श्रद्धा वॉल्कर हत्याकांड: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी अमेरिका-ब्रिटेन में बैठे 4 गवाहों की गवाही

श्रद्धा वॉल्कर हत्याकांड में साकेत कोर्ट ने अमेरिका और ब्रिटेन में मौजूद व्हाट्सऐप, गूगल, जीमेल और बम्बल के चार अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही की अनुमति दी. बयान 1 दिसंबर 2026 से दर्ज होंगे. पढें पूरी कहानी.

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आरोपी आफताब पूनावाला जेल में बंद है (फोटो-ITG) आरोपी आफताब पूनावाला जेल में बंद है (फोटो-ITG)

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 12 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:32 PM IST

श्रद्धा वॉल्कर हत्याकांड में दिल्ली पुलिस अब अमेरिका और ब्रिटेन में मौजूद चार गवाहों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दर्ज कराएगी. साकेत कोर्ट ने व्हाट्सऐप, गूगल, जीमेल और बम्बल से जुड़े अधिकारियों की विदेश से गवाही कराने की अनुमति दे दी है. इस मामले में आफताब अमीन पूनावाला के खिलाफ मुकदमा चल रहा है और ट्रायल अपने अंतिम चरण के करीब है. 

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अदालत ने कहा कि गवाहों को विदेश से दिल्ली बुलाने में काफी खर्च होगा और इससे सुनवाई में देरी भी हो सकती है. ऐसे में मुकदमे को जल्द पूरा करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही दर्ज करना उचित होगा.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरविंदर सिंह जग्गी ने शनिवार को दिल्ली पुलिस की अर्जी मंजूर करते हुए निर्देश दिया कि गवाहों के बयान 1 दिसंबर 2026 से दर्ज किए जाएं. अदालत के आदेश के मुताबिक, हर दिन एक गवाह की गवाही होगी. पुलिस ने इन चारों गवाहों को पेश करने की अनुमति मांगी थी, जो बड़ी टेक कंपनियों से जुड़े हैं.

इनमें व्हाट्सऐप और मेटा प्लेटफॉर्म्स के नोडल अधिकारी एड्रियन सिल्वेरा, गूगल के नोडल अधिकारी शेल्बी स्मिथ, जीमेल से जुड़ी नोडल अधिकारी आरती शेठ और बम्बल ग्रुप के नोडल अधिकारी एवं कानून प्रवर्तन संचालन प्रबंधक ल्यूक मित्सी शामिल हैं.

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कोर्ट ने गवाही की प्रक्रिया के लिए दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर स्थित साउथ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष को मुख्य केंद्र बनाने का निर्देश दिया है। विदेश में मौजूद प्रत्येक गवाह अपने निवास या कार्यालय के पते के आधार पर नजदीकी भारतीय दूतावास या हाई कमीशन में बैठकर बयान देगा.

संबंधित भारतीय मिशन का अधिकारी गवाही की प्रक्रिया में समन्वय करेगा. अदालत ने कहा कि विदेश में रह रहे गवाहों की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दर्ज कराना मुकदमे को समय पर पूरा करने और न्याय के हित में जरूरी है.

इस प्रक्रिया को समय पर पूरा कराने के लिए मामले के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर राम सिंह को संपर्क अधिकारी बनाया गया है. उन्हें संबंधित विभागों के जरिए जरूरी अनुमति और औपचारिकताएं पूरी कराने की जिम्मेदारी दी गई है. मुख्य केंद्र के समन्वय अधिकारी को विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे और बचाव पक्ष के वकीलों के साथ तालमेल कर गवाही की तारीखें तय करनी होंगी.

अदालत ने आदेश की प्रति भारतीय दूतावासों, हाई कमीशन, विदेश मंत्रालय के कांसुलर, पासपोर्ट और वीजा विभाग के संयुक्त सचिव तथा गृह मंत्रालय के संबंधित नोडल अधिकारी को भेजने का निर्देश भी दिया है.

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गवाहों को समन और अन्य जरूरी दस्तावेज गृह मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय के जरिए तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार भेजे जाएंगे. समन में उस स्थान का पूरा विवरण होना चाहिए, जहां से संबंधित गवाह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बयान देगा.

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इसके अलावा गवाही की तारीख, समय और पहचान पत्र दिखाने की शर्त भी स्पष्ट रूप से दर्ज की जाएगी. अमेरिका, ब्रिटेन और भारत के बीच समय के अंतर को ध्यान में रखकर सुनवाई का समय तय किया जाएगा.

दिल्ली पुलिस ने गवाहों की गवाही दर्ज कराने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 296 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के संबंधित प्रावधानों का हवाला दिया था. अदालत से अनुमति मिलने के बाद अब पुलिस चारों गवाहों के बयान दर्ज कराने की तैयारी करेगी. ये गवाह टेक कंपनियों से जुड़े अधिकारी हैं और उनकी गवाही मामले की कानूनी कार्यवाही का हिस्सा होगी.

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