26/11 आतंकी हमला: छह आरोपियों पर इन एब्सेंशिया ट्रायल की तैयारी, हाफिज सईद और लखवी भी शामिल

मुंबई में 26/11 आतंकी हमले के मामले में हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी समेत छह पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ गैर-मौजूदगी में ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो गई है. यह कार्रवाई BNSS की धारा 356 के तहत होगी. जानें पूरा मामला.

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आतंकी अबू जुंदाल के खिलाफ इसी मामले में पहले से ट्रायल जारी है (फोटो-ITG) आतंकी अबू जुंदाल के खिलाफ इसी मामले में पहले से ट्रायल जारी है (फोटो-ITG)

विद्या

  • मुंबई,
  • 19 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:46 PM IST

मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान में मौजूद छह आरोपियों के खिलाफ अब गैर-मौजूदगी में ट्रायल यानी इन एब्सेंशिया ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है. इन आरोपियों में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का सरगना हाफिज मुहम्मद सईद और 26/11 हमले का कथित मास्टरमाइंड जकी-उर-रहमान लखवी भी शामिल है. 

इन सभी पर मुंबई आतंकी हमले की साजिश रचने और आतंकियों को मदद पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं. खास बात यह है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS, 2023 लागू होने के बाद किसी आतंकी मामले में यह इन एब्सेंशिया ट्रायल का पहला मामला होगा.

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26/11 मामले की सुनवाई कर रही मुंबई की विशेष अदालत ने छह वांछित आरोपियों के खिलाफ प्रोक्लेमेशन यानी उद्घोषणा जारी की थी. इनमें हाफिज मुहम्मद सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अबू अलकामा, आसिम उर्फ अबू काहफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा के नाम शामिल हैं. अदालत ने इन सभी को 18 अगस्त तक उसके सामने पेश होकर शिकायत का जवाब देने का निर्देश दिया था. लेकिन तय समय सीमा खत्म होने तक इनमें से कोई भी आरोपी अदालत के सामने पेश नहीं हुआ.

अब मुंबई पुलिस और अभियोजन पक्ष इन सभी आरोपियों के खिलाफ गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने की मांग करेगा. इस मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी. इसी दिन अदालत यह तय कर सकती है कि इन छह आरोपियों के खिलाफ इन एब्सेंशिया ट्रायल शुरू किया जाए या नहीं. यानी आरोपी पाकिस्तान में मौजूद हैं और भारतीय अदालत के सामने पेश नहीं हुए हैं, फिर भी उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी. 

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यह प्रक्रिया इसलिए अहम है क्योंकि आरोपियों की गैर-मौजूदगी की वजह से 26/11 मामले की सुनवाई को अनिश्चित समय तक रोका नहीं जा सकता. दरअसल, BNSS की धारा 356 फरार या देश से बाहर मौजूद आरोपियों के खिलाफ उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने का प्रावधान करती है. इस प्रावधान का मकसद यह है कि कोई आरोपी लगातार फरार रहकर या विदेश में रहकर न्यायिक प्रक्रिया को लंबा न खींच सके. 

ऐसे मामलों में अदालत तय कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी सुनवाई आगे बढ़ा सकती है. 26/11 मामले में इसी प्रावधान का इस्तेमाल किए जाने की तैयारी है.

26 नवंबर 2008 को शुरू हुआ था आतंकी हमला

मुंबई में 26 नवंबर 2008 की रात शुरू हुआ आतंकी हमला 29 नवंबर तक चला था. इस दौरान पाकिस्तान से समुद्र के रास्ते आए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने मुंबई में कई जगहों को निशाना बनाया था. होटल ताज महल पैलेस एंड टावर्स, होटल ट्राइडेंट, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, नरीमन हाउस, कामा अस्पताल के आसपास का इलाका और कैफे लियोपोल्ड समेत कई जगहों पर हमले किए गए थे. इस आतंकी हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे.

26/11 के इस हमले में भारत के नागरिकों के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका और इजरायल समेत कई देशों के नागरिक भी मारे गए थे. मुंबई पुलिस और सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए नौ आतंकियों को मार गिराया था. वहीं, एक आतंकी अजमल आमिर कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था. कसाब से हुई पूछताछ इस पूरे आतंकी हमले की साजिश और पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के नेटवर्क का पता लगाने में बेहद अहम साबित हुई थी.

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जांच में सामने आया था कि 26/11 हमले के दौरान कराची के एक कंट्रोल रूम में बैठे लोग टीवी के जरिए मुंबई में चल रहे पूरे आतंकी ऑपरेशन पर नजर रख रहे थे. इनमें अबू जिंदाल, जकी-उर-रहमान लखवी, अलकामा और काहफा समेत सात लोग शामिल बताए गए थे. ये लोग मुंबई में मौजूद आतंकियों को निर्देश देने और पूरे ऑपरेशन की निगरानी से जुड़े थे. हमले के दौरान आतंकियों और कंट्रोल रूम के बीच संपर्क भी जांच का एक अहम हिस्सा रहा.

30 नवंबर 2008 को कराची के कंट्रोल रूम में मौजूद सभी सात लोग मुजफ्फराबाद स्थित बैतुल मुजाहिदीन पहुंचे थे. वहां उन्हें पता चला कि भारतीय सुरक्षा बलों ने आतंकी अजमल कसाब को जिंदा गिरफ्तार कर लिया है. बताया जाता है कि आतंकियों को उम्मीद थी कि कसाब के साथ मौजूद आतंकी इस्माइल को भी जिंदा पकड़ा गया होगा, लेकिन बाद में उसे सुरक्षा बलों ने मार गिराया था. कसाब की गिरफ्तारी ने जांच एजेंसियों को 26/11 की साजिश और उसके पीछे मौजूद नेटवर्क तक पहुंचने में अहम सुराग दिए.

अब करीब 18 साल पुराने इस मामले में पाकिस्तान में मौजूद छह आरोपियों के खिलाफ भारतीय अदालत में गैर-मौजूदगी में ट्रायल शुरू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. 21 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर अदालत यह तय करेगी कि इन आरोपियों के खिलाफ इन एब्सेंशिया ट्रायल शुरू किया जाए या नहीं. अगर अदालत इसकी अनुमति देती है, तो 26/11 मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई में यह एक बड़ा कदम माना जाएगा.

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आपको यह भी बता दें कि अबू जुंदाल यानी सैयद जबीउद्दीन अंसारी के खिलाफ 26/11 मामले में अलग से ट्रायल चल रहा है. लेकिन जिसमें एक महत्वपूर्ण अपडेट है, यह ट्रायल करीब सात साल तक रुका रहा था और नवंबर 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हुआ.

अबू जुंदाल पर क्या हैं आरोप?

मुंबई पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक अबू जुंदाल 26/11 हमले के दौरान कराची में मौजूद कंट्रोल रूम से आतंकियों को हैंडल करने वालों में शामिल था. उस पर आरोप है कि उसने पाकिस्तान में ट्रेनिंग ले रहे आतंकियों को हिंदी और स्थानीय तौर-तरीके सिखाए थे, ताकि वे मुंबई पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों से बातचीत कर सकें. पुलिस के मुताबिक वह हमले के दौरान आतंकियों के साथ संपर्क में था और उन्हें निर्देश देने वाले लोगों में शामिल था.

क्यों रुका था ट्रायल?

जुंदाल के खिलाफ ट्रायल में 2018 में एक अहम मोड़ आया था. उसके वकील ने यह दावा करते हुए कुछ यात्रा और इमिग्रेशन दस्तावेज मांगे थे कि उसे सऊदी अरब से गिरफ्तार करके भारत लाया गया था, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना था कि उसे भारत आने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट के बाहर गिरफ्तार किया गया था. ट्रायल कोर्ट ने संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का आदेश दिया. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और कहा कि ये दस्तावेज संवेदनशील और विशेषाधिकार प्राप्त हैं. हाईकोर्ट ने अप्रैल 2018 में ट्रायल पर रोक लगा दी थी.

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नवंबर 2025 में क्या हुआ था?

3 नवंबर 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के 2018 के आदेश को रद्द कर दिया था. जस्टिस आरएन लड्ढा की एकल पीठ ने कहा कि जुंदाल को कुछ गोपनीय यात्रा दस्तावेज उपलब्ध कराने का आदेश उचित नहीं था. हाईकोर्ट ने माना कि इन दस्तावेजों की मांग उसकी गिरफ्तारी की परिस्थितियों से जुड़ी थी और इससे 26/11 मामले में उसकी भूमिका की सुनवाई को रोके रखना उचित नहीं था. इस फैसले के बाद करीब सात साल से रुका ट्रायल फिर आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ.

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