नोएडा के चर्चित निठारी कांड के किरदारों में से एक सुरेंद्र कोली ने खुदकुशी कर ली है. सुरेंद्र कोली पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में रह रहा था. यहीं पर उसने आत्महत्या कर ली. सुरेंद्र कोली को 12 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड के सारे आरोपों से बरी कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने उसे निर्दोष करार दिया था. इसके बाद वह हरिद्वार में रहता था.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सुरिंदर कोली को जिन सबूतों के आधार पर पिछली अदालतों ने दोषी ठहराया और सज़ा दी, वह क़ानूनी तौर पर अवैध, अविश्वसनीय और विरोधाभासी थीं.
इससे पहले अदालत इस कांड के दूसरे मुख्य किरदार मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर चुकी है.
इससे पहले मोनिंदर पंधेर और सुरिंदर कोली दोनों को साल 2009 में बलात्कार, हत्या, सबूतों को नष्ट करने और दूसरे आरोपों से जुड़े मामलों में ग़ाज़ियाबाद की एक सीबीआई अदालत ने मृत्यु की सजा दी थी.
अदालत से बरी होने के बाद मोनिंदर सिंह पंधेर ने आजतक के साथ खास बातचीत में सुरेंद्र कोली को निर्दोष बताया था.
नवंबर 2025 में आजतक के सीनियर पत्रकार शम्स ताहिर खान ने मोनिंदर सिंह पंधेर का इंटरव्यू लिया था. इस दौरान पंधेर ने सुरेंद्र कोली के बारे में विस्तार से बताया था.
उस इंटरव्यू के चुनिंदा अंश हम आपके सामने पेश कर रहे हैं.
सवाल- आप डी5 कोठी में कब आए थे?
जवाब- मैं 2004 में आया था.
सवाल- सुरेंद्र कोली से कैसे मुलाकात हुई?
जवाब- जो हमारे प्रॉपर्टी डीलर थे, जिन्होंने ये कोठी हमारे को दिलाई थी. ये उनके पास काम करता था.
सवाल- 2004 में ही सुरेंद्र कोली को आपने अपने घर पर रखा?
मोनिंदर सिंह पंढेर - जी हां
सवाल- 2004 से 2006 अगले दो सालों में कभी आपने सुरेंद्र कोली के बिहेव्यिर में उसके बर्ताव के बारे में कोई अजीब चीज देखी कभी?
जवाब- बिल्कुल नहीं. ये काफी गलत फहमी है कि इस घर में केवल मोनिंदर सिंह नहीं था. प्लीज. प्लीज. आज तक ये विषय कहीं नहीं उठा. पता सबको था. किसी ने उठाया नहीं. और उसका कारण आप जानते हो. और उसी चीज के लिए मैं कह रहा हूं बार बार. ये सब इनवेस्टिगेशन को एक तरीके से गुमराह किया गया.
सवाल- आप कोठी डी5 के मालिक थे. आपने कभी घर के अंदर कोई ऐसी चीज़ देखी हो, जिस पर आपको शक हो कि मेरे घर में कुछ अजीब सी चीज़ हो रही है, कभी नहीं पाया?
जवाब - एक परसेंट नहीं सर. क्या बात कर रहे हैं. शक की कहानी कह रहे हैं ना. ये एक नार्मल घर था. और जहां तक नार्मल घर की कोई इनवेस्टिगेशन करता है. मैं ये नहीं कह सकता कि हां जी मैं रोज आकर बिस्तरों को उठाकर देखता था. अलमारियां खोलकर देखता था. नो. नार्मल था. आया हूं. खाना खाया हूं और बेडरूम में चला गया हूं. मुझे सब नार्मल दिखाई देता था. बल्कि यहां तक कह सकता हूं कि बढ़िया दिखाई देता था.
सवाल - कोली फर्स्ट फ्लोर पर रहा करता था?
जवाब - पहले वो रहा करता था गैराज में. गैराज के बाद मैंने एक सर्वेंट क्वाटर बनाया उसके (कोठी) ऊपर. सर्वेंट क्वाटर में वो रहने लगा. सर्वेंट क्वाटर के साथ ही उसका बाथरूम था.
सवाल - जब ये सारी चीज़ें हुई. कोली ऊपर रहता था. कभी आपने ध्यान नहीं दिया आपने. फर्स्ट फ्लोर परमौका मिला जाने का, कि वहां जाकर देखूं?
जवाब - नहीं मैं तो सिर्फ कंस्ट्रक्शन के टाइम गया था ऊपर. उसके बाद तो मतलब ही नहीं है. मैं तो कभी किचन में भी नहीं जाता था सच पूछो तो. मैंने क्या करना वहां पे. मेरा तो काम ही नहीं है.
सवाल - जब आपने कुछ नहीं देखा, आपके कई बार ऐसे स्टेटमेंट आए हैं, जिनमें आपने सीधे-सीधे निठारी में जितने बच्चे मारे गए. आपने ये कहा कि ये कोली ने किया है. आपने अभी हाल में भी कहीं कहा था कि कोली एक दो बार रात में भी निकला है या कोली इस तरह का कुछ कर सकता है. उसकी आपने एक दलील भी दी थी कि जब जब इस कोठी में कोई मर्डर हुआ, ये कोठी के बाहर जहां भी. उस वक्त आप कोठी में मौजूद नहीं थे. पहली बार आप ऑस्ट्रेलिया में थे. फिर चंडीगढ़ में. फिर टूअर पर.
जवाब - ये तो मैं अब भी कहता हूं. वो तो सीबीआई कह रही है. अगर उसको आप जोड़ रहे हो.
सवाल - आपने कभी माना है कि हां ये जो कुछ हुआ इसके लिए कोली जिम्मेदार है?
जवाब - नहीं, मैंने नहीं माना. मेरे मुंह से कहलवाया गया. अंग बंग घूमाके. कुछ बात घुमा के.
सवाल - आपसे कहा गया कि कोली का नाम लो?
जवाब - मेरे को किसी ने नहीं कहा. जैसे आप सवाल कर रहे हो. उसमें जबान फिसल गई हो. मैंने अपनी तरफ कभी नहीं कि कोली ने किया.
सवाल - असल में वो कोठी है सेंटर में और कोठी के ऑनर आप हैं. कोठी का नौकर कोली. और 19 साल हो गए. कोठी के पीछे से ही सारी चीज़े बरामद होती हैं. यहां तक कि इल्जाम ये भी आता है कि इसके पीछे ऑर्गन का भी एक रैकेट था?
जवाब - ये तो उस टाइम भी आ गया था. जब इनवेस्टिगेशन चल रही थी, उस टाइम काफी शोर मचा था. पहले तो कोई ह्यूमन ट्रैफिंकिंग का चला था. फिर वेश्यावृत्ति का चला था. इसके बाद फिर ऑर्गन ट्रेड का चला था. उसी टाइम ये मीडिया में आ रहा था. इसकी साथ ही साथ इनवेस्टिगेशन हो रही थी. मैं तो बता नहीं सकता.
सवाल - आपके पड़ोस में एक कोठी है डी-6. उसमें एक डॉक्टर रहते हैं. और तब उंगली थी कि शायद ये ह्यूमन ऑर्गन का केस है?
जवाब - उस टाइम तो मेरी नॉलेज में नहीं थी बिल्कुल भी ये बात. मुझे तो बाद में पता चला.
सवाल - ये कितना सच है कि एक बार आपने कहीं ये कहा था कि एक बार रात को आपकी अचानक आंख खुली और आपने देखा कि कोली गेट खोलकर कहीं बाहर जा है. उसके हाथ में कोई पैकेट हो.
जवाब - देखो देर सवेर तो जाता रहता था. ऐसी कोई बात नहीं है. कोई रात को उठके देखा हो या कुछ ऐसा स्पेसिक देखा हो. देर सवेर गेरता था, रात को भी जाके सामान गेरता था.
सवाल - तो रात को अगर वो बाहर जाता था, तो आपने कभी पूछा नहीं क्यों रात को बाहर जाता है?
जवाब - मैंने कभी पूछा नहीं. मेरा मतलब ही नहीं. किस चीज को पूछें.
नोएडा का निठारी कांड याद है आपको?
नोएडा का निठारी कांड ने देश भर में सुर्खियां बटोरी थी. साल 2005-2006 में दिल्ली से सटे नोएडा के निठारी गांव में कई बच्चों और युवतियों के गायब होने की घटनाएं हुईं. परिजनों ने स्थानीय थाने में शिकायत की, पर पुलिस ने महीनों तक अनदेखी की. बाद में जांच शुरू होने पर मोनिंदर सिंह पंधेर के घर के पीछे नाले से 19 कंकाल बरामद हुए. मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरिंदर कोली को गिरफ्तार किया गया. मामला सीबीआई को सौंपा गया. CBI को मानव हड्डियों के हिस्से और 40 ऐसे पैकेट मिले,जिनमें मानव अंग भरकर नाले में फेंके गए थे.
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