भारत और रूस के बीच मजूबत दोस्ती का एक और सबूत दुनिया के सामने है. जुलाई में रूस से कच्चे तेल का आयात रोजाना 28 लाख बैरल के ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जिससे भारत के कुल क्रूड ऑयल इंपोर्ट में अकेले रूस की हिस्सेदारी बढ़कर 55.5% से ज्यादा हो गई. LPG के मामले में अमेरिका का दबदबा दिख रहा है, जिससे कुल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 73% हो गई है. खाड़ी देशों से भी भारत ने क्रूड की खरीद बढ़ाई है, जिससे सऊदी अरब और इराक से आयात में भारी तेजी आई है. रिफाइनरियों पर ड्रोन हमलों के बाद रूस के पास सरप्लस क्रूड बढ़ गया है, जो भारत के लिए सबसे भरोसेमंद सप्लायर बन गया है.
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों के बीच भारत और रूस के व्यापारिक रिश्ते एक नया इतिहास रच रहे हैं. सस्ते तेल का फायदा उठाते हुए भारत ने जुलाई में रूस से कच्चे तेल की रिकॉर्ड खरीदारी की है. शिप-ट्रैकिंग डेटा संस्था केप्लर (Kpler) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कुल क्रूड इंपोर्ट में अकेले रूस का कब्जा आधे से ज्यादा हो गया है. वहीं दूसरी तरफ रसोई गैस (LPG) की सप्लाई के मामले में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा पार्टनर बनकर उभरा है. केप्लर (Kpler) के शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक भारत ने जुलाई में कुल मिलाकर 50 लाख बैरल से थोड़ा ज्यादा कच्चे तेल का आयात किया, जो जून के मुकाबले थोड़ा ज्यादा था.
रूस से रिकॉर्ड तेल आयात!
आंकड़ों पर नजर डालें तो जून में भारत ने रूस से रोजाना 27 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था, जो जुलाई में बढ़कर रोजाना 28 लाख बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इसके साथ ही भारत के कुल तेल आयात में रूसी क्रूड की हिस्सेदारी उछलकर 55.5 फीसदी हो गई है. रूस से इतनी भारी मात्रा में सप्लाई की मुख्य वजह रूसी कार्गो की लगातार उपलब्धता है. दरअसल, रूस के घरेलू रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए ड्रोन हमलों के बाद वहां की घरेलू रिफाइनिंग गतिविधियां कम हुई हैं, जिससे एक्सपोर्ट (निर्यात) के लिए रूस के पास ज्यादा कच्चा तेल उपलब्ध हो गया है.
LPG सप्लाई में अमेरिका का दबदबा!
कच्चे तेल के अलावा भारत में गैस की जरूरतें पूरी करने में अमेरिका की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण हो गई है. जुलाई में भारत ने कुल 12 लाख टन से ज्यादा LPG का आयात किया. इसमें से अकेले अमेरिका से ही 9 लाख टन LPG का आयात किया गया जिससे भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका से आने वाली सप्लाई की लगभग 73% हिस्सेदारी हो गई है.
खाड़ी देशों से भी बढ़ी खरीद
जुलाई के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल की आवाजाही कुछ समय के लिए सामान्य होने पर भारतीय कंपनियों ने खाड़ी (पश्चिम एशियाई) देशों से भी खरीदारी फिर शुरू कर दी थी. इसके असर से सऊदी अरब से जून के 2.9 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले जुलाई में आयात बढ़कर 4.2 लाख बैरल हो गया. वहीं इराक से क्रूड की सप्लाई जून के 67,100 बैरल की तुलना में जुलाई में लगभग दोगुनी होकर 1.3 लाख बैरल पहुंच गई. उधर कुवैत से भी क्रूड का आयात दोबारा शुरू हुआ, जहां से जुलाई में रोजाना 51,600 बैरल तेल की सप्लाई दर्ज हुई. UAE से आयात जून के 5.1 लाख बैरल से घटकर जुलाई में 4.6 लाख बैरल रह गया, लेकिन यह अभी भी भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा सोर्स बना हुआ है.
रूस बना 'संकटमोचक'!
केप्लर (Kpler) की रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले होर्मुज और अब बाब अल-मंडेब (Bab al-Mandab) समुद्री मार्ग में जारी भू-राजनीतिक दिक्कतों के चलते रूसी कच्चे तेल की सप्लाई भारत के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प साबित हुई है. इस बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 फीसदी की बड़ी गिरावट देखी गई है, जिसके बाद ब्रेंट क्रूड टूटकर $83.53 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है.
आदित्य के. राणा