सोचिए, घर की छत आपकी है और उसी छत से बिजली भी बन रही है. बिजली का बिल घटकर 0 तक पहुंच सकता है और जरूरत से ज्यादा बिजली बने तो उससे कमाई का रास्ता भी खुल सकता है. हम बात कर रहे हैं, दिल्ली सरकार की रूफटॉप सोलर स्कीम की. सबसे खास बात यह है कि रूफटॉप सोलर लगवाने के लिए पात्र उपभोक्ताओं को अपनी जेब से कोई खर्च नहीं करना होगा.
दिल्ली सरकार की इस योजना में 3 किलोवाट तक के सोलर सिस्टम को बिल्कुल मुफ्त इंस्टॉल किया जाएगा. यानी आपके पास छत होनी चाहिए, बाकी प्रक्रिया सर्वे और पात्रता के आधार पर आगे बढ़ेगी. दिल्ली सरकार के सोलर पोर्टल पर इस योजना के लिए 21 सितंबर 2026 से आवेदन की सुविधा शुरू हो गई है. सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक करीब 2.30 लाख घरों को रूफटॉप सोलर से जोड़ना और कुल 500 मेगावाट क्षमता तैयार करना है.
किन घरों को मिलेगा फायदा?
इस योजना का फायदा पात्र घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा. आपके घर की छत पर सोलर सिस्टम लगाया जा सकता है या नहीं, यह उसकी तकनीकी स्थिति, उपलब्ध जगह और लोड-बेयरिंग क्षमता जैसी चीजों की जांच के बाद तय होगा. दिल्ली सरकार की इस योजना की सबसे प्रमुख शर्तों में एक है- रूफटॉप सोलर के लिए उपभोक्ता की छत में पर्याप्त भार सहने की क्षमता होना जरूरी है.
दूसरी जरूरी शर्त ये है कि आपकी मासिक बिजली खपत 400 यूनिट से अधिक नहीं होनी चाहिए. दिल्ली सरकार के सोलर पोर्टल के मुताबिक, 150 यूनिट तक की औसत खपत वाले घरों के लिए 1-2 kW और 150-300 यूनिट की खपत के लिए 2-3 kW का सिस्टम उपयुक्त माना गया है. 300 यूनिट से ज्यादा खपत वाले घरों के लिए 3 kW से ज्यादा क्षमता का सिस्टम भी उपयुक्त हो सकता है.
बिजली खपत तय करेगी एलिजिबिलिटी
दिल्ली की सोलर पॉलिसी में ऐसे मॉडल का प्रावधान है, जिसमें उपभोक्ता बिना शुरुआती पूंजी लगाए रूफटॉप सोलर अपना सकते हैं. इसे RESCO/Hybrid RESCO मॉडल के जरिए लागू किया जाता है. इसमें सोलर डेवलपर सिस्टम लगाने की लागत वहन करता है और उपभोक्ता को नेट मीटरिंग का फायदा मिलता है. यानी जिन परिवारों के पास अपनी छत तो है, लेकिन सोलर पैनल लगवाने के लिए शुरुआत में पैसा खर्च करने की क्षमता नहीं है, उनके लिए यह मॉडल खास तौर पर उपयोगी हो सकता है.
सोलर से बिजली बिल कैसे जीरो होगा?
रूफटॉप सोलर से घर में इस्तेमाल होने वाली बिजली का एक हिस्सा उपभोक्ता की छत पर ही पैदा हो जाता है. इससे ग्रिड से ली जाने वाली बिजली की खपत कम होती है और बिल घट जाता है. दिल्ली सरकार के सोलर पोर्टल के मुताबिक, रूफटॉप सोलर किसी घर की बिजली खपत को 200 यूनिट से कम तक ला सकता है, जिससे उपभोक्ता 0 बिजली बिल का फायदा उठा सकते हैं.
हालांकि यह हर घर में अपने-आप नहीं होगा. वास्तविक बचत आपके बिजली इस्तेमाल, सोलर सिस्टम की क्षमता और उसकी वास्तविक उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली में 200 यूनिट तक बिजली बिल्कुल मुफ्त है. 200 से 400 यूनिट तक बिजली खपत पर हाफ चार्ज लगता है. इसके ऊपर अगर आप बिजली इस्तेमाल करते हैं तो मौजूदा रेट के हिसाब से पूरा बिल चुकाना होगा.
अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी करें
मान लीजिए आपके घर में सोलर सिस्टम ने आपकी जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा कर दी. ऐसी अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने की व्यवस्था है. दिल्ली सरकार की सोलर पॉलिसी में नेट मीटरिंग के साथ जनरेशन-बेस्ड इंसेंटिव का भी प्रावधान है. दिल्ली सोलर पोर्टल के मुताबिक, 3 किलोवाट तक के सोलर सिस्टम के लिए ₹3 प्रति यूनिट का जनरेशन-बेस्ड इंसेंटिव उपलब्ध है. 3 किलोवाट से ज्यादा और 10 किलोवाट तक के सोलर सिस्टम के लिए यह ₹2 प्रति यूनिट है. इसलिए सोलर का फायदा सिर्फ बिजली का बिल घटाने तक सीमित नहीं है. सिस्टम की क्षमता और योजना की शर्तों के मुताबिक अतिरिक्त बिजली से आय का रास्ता भी बन सकता है.
3 kW से ज्यादा के सिस्टम पर सब्सिडी
अगर आप 3 kW से ज्यादा क्षमता का सोलर सिस्टम लगवाना चाहते हैं तो केंद्र की 'पीएम सूर्य घर योजना' के तहत भी सब्सिडी मिलती है. दिल्ली के आधिकारिक सोलर पोर्टल के मुताबिक, 2 kW तक ₹30,000 प्रति kW और अतिरिक्त 1 kW के लिए ₹18,000 प्रति kW की केंद्रीय सहायता है. इस तरह 3 kW से बड़े सिस्टम के लिए केंद्रीय सब्सिडी अधिकतम ₹78,000 तक सीमित है. इसके अलावा दिल्ली सरकार की राज्य सब्सिडी भी पात्रता के मुताबिक उपलब्ध है. इसलिए 3 kW से ज्यादा सिस्टम में कुल लाभ सिर्फ एक ही सब्सिडी पर निर्भर नहीं करता, बल्कि केंद्र और दिल्ली सरकार की लागू सहायता को मिलाकर देखा जाता है.
रूफटॉप सोलर के लिए ऐसे करें अप्लाई
दिल्ली में रूफटॉप सोलर के लिए आवेदन आधिकारिक Delhi Solar Portal के जरिए किया जा सकता है. पोर्टल पर 21 सितंबर 2026 से आवेदन सुविधा उपलब्ध कराई गई है. आवेदन के बाद टेक्निकल टीम यह जांच करेगी कि आपकी छत सोलर सिस्टम लगाने के लिए उपयुक्त है या नहीं. पोर्टल के मुताबिक, सोलर सिस्टम की क्षमता तय करते समय छत का उपलब्ध शैडो-फ्री एरिया भी देखा जाता है.
करीब 1 kW सिस्टम के लिए लगभग 10 वर्ग मीटर जगह की जरूरत पड़ सकती है, हालांकि वास्तविक जरूरत छत की संरचना और सिस्टम डिजाइन पर निर्भर करेगी. दिल्ली सरकार रूफटॉप सोलर को बड़े स्तर पर बढ़ाना चाहती है. मार्च 2027 तक करीब 2.30 लाख घरों को इससे जोड़ने और कुल 500 मेगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. यानी आने वाले महीनों में दिल्ली में छतें सिर्फ घर का हिस्सा नहीं रहेंगी, बल्कि बिजली पैदा करने वाली छोटी यूनिट की तरह काम करेंगी.
आजतक बिजनेस डेस्क