पुणे के लोनावला में राइफल से गोली चलने के एक मामले ने नया मोड़ ले लिया है, जहां 33 साल के अभय माणिक मराठे की गोली लगने से मौत हो गई थी. शुरुआत में पुलिस ने इसे राइफल साफ करते समय अचानक गोली चलने की घटना माना था और आकस्मिक मौत का केस दर्ज किया था. लेकिन पोस्टमार्टम और आगे की जांच में पुलिस को गोली लगने का ये मामला संदिग्ध लगा. इसके बाद मामले को हत्या में बदल दिया गया.
दरअसल, इसी 5 अक्टूबर को लोनावला के भुशी गांव स्थित होटल मोतीराम के परिसर में ये वारदात हुई थी. मृतक अभय माणिक मराठे, पूर्व लोनावला नगर पार्षद माणिक मराठे का बेटा था. गोली लगने के बाद अभय को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. घटना के बाद लोनावला सिटी पुलिस ने शुरुआत में एक्सिडेंटल फायरिंग का मामला दर्ज किया था.
मामले की जांच आगे बढ़ी तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस का शक बढ़ा दिया. जांच अधिकारियों के मुताबिक, चोट ऐसी नहीं थी, जैसी गलती से राइफल चलने पर होने की संभावना रहती है. पुलिस को संकेत मिले कि गोली सीधे अभय के शरीर में लगी थी. इसके बाद पुणे ग्रामीण पुलिस की लोकल क्राइम ब्रांच और लोनावला सिटी पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू की.
पुलिस ने होटल के कर्मचारियों, वेटरों और उस समय वहां मौजूद अन्य लोगों से भी जानकारी जुटाई. जांच के दौरान सामने आया कि अभय और उसके 83 वर्षीय दादा मोतीराम मराठे के बीच संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था. पुलिस के मुताबिक, 5 अक्टूबर को दोनों के बीच एक लेन-देन को लेकर बहस हुई थी. आरोप है कि इसी दौरान मोतीराम ने अपना आपा खो दिया और अपनी लाइसेंसी राइफल से अभय पर गोली चला दी.
पुलिस के अनुसार, गोली अभय के सीने में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. जांच में मिले तथ्यों के आधार पर पुलिस ने अब मोतीराम मराठे को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि जिस घटना को पहले राइफल की एक्सिडेंटल फायरिंग समझा जा रहा था, वह जांच के बाद जानबूझकर की गई फायरिंग निकला और इसे हत्या का मामला माना गया.
जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में परिवार के पांच अन्य सदस्यों के खिलाफ भी केस दर्ज किया है. आरोप है कि घटना के बाद इन लोगों ने मोतीराम को बचाने और कथित तौर पर सबूत मिटाने की कोशिश की. अभय के तीन भाई थे और पुलिस के मुताबिक परिवार के अलग-अलग सदस्यों के बीच मोतीराम से विभिन्न मुद्दों को लेकर मतभेद भी थे. जांचकर्ताओं को शक है कि परिवार के कुछ सदस्यों ने बुजुर्ग होने की वजह से मोतीराम को बचाने की कोशिश की.
1970 और 1980 में खरीदी थीं दोनों राइफलें
पुलिस के मुताबिक, मोतीराम मराठे के पास दो लाइसेंसी राइफलें थीं. उसने एक 12-बोर राइफल वर्ष 1970 में खरीदी थी, जबकि दूसरी राइफल 1980 में खरीदी गई थी. जांच में यह भी सामने आया है कि मोतीराम को शिकार में रुचि थी और वह पहले इन लाइसेंसी हथियारों का इस्तेमाल शिकार के लिए कर चुका था. पुलिस अब दोनों हथियारों और घटना में इस्तेमाल की गई कथित राइफल की जांच कर रही है.
फिलहाल, पुणे ग्रामीण पुलिस और लोनावला सिटी पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. जांच एजेंसियां घटना से पहले और बाद की पूरी टाइमलाइन, इस्तेमाल किए गए हथियार और परिवार के अन्य आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या के बाद कथित तौर पर सबूत छिपाने या आरोपी को बचाने में किस-किस की भूमिका थी.
ओमकार