शेयर बाजार में कमाई का नया मौका कब दस्तक देगा, इस पर निवेशकों की नजर हमेशा बनी रहती है. पिछले कुछ महीनों में आईपीओ (IPO) बाजार की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर पड़ी, लेकिन जुलाई आते-आते तस्वीर बदलती नजर आ रही है. दरअसल, कई दिग्गज कंपनियां IPO बाजार में उतरने की तैयारी पूरी कर चुकी हैं, जिससे प्राइमरी मार्केट में एक बार फिर बड़ी हलचल शुरू हो गई है.
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के डेटा और आनंद राठी रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई का महीना निवेशकों के लिए बंपर कमाई का मौका लेकर आ रहा है.
जुलाई में क्यों आएगी IPO की बाढ़?
बाजार के जानकारों का मानना है कि घरेलू मार्केट में बढ़ती स्थिरता और रिटेल निवेशकों के मजबूत भरोसे ने कंपनियों का उत्साह बढ़ाया है. यही वजह है कि देश के बड़े कॉरपोरेट्स अपनी लिस्टिंग की तैयारी में जुट गए हैं. इस लिस्ट में जो तीन सबसे बड़े नाम सुर्खियां बटोर रहे हैं उनमें शामिल हैं
-SBI Funds Management जो बाजार से करीब 12 से 13 हजार करोड़ रुपये जुटाने वाला मेगा आईपीओ लाने की तैयारी में है.
-वहीं हेल्थकेयर सेक्टर का बड़ा नाम Manipal Health Enterprises करीब 11 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है.
-और क्विक कॉमर्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी जेप्टो का आईपीओ करीब 8 हजार करोड़ रुपये का रहने का अनुमान है.
ये तीनों बड़ी कंपनियां मिलकर ही बाजार से करीब 32 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम जुटाने वाली हैं. इनके अलावा एक दर्जन से ज्यादा दूसरी कंपनियां भी कतार में हैं, जिससे कुल टारगेट 45 हजार करोड़ रुपये के पार जाता दिख रहा है.
बेहद मजबूत है सेबी की पाइपलाइन
भविष्य के लिहाज से भी प्राइमरी मार्केट का आउटलुक बेहद शानदार नजर आ रहा है. कंपनियों में पूंजी जुटाने की होड़ मची है, जिसे रेगुलेटर से भी हरी झंडी मिल रही है. 19 जून तक के आधिकारिक डेटा के मुताबिक, 173 कंपनियों को सेबी से आईपीओ लाने की मंजूरी मिल चुकी है. ये कंपनियां मिलकर बाजार से करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये जुटा सकती हैं. इसके अलावा 64 और कंपनियां अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में भी ये लहर थमने वाली नहीं है.
सुस्ती के बाद लौटेगी रौनक?
आईपीओ मार्केट के लिए 2026 की शुरुआत ज्यादा उत्साहजनक नहीं रही थी. वैश्विक तनाव, ईरान युद्ध के संकट और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की सतर्कता की वजह से नई लिस्टिंग्स पर ब्रेक लग गया था. अप्रैल के महीने तक देश में केवल 18 आईपीओ आए थे जबकि मई का तो पूरा महीना ही सूखा निकल गया और एक भी कंपनी बाजार में नहीं उतरी. लेकिन इन हालातों को बदलने के पीछे रिटेल इनवेस्टर्स का बड़ा हाथ है, जो बाजार को नई दिशा दे रहे हैं.
जानकारों के मुताबिक बाजार में आए इस बदलाव के बीच निवेशक कमजोर कंपनियों की जगह सॉलिड बैकग्राउंड वाली कंपनियों को चुन रहे हैं. जिन कंपनियों में भविष्य में आगे बढ़ने की क्षमता दिखाई दे रही है, उनमें लिक्विडिटी तेजी से बढ़ रही है. विदेशी फंड्स की सुस्ती के बावजूद घरेलू निवेशकों के पैसे के दम पर भारतीय बाजार में भरोसा लौट रहा है.
IPO मार्केट में तेजी जारी रहेगी
इन्वेस्टमेंट बैंकिंग सेक्टर से जुड़े जानकारों का कहना है कि ग्लोबल अनिश्चितता कम होने और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद की वजह से लिस्टिंग का यह सिलसिला आने वाले हफ्तों में और तेज होगा. जुलाई की ये नई लहर इस बात का साफ संकेत है कि प्राइमरी मार्केट अपनी पुरानी रफ्तार में लौट चुका है. बड़े इश्यू और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी आने वाले महीनों में पूरे शेयर बाजार की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाने जा रहे हैं.
आदित्य के. राणा