बेंगलुरु में कस्टडी में टॉर्चर के बाद दलित युवक की मौत, इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मी सस्पेंड

कर्नाटक में 22 साल के दलित युवक की मौत ने पुलिस कस्टडी और रिहैब सेंटर की भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मृतक के मां के आरोपों के बाद इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मी सस्पेंड कर दिए गए हैं. CID को इस मामले की जांच की जिम्मेदारी दी गई है.

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नशे में झगड़ा करने के आरोप में युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. (Photo: Representational) नशे में झगड़ा करने के आरोप में युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. (Photo: Representational)

aajtak.in

  • बेंगलुरु ,
  • 03 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 6:04 PM IST

कर्नाटक के बेंगलुरु के पास एक रिहैबिलिटेशन सेंटर में 22 साल के दलित युवक की मौत के मामले ने कर्नाटक पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया है. मृतक की मां के आरोपों के बाद चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है, जिसमें एक इंस्पेक्टर भी शामिल है. परिवार का कहना है कि युवक को पहले पुलिस कस्टडी में टॉर्चर किया गया, जिसकी वजह से रिहैबिलिटेशन सेंटर में उसकी मौत हो गई.

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जानकारी के मुताबिक, मृतक युवक का नाम दर्शन पीजी है, जो बेंगलुरु के विवेकनगर इलाके का रहने वाला था. उसकी मौत 26 नवंबर को हुई थी. पुलिस विभाग ने मंगलवार को विवेकनगर थाने के एक इंस्पेक्टर, एक कॉन्स्टेबल और दो अन्य पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. इस मामले की जांच CID को सौंप दी गई है. 12 नवंबर को नशे में पड़ोसियों से झगड़ा करने के आरोप में दर्शन को पकड़ा गया था.

उसकी मां का आरोप है कि पुलिस कस्टडी में उसके साथ मारपीट की गई. इसके बाद में 16 नवंबर को वरिष्ठ अधिकारी ने परिजनों को बताया कि मां की इच्छा पर युवक को जेल भेजने की बजाय उसे बेंगलुरु के बाहरी इलाके स्थित एक रिहैबिलिटेशन सेंटर भेज दिया गया है, क्योंकि वह शराब की लत से जूझ रहा था. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने रिहैब सेंटर में एडमिशन के नाम पर 7500 रुपए लिए थे.

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इसके बाद दर्शन को सीधे वहां शिफ्ट कर दिया गया. मां का कहना है कि उसे कभी बेटे से मिलने या बात करने की अनुमति नहीं दी गई. जब उसने पूछताछ की तो उसे भरोसा दिया गया कि उसका बेटा सुरक्षित है. उसका इलाज किया जा रहा है. लेकिन 26 नवंबर को अचानक मां को जानकारी दी गई कि दर्शन की सांस लेने में दिक्कत के बाद मौत हो गई. मां का दावा है कि बेटे के शरीर पर चोट के कई निशान थे.

इससे यह शक गहरा हुआ कि हिरासत में उसे टॉर्चर किया गया था. उसी के असर से उसकी मौत रिहैब सेंटर में हुई. दर्शन की मां कि शिकायत के आधार पर मदनायकनहल्ली थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) (हत्या), 127(3) (गलत कैद), और 3(5) (कॉमन इंटेंशन) के तहत केस दर्ज किया गया है. चार पुलिस अधिकारियों और रिहैब सेंटर के मालिक पर SC-ST एक्ट की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं. 

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