Stock Market Crash: शेयर बाजार में दहशत, सेंसेक्स 1233 अंक गिरा... अरबों रुपये स्वाहा

कारोबार के दौरान Sensex भारी गिरावट के साथ 73,595.21 के स्तर के पास फिसल गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का Nifty फिसलकर 23050 से नीचे पहुंच गई.

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अचानक भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट. (Photo: ITG) अचानक भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:26 PM IST

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में अचानक आई चौतरफा बिकवाली ने निवेशकों के बीच हड़कंप मचा दिया है, दोपहर दो बजे सेंसेक्स 1,200 से ज्यादा अंक टूट गया, निफ्टी में तगड़ी 390 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. 
 
कारोबार के दौरान Sensex भारी गिरावट के साथ 73,595.21 के स्तर के पास फिसल गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का Nifty फिसलकर 23050 से नीचे पहुंच गई. इस गिरावट से महज कुछ ही घंटों में निवेशकों के अरबों रुपये स्वाहा हो गए.

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अमेरिकी बाजार से मिले थे कमजोर संकेत   
भारतीय बाजार में मची इस तबाही का संकेत एक दिन पहले यानी बुधवार को ही अमेरिकी शेयर बाजारों में देखने को मिल चुका था. बुधवार को अमेरिकी मार्केट में डाउ जोंस और नैस्डैक लाल निशान में बंद हुए थे. मुख्यतौर पर गिरावट के चार कारण हैं. 

IRDAI के प्रस्ताव से इंश्योरेंस व फाइनेंशियल शेयर पस्त: बीमा नियामक IRDAI द्वारा इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन पर कैप लगाने के प्रस्ताव से फिनटेक और इंश्योरेंस कंपनियों में भारी गिरावट आई. पॉलिसीबाजार (PB Fintech) 20% तक टूटा, जबकि एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और बजाज फाइनेंस जैसे हैवीवेट शेयर भी 2% से 5% तक गिर गए.

बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड उछलकर 5.11% के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो कि 19 साल में सबसे ज्यादा है. इससे यह डर गहरा गया कि यूएस फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को उम्मीद से अधिक समय तक ऊंचा रख सकता है. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी बाजार से पैसा निकालकर अमेरिकी कर्ज बाजार में लगाना शुरू कर दिया. 

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कच्चे तेल में तेजी: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल $102 प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंता फिर बढ़ गई. भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा क्रूड ऑयल आयात करता है. कच्चे तेल का $102 के पार जाना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई और चालू खाते के घाटे (CAD) का जोखिम बढ़ाता है.

वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत: बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में टेक शेयरों में हुई भारी बिकवाली और एशियाई बाजारों के सुस्त कारोबार ने भी भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स पर दबाव बनाया. 

गौरतलब है कि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें शांत नहीं होतीं और यूएस बॉन्ड यील्ड में गिरावट नहीं आती, तब तक भारतीय बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी. रिटेल निवेशकों को इस गिरावट में जल्दबाजी में पैनिक सेलिंग करने के बजाय सतर्क रुख अपनाने की सलाह दी जा रही है. 
 

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