इन हैंड सैलरी हर महीने कुछ हजार रुपये कम मिलती है, लेकिन क्या वाकई आपकी जेब को उतना नुकसान होता है? अगर आपकी सैलरी से PF के नाम पर पैसा कट रहा है तो इसे सिर्फ इनहैंड सैलरी में कमी समझना सही नहीं है. PF जैसे फायदे आपको किसी FD, RD या SIP में नहीं मिलेंगे. दरअसल, आपकी इस छोटी सी कटौती के साथ कंपनी भी अपनी तरफ से पैसा जोड़ती है. इसके ऊपर ब्याज मिलता है और जरूरत पड़ने पर इस रकम का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. यानी PF सिर्फ रिटायरमेंट के लिए जमा होने वाला पैसा नहीं, बल्कि नौकरीपेशा लोगों के लिए एक लंबी अवधि की मजबूत फाइनेंशियल सिक्योरिटी है.
इनहैंड सैलरी कम, लेकिन वेल्थ ज्यादा
नौकरीपेशा लोगों के लिए अक्सर PF की सबसे पहली तस्वीर यही होती है कि सैलरी हाथ में कम आ रही है. लेकिन दूसरी तस्वीर इससे बिल्कुल अलग है. आपकी सैलरी से कटने वाली रकम आपके ही PF खाते में जमा होती है और कंपनी भी इसमें योगदान करती है. यानी इसे महज खर्च या कटौती मानने के बजाय एक ऐसी सेविंग के तौर पर देखा जा सकता है, जो आपकी जानकारी के बिना नियमित रूप से बनती रहती है. खास बात यह है कि इसमें लंबे समय तक कंपाउंडिंग का फायदा भी मिलता है.
₹3,600 कटे तो कंपनी जोड़ेगी ₹3,600
मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी ₹30,000 है. इसका 12% यानी ₹3,600 हर महीने कर्मचारी के PF में जाता है. कंपनी भी अपने हिस्से से 12% यानी ₹3,600 का योगदान करती है. हालांकि कंपनी के इस 12% का पूरा हिस्सा EPF में नहीं जाता. इसमें से 8.33% हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS में जाता है और बाकी हिस्सा EPF में जमा होता है. हालांकि, कुछ कंपनियां अपने हिस्से का पीएफ कंट्रीब्यूशन भी कर्मचारी की सैलरी से ही काटती हैं.
कई कर्मचारियों को लगता है कि कंपनी के योगदान में से EPS यानी पेंशन के लिए जाने वाला 8.33% हिस्सा भी उनकी सैलरी से काटा जाता है. ऐसा नहीं है. कंपनी के योगदान का एक हिस्सा EPS में जाता है. नियमों के मुताबिक कंपनी अपने हिस्से का योगदान कर्मचारी की सैलरी से अलग से नहीं काट सकती. अगर किसी कर्मचारी को ऐसा लगता है कि उसके वेतन से गलत तरीके से अतिरिक्त PF या पेंशन योगदान काटा जा रहा है, तो उसे अपनी सैलरी स्लिप और PF रिकॉर्ड जरूर जांचना चाहिए.
इस तरह हर महीने आपके नाम पर आपके कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के खाते में कुल ₹7,200 तक का योगदान बनता है. अगर 30 साल तक बेसिक सैलरी में कोई बढ़ोतरी न मानें, तो सिर्फ मूल योगदान करीब ₹25.92 लाख बैठता है. इसमें PF पर मिलने वाला ब्याज शामिल नहीं है. यानी लंबी अवधि में छोटी-छोटी मासिक कटौती एक बड़ी रकम में बदल सकती है.
PF पर ब्याज अच्छा और टैक्स में फायदा
EPF में जमा रकम पर हर साल ब्याज मिलता है. तय नियमों के तहत PF की ब्याज आय को टैक्स के लिहाज से भी फायदा मिलता है. वहीं, पुरानी टैक्स व्यवस्था में पात्र कर्मचारी धारा 80C के तहत अपने कर्मचारी योगदान पर कुल ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं. इसलिए PF सिर्फ पैसा जमा करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह टैक्स बचत और लंबी अवधि की संपत्ति बनाने में भी मदद कर सकता है.
PF के साथ परिवार को मिलती है सुरक्षा
PF की खासियत सिर्फ सेविंग और पेंशन तक सीमित नहीं है. कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़े सदस्यों को एम्प्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस यानी EDLI के तहत पात्रता के अनुसार ₹7 लाख तक का बीमा कवर भी मिल सकता है. कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में परिवार को नियमों के तहत EDLI और EPS जैसी योजनाओं से लाभ मिल सकता है. यानी PF से जुड़ी व्यवस्था कर्मचारी के साथ-साथ उसके परिवार के लिए भी आर्थिक सुरक्षा का एक हिस्सा बनती है. इसके अलावा EPF कानून में PF की रकम को लेकर कानूनी सुरक्षा भी दी गई है. EPF Act की धारा 10 के तहत सामान्य परिस्थितियों में PF की रकम को कर्ज या देनदारी की वसूली के लिए जब्त किए जाने से सुरक्षा मिलती है.
जरूरत में PF से पैसा निकाल सकते हैं
PF को सिर्फ रिटायरमेंट तक लॉक रहने वाली रकम समझना भी सही नहीं है. नियमों और पात्रता के आधार पर कर्मचारी मकान, बच्चों की पढ़ाई, शादी और बीमारी जैसे खास जरूरतों के लिए PF से एडवांस निकाल सकते हैं. नौकरी छूटने की स्थिति में भी कुछ शर्तों के साथ PF निकासी की सुविधा मिलती है. बेरोजगारी की स्थिति में निर्धारित नियमों के अनुसार रकम निकाली जा सकती है.
नौकरी बदली तो PF का पैसा नहीं खोता
प्राइवेट नौकरी में बार-बार नौकरी बदलना आज आम बात है. ऐसे में PF का पैसा भी खत्म नहीं होता. UAN यानी यूनिवर्सल अकाउंट नंबर नौकरी बदलने के बाद भी वही रहता है और पुराने PF खाते की रकम नए नियोक्ता के खाते में ट्रांसफर की जा सकती है. नौकरी के बीच कुछ समय का गैप आने पर भी पात्र PF बैलेंस पर ब्याज जारी रहने का फायदा मिल सकता है. इसलिए नौकरी बदलते समय PF ट्रांसफर और UAN से जुड़ी जानकारी को अपडेट रखना जरूरी है.
PF को सैलरी कटौती नहीं, बचत समझिए
अगर आपकी सैलरी से PF कटता है तो हर महीने हाथ में आने वाली रकम थोड़ी कम जरूर दिखती है, लेकिन बदले में आपके नाम पर एक ऐसी बचत बन रही होती है जिसमें कर्मचारी के साथ कंपनी भी योगदान करती है. इस रकम पर ब्याज मिलता है, पेंशन का हिस्सा बनता है, बीमा सुरक्षा मिलती है और कुछ खास जरूरतों में निकासी की सुविधा भी रहती है.
यही वजह है कि PF को सिर्फ 'सैलरी से कटने वाला पैसा' मानना अधूरा नजरिया है. इसे एक ऐसी लंबी अवधि की निवेश और सुरक्षा व्यवस्था के तौर पर देखना ज्यादा सही है, जो नौकरी के दौरान धीरे-धीरे आपकी फाइनेंशियल बैकअप तैयार करती है. इसलिए हर कर्मचारी को अपने UAN, PF बैलेंस, कर्मचारी योगदान और कंपनी के योगदान की नियमित जांच करनी चाहिए.
आजतक बिजनेस डेस्क