भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई है. महंगाई में हालिया तेजी के बाद बाजार और अर्थशास्त्रियों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या केंद्रीय बैंक करीब चार साल बाद फिर से ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला करेगा. अगर ऐसा होता है तो फरवरी 2023 के बाद यह पहली रेपो रेट (Repo Rate) बढ़ोतरी होगी. बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक चलेगी और इसके नतीजे 7 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे. इस बार चर्चा का केंद्र महंगाई है, जो RBI के 4 फीसदी लक्ष्य से लगातार ऊपर बनी हुई है.
Reuters के सर्वे में शामिल करीब 60 फीसदी अर्थशास्त्रियों ने अक्टूबर की बैठक में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है. अगर RBI ऐसा करता है तो रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो जाएगी. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बढ़ती महंगाई और ऊंचे कच्चे तेल के दाम RBI को सख्त रुख अपनाने के लिए मजबूर कर सकते हैं.
महंगाई क्यों बनी चिंता?
अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.82 फीसदी रही. ये लगातार तीसरा महीना था जब महंगाई RBI के 4 फीसदी लक्ष्य से ऊपर रही. खाद्य वस्तुओं और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के अलावा ये चिंता भी बढ़ी है कि महंगाई का दबाव अब अर्थव्यवस्था के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है. यही वजह है कि बाजार में ब्याज दरें बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है.
अलग-अलग संस्थानों का क्या अनुमान?
जापानी ब्रोकरेज Nomura का अनुमान है कि RBI अक्टूबर और दिसंबर दोनों बैठकों में 25-25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है. इससे साल के आखिर तक रेपो रेट 5.75 फीसदी तक पहुंच सकती है.
वहीं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक FY27 के दौरान रेपो रेट 6 फीसदी तक पहुंच सकती है. रिपोर्ट में महंगाई और वैश्विक कमोडिटी कीमतों को प्रमुख जोखिम बताया गया है.
उधर बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) का अनुमान सबसे आक्रामक माना जा रहा है. उसके मुताबिक अक्टूबर से शुरू होने वाले साइकिल में 2027 की पहली छमाही तक कुल 100 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे रेपो रेट 6.25 फीसदी तक पहुंचने की संभावना है. इसी तरह मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) का भी मानना है कि आने वाले महीनों में RBI को महंगाई से निपटने के लिए कई फेज में ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं. ब्रोकरेज ने कुल 100 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ोतरी की संभावना जताई है.
आपकी EMI पर कितना असर पड़ सकता है?
रेपो रेट बढ़ने का सबसे ज्यादा असर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और दूसरे रिटेल कर्ज पर पड़ता है. उदाहरण के तौर पर अगर किसी ग्राहक ने 20 साल के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है और उसकी ब्याज दर 8.50 फीसदी से बढ़कर 8.75 फीसदी हो जाती है, तो उसकी EMI करीब 43,400 रुपये से बढ़कर 44,200 रुपये तक पहुंच सकती है यानी हर महीने लगभग 800 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है.
अगर आने वाले समय में कुल 100 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी होती है और ब्याज दर 9.50 फीसदी तक पहुंचती है, तो ऐसी स्थिति में EMI करीब 3,200 रुपये प्रति माह तक बढ़ सकती है. हालांकि वास्तविक असर बैंक, लोन की अवधि, ब्याज दर के रीसेट साइकिल और ग्राहक के लोन एग्रीमेंट पर निर्भर करेगा.
FD निवेशकों को मिल सकता है फायदा
ब्याज दरें बढ़ने का असर केवल कर्ज लेने वालों पर नहीं पड़ता. आमतौर पर रेट बढ़ने के बाद बैंक जमा पर भी ज्यादा ब्याज देने लगते हैं. ऐसे में FD और दूसरे फिक्सड इनकम निवेश विकल्पों पर रिटर्न बेहतर हो सकता है. फिलहाल सबकी नजर 7 अक्टूबर को आने वाले RBI के फैसले पर है. अगर केंद्रीय बैंक ब्याज दर बढ़ाता है तो करीब चार साल बाद भारत में महंगे कर्ज का नया दौर शुरू हो सकता है, जिसका असर EMI से लेकर बचत तक पर दिखाई देगा.
आजतक बिजनेस डेस्क