहा है.

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हरियाणा के डीजीपी ने कहा कि पुलिस के पास अज्ञात शवों को लेकर एक तय SOP है और किसी शव को तीन दिन से ज्यादा नहीं रखा जा सकता. इसी आधार पर 72 घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि इस मामले में कुछ कमियां हुईं और कोर्ट ने भी उनका संज्ञान लिया है. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ये कमियां क्या थीं, लेकिन गुरुग्राम पुलिस की कोर्ट में दाखिल कंप्लाइंस रिपोर्ट और सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों से कई सवाल उठे हैं. 

पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक 10 सितंबर को शाम करीब 4 बजकर 5 मिनट पर कंट्रोल रूम को शव मिलने की सूचना मिली थी और 4 बजकर 20 मिनट पर पुलिस टीम मौके के लिए रवाना हो गई थी. नियमों के मुताबिक अज्ञात शव मिलने के बाद उसकी तस्वीरें और पहचान से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड की जानी चाहिए और पुलिस कंट्रोल रूम तथा दूसरे राज्यों की पुलिस को भेजी जानी चाहिए. साथ ही इसकी जानकारी ZIPNET पर जल्द अपलोड की जानी चाहिए, ताकि गुमशुदा लोगों के रिकॉर्ड से मिलान किया जा सके.

मामले में कथित लापरवाही को लेकर बादशाहपुर थाने में तैनात एक ASI को आंतरिक समीक्षा के बाद निलंबित किया गया है. वहीं, अदालत ने पुलिस से शव की बरामदगी से लेकर अंतिम संस्कार तक के सभी रिकॉर्ड मांगे हैं. DGP का कहना है कि SOP के तहत अज्ञात शव को तीन दिन से ज्यादा नहीं रखा जा सकता, लेकिन कोर्ट के सवाल 72 घंटे के भीतर पहचान की कोशिश, ZIPNET पर समय से जानकारी डालने, सार्वजनिक नोटिस, सामान सुरक्षित रखने और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया से जुड़े हैं. 

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पैसों के लेनदेन को लेकर की गई हत्या

परिजनों के मुताबिक, उस दिन परिवार उनके साथ लाजपत नगर में शादी की खरीदारी करने गया था. शेरवानी फाइनल हुई थी. घरवालों के लिए यह खुशी का पल था, क्योंकि करीब एक महीने बाद युवराज की शादी होने वाली थी. खरीदारी के बाद युवराज ने बताया कि उन्हें अपनी एक पूर्व महिला सहकर्मी से मीटिंग करनी है. उन्होंने अपनी मंगेतर और बॉस को भी इस मीटिंग के बारे में बताया था.

करिश्मा बताती हैं कि परिवार ने युवराज से आखिरी बार 6 सितंबर की शाम करीब 7:30 बजे बात की थी. इसके बाद फोन पर उसकी आवाज नहीं आई. परिवार को सिर्फ कुछ मैसेज मिले.  इसके बाद सामने आई एक ऐसी खबर, जिसने शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया. पुलिस के मुताबिक करोड़ों रुपये के कथित पैसों के लेन-देन के विवाद में युवराज की हत्या कर दी गई.

अदानी रियलटी के मैनेजर थे युवराज

युवराज सिंह मनचंजा अदानी रियलटी के मैनेजर के पद पर काम करते थे. गुरुग्राम में एक महीने बाद उनकी शादी होने वाली थी. हत्या के आरोप में गिरफ्तार महिला अन्या वत्स के खिलाफ दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में पहले दर्ज हो चुका है. अन्या वत्स गवर्मेंट अफसर बनकर लोगों को उनके काम करवा देने का झांसा देती थी. सरकारी अफसर बनकर फोन कॉल करती थी और काम करवाने के बदले मोटे पैसे लेकर गायब हो जाती थी. अन्या वत्स ने कई लोगों के लाखों रुपयों पर चुना लगाया है.

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ठगी के शिकार लोगों ने पार्लियामेंट पुलिस स्टेशन में कुछ समय पहले शिकायत दी थी जिस पर FIR भी दर्ज हुई थी. सूत्रों के मुताबिक अब तक की पूछताछ में हत्याकांड के पीछे फाइनेंशियल डिस्प्यूट की बात सामने आ रही है. अन्या वत्स ने पूछताछ में बताया कि उसने ही युवराज को कॉल करके गुरुग्राम बुलाया था. युवराज कार से गुरुग्राम पहुंचा था. अन्या वत्स उसके दोस्त और युवराज के बीच कुछ बहस हुई.

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