हैदराबाद में रिटायर्ड IPS अधिकारी की पत्नी की हत्या और लूट के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. पांच महीने तक चली जांच के बाद पुलिस ने नेपाल बेस्ड एक कथित अंतरराज्यीय गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में वह घरेलू मेड भी शामिल है, जिस पर वारदात के लिए घर में दाखिल करने और परिवार की जानकारी गैंग तक पहुंचाने का आरोप है.
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने घर से करीब 225 ग्राम सोने के गहने और दूसरी कीमती चीजें लूटी थीं. चारों को 26 अक्टूबर को हैदराबाद के नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास गिरफ्तार किया गया. यह मामला रिटायर्ड IPS अधिकारी रे विनय रंजन की पत्नी तनुजा रंजन की हत्या से जुड़ा है. तनुजा का शव 7 और 8 मई की दरमियानी रात हैदराबाद के जुबली हिल्स इलाके के प्रशासन नगर स्थित उनके घर में मिला था.
पुलिस के मुताबिक, महिला के हाथ बंधे हुए थे और उनके मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था. घर के बेडरूम में सामान बिखरा हुआ था और अलमारियां तोड़ी गई थीं. शुरुआती जांच में करीब 225 ग्राम सोने के गहने समेत अन्य कीमती सामान चोरी होने की बात सामने आई थी.
इस वारदात के सिलसिले में जुबली हिल्स पुलिस स्टेशन में क्राइम नंबर 307/2026 के तहत केस दर्ज किया गया था. पुलिस ने हत्या और लूट के मामले की जांच के लिए स्थानीय पुलिस, टास्क फोर्स और सेंट्रल क्राइम स्टेशन की टीमों को लगाया. जांच के दौरान CCTV फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल की गई.
पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आए सुरागों के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों और उनके आपसी संपर्कों का पता लगाया गया. पुलिस की जांच के मुताबिक, धर्मा तिरुवा उर्फ कल्पना इस वारदात की अहम कड़ी थी. वह तनुजा रंजन के घर में घरेलू सहायिका के तौर पर काम करती थी. आरोप है कि उसने घर में रखे कीमती सामान, परिवार की गतिविधियों और नियोक्ता की आवाजाही से जुड़ी जानकारी गैंग के सदस्यों को दी थी.
पुलिस के मुताबिक, गैंग के सदस्य पुणे समेत अलग-अलग जगहों पर सक्रिय थे और इसी जानकारी के आधार पर उन्होंने लूट की योजना बनाई. जांचकर्ताओं के अनुसार, धर्मा जून 2025 में हैदराबाद आई थी और उसे हर महीने करीब 20 हजार रुपये मिलते थे. वह कथित तौर पर पुणे में रहने वाले एक नेपाली नागरिक के संपर्क में थी.
पुलिस का दावा है कि घर की संपत्ति और वहां तक पहुंच बनाने की संभावनाओं की जानकारी मिलने के बाद गैंग ने वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई. हालांकि, मामले में आरोपियों की भूमिका और घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की जांच अभी जारी है. पुलिस के मुताबिक, 4 मई को जब तनुजा रंजन के नियोक्ता बेंगलुरु के लिए रवाना हुए, तब धर्मा ने कथित तौर पर गैंग के सदस्यों को इसकी जानकारी दी.
इसके बाद आरोपी अलग-अलग जगहों से हैदराबाद की ओर निकले. बताया गया है कि उन्होंने पहचान से बचने के लिए किराये की कार, बस और परिवहन के दूसरे साधनों का इस्तेमाल किया. 7 मई की सुबह गैंग के दो सदस्य धर्मा से उसके कार्यस्थल के पास मिले और घर की रेकी की.
पुलिस के मुताबिक, उसी शाम गैंग के सदस्य महात्मा गांधी बस स्टेशन (MGBS) के पास इकट्ठा हुए. इसके बाद उन्होंने दो ग्रुप बना लिए. एक समूह को घर में घुसकर लूट की वारदात को अंजाम देने की जिम्मेदारी दी गई, जबकि दूसरे समूह को बाहर निगरानी रखने के लिए लगाया गया. जांच में आरोप है कि धर्मा ने घर में एंट्री दिलाने में मदद की. इसके बाद आरोपी घर में दाखिल हुए और लूटपाट की घटना को अंजाम दिया.
पुलिस के घटनाक्रम के मुताबिक, 7 और 8 मई की दरमियानी रात लूट के दौरान तनुजा रंजन की नींद खुल गई थी. आरोप है कि घर में घुसे लोगों ने उन्हें काबू कर लिया और उनके हाथ-पैर बांध दिए. उनके मुंह में कपड़ा ठूंसकर उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश की गई. पुलिस के अनुसार, इस दौरान दम घुटने से उनकी मौत हो गई. इसके बाद आरोपी घर में रखे कीमती सामान को लेकर पिछले दरवाजे से फरार हो गए.
वारदात के बाद आरोपी नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास दोबारा इकट्ठा हुए और वहां से काजीपेट की ओर चले गए. पुलिस के मुताबिक, वे एक सुनसान पहाड़ी इलाके में पहुंचे, जहां कथित तौर पर लूटे गए सामान को नौ हिस्सों में बांटा गया. इसके बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए गैंग के सदस्य छोटे-छोटे समूहों में बंट गए और नेपाल की ओर भाग गए. पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने चोरी के सामान को अलग-अलग जगहों पर ठिकाने लगाने की भी कोशिश की.
इस मामले में पुलिस ने 22 मई को मुख्य आरोपी बताए गए सुनील बहादुर औजी उर्फ सुनील परियार और कथित तौर पर चोरी का सामान प्राप्त करने वाले दिलीप बहादुर मिजार उर्फ सोनार को गिरफ्तार किया था. पुलिस के मुताबिक, इन दोनों के पास से चोरी की संपत्ति के करीब 26 ग्राम सामान बरामद किया गया.
इससे पहले, 19 मई को नेपाल बेस्ड गैंगों की ओर से तेलंगाना में कथित तौर पर किए जा रहे संपत्ति संबंधी अपराधों के व्यापक पैटर्न को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई थी. इसके बाद SIT ने बेंगलुरु, मुंबई, पुणे, सूरत, पटना, दिल्ली, लखनऊ और उत्तराखंड समेत कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया. पुलिस टीमों ने भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में भी जांच की और दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों में आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई.
CCTV फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से संदिग्धों की गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश की गई. लगातार पांच महीने तक चले इस अभियान के बाद 26 अक्टूबर को नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धर्मा तिरुवा उर्फ कल्पना (26), गणेश बीके उर्फ गणेश विश्वकर्मा (31), चंद्र बहादुर तामांग उर्फ शंकर चंद्र लामा (44) और गणेश बहादुर शाही (37) के रूप में की है. धर्मा नेपाल के सुर्खेत की रहने वाली है और घरेलू सहायिका के तौर पर काम करती थी. गणेश विश्वकर्मा मजदूरी करता है, जबकि चंद्र बहादुर तामांग रसोइया और गणेश बहादुर शाही चौकीदार के तौर पर काम करता था.
पुलिस रिकॉर्ड में गणेश विश्वकर्मा और गणेश बहादुर शाही के पते पुणे, जबकि चंद्र बहादुर तामांग का पता गुरुग्राम दर्ज है. पुलिस ने चारों आरोपियों के पास से 51,130 रुपये नकद और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या और लूट की इस वारदात में किस आरोपी की क्या भूमिका थी और चोरी की बाकी संपत्ति कहां है. पुलिस फरार आरोपियों की तलाश भी कर रही है. मामले में आगे की जांच जारी है.
बेंगलुरु और दिल्ली में भी वारदात की तैयारी
जांचकर्ताओं का दावा है कि गैंग घरेलू सहायकों के जरिए घरों तक पहुंच बनाने और इसी तरीके से लूट की दूसरी वारदातों को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की योजना बेंगलुरु और दिल्ली में भी इसी तरह के अपराध करने की थी. जांच के दौरान गिरफ्तार कुछ आरोपियों के खिलाफ पहले दर्ज मामलों की जानकारी भी सामने आई है.
पुलिस ने चंद्र बहादुर तामांग का संबंध जयपुर और दिल्ली में दर्ज मामलों से जोड़ा है, जबकि गणेश बहादुर शाही के खिलाफ बेंगलुरु में संपत्ति संबंधी अपराध का मामला दर्ज होने की बात कही है. इसी दौरान SIT ने हैदराबाद में संपत्ति संबंधी अपराधों के मामलों में वांछित नेपाल के अन्य फरार नागरिकों के खिलाफ जारी पांच लंबित गैर-जमानती वारंट भी तामील किए.
पुलिस ने जीवन चंद उर्फ जीबन को भी पकड़ा है. जांचकर्ताओं के मुताबिक, वह आदतन संपत्ति अपराधी है और तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र तथा गुजरात में दर्ज आठ मामलों में कथित तौर पर शामिल रहा है. पुलिस इन मामलों में उसकी भूमिका और अन्य आरोपियों से उसके संपर्कों की जांच कर रही है.
हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनार ने इस मामले के बाद लोगों, अपार्टमेंट वेलफेयर एसोसिएशन और गेटेड कम्युनिटी में रहने वालों से सतर्क रहने की अपील की है. उन्होंने कहा कि घरेलू सहायकों, रसोइयों, चौकीदारों और केयरटेकर को काम पर रखने से पहले उनकी पहचान और पते की पुष्टि करनी चाहिए. जहां लागू हो, वहां पुलिस वेरिफिकेशन भी कराया जाना चाहिए.
इसके अलावा, उनके पिछले रोजगार और निवास से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने तथा पुराने नियोक्ताओं और मकान मालिकों से संपर्क कर जानकारी लेने की सलाह दी गई है. पुलिस ने लोगों को यह भी सलाह दी है कि वे घरेलू कर्मचारियों के साथ सोने के गहनों, नकदी, लॉकर की चाबियों और यात्रा की योजनाओं जैसी संवेदनशील जानकारी अनावश्यक रूप से साझा न करें.
अपार्टमेंट परिसरों में आने-जाने वाले लोगों का रजिस्टर रखने, प्रवेश नियंत्रण व्यवस्था मजबूत करने और CCTV कैमरों की निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है. पुलिस के मुताबिक, इन उपायों से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और अपराध की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है.
हैदराबाद पुलिस ने लोगों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साझा करने की अपील की है. इसके लिए नागरिक आपातकालीन नंबर 100 या 112 पर कॉल कर सकते हैं. इसके अलावा, हैदराबाद सिटी पुलिस के WhatsApp हेल्पलाइन नंबर 94906 16555 पर भी सूचना दी जा सकती है. लोग अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
पुलिस के मुताबिक, पूरी कार्रवाई DCP (Commissioner's Task Force) वैभव रघुनाथ गायकवाड़, IPS और DCP (Jubilee Hills) ए. रमना रेड्डी की निगरानी में की गई. अभियान में SIT का नेतृत्व कर रहे इंस्पेक्टर जी.एस. डैनियल शांति कुमार और जुबली हिल्स इंस्पेक्टर डी. अशोक समेत उनकी टीमों ने भूमिका निभाई. पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों को पकड़ने और चोरी की बाकी संपत्ति बरामद करने के प्रयास जारी हैं.
अब्दुल बशीर