8th Pay Commission: सिर्फ सैलरी ही नहीं... 8वें वेतन आयोग से हैं ये 9 बड़ी मांगें, यहां देखें पूरी लिस्ट

Key Demands to 8th Pay Commission: कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने कई बड़ी मांगें रखी हैं. इनमें पुरानी पेंशन की बहाली, कैशलेस इलाज, बच्चों की पढ़ाई के लिए ज्यादा भत्ता, ग्रेच्युटी और फैमिली पेंशन में सुधार, MACP में बदलाव और जोखिम भत्ते जैसी मांगें शामिल हैं.

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  8वें वेतन आयोग से कर्मचारी और पेंशनर संगठनों की मुख्य मांगों में पुरानी पेंशन, मेडिकल सुविधाएं और रिस्क अलाउंस शामिल हैं. (Photo: ITG/@Gfx) 8वें वेतन आयोग से कर्मचारी और पेंशनर संगठनों की मुख्य मांगों में पुरानी पेंशन, मेडिकल सुविधाएं और रिस्क अलाउंस शामिल हैं. (Photo: ITG/@Gfx)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 06 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:14 AM IST

अगर आप केंद्र सरकार के कर्मचारी या पेंशनभोगी हैं, तो 8वें वेतन आयोग से जुड़ी यह खबर आपके लिए काफी अहम है. कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने आयोग के सामने अपनी मांगों का पूरा खाका रखा है. इसमें सिर्फ वेतन बढ़ाने की बात नहीं है, बल्कि पुरानी पेंशन, कैशलेस इलाज, बच्चों की पढ़ाई, प्रमोशन नहीं मिलने पर वेतन बढ़ोतरी, जोखिम भत्ते और पेंशन से जुड़े कई पुराने लाभों में सुधार की मांग भी शामिल है. इनका असर करीब 45 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ सकता है.

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इन मांगों को सरकार तक पहुंचाने में नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की अहम भूमिका है. यह सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत का एक मंच है. यहां कर्मचारियों से जुड़े वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा शर्तों जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है. इस काउंसिल की अध्यक्षता फिलहाल कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन कर रहे हैं.

सरकार ने करीब छह महीने पहले 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ाया था. इसके बाद से आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर संगठनों के साथ अलग-अलग शहरों में बैठकें कर रहा है. इन बैठकों में तमाम कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने आयोग के समक्ष अपनी मांगें और सुझाव रखे हैं. हालांकि इन मांगों पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. लेकिन अगर इनमें से बड़ी मांगें मान ली जाती हैं, तो कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों में बड़ा बदलाव हो सकता है.

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पुरानी पेंशन लागू करने की मांग

कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांगों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करना शामिल है. यह मांग खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए है, जो 2004 के बाद सरकारी सेवा में आए हैं और फिलहाल नए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आते हैं. NPS में कर्मचारी और सरकार की ओर से योगदान किया जाता है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इसके बजाय पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए, जिसमें रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन का प्रावधान था. यानी कर्मचारी पक्ष चाहता है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन को ज्यादा सुरक्षित और निश्चित बनाया जाए.

कैशलेस मेडिकल सुविधा की मांग

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए कैशलेस और आसान मेडिकल सुविधा की भी मांग की गई है. इसका मतलब है कि इलाज के लिए कर्मचारी या पेंशनर को पहले अपनी जेब से बड़ी रकम खर्च न करनी पड़े और इलाज के खर्च का भुगतान सीधे संबंधित व्यवस्था के जरिए हो. यह मांग खास तौर पर पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि रिटायरमेंट के बाद मेडिकल खर्च लगातार बढ़ सकता है. कर्मचारी संगठनों ने मेडिकल सुविधा को ज्यादा आसान और व्यापक बनाने की जरूरत बताई है.

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बच्चों की पढ़ाई पर राहत की मांग

कर्मचारी पक्ष ने बच्चों की पढ़ाई से जुड़े लाभों में भी बढ़ोतरी की मांग की है. शिक्षा भत्ता और हॉस्टल सब्सिडी को पोस्ट ग्रेजुएशन तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है. यानी अभी जिन स्तरों तक ये सुविधाएं मिलती हैं, उनका दायरा आगे बढ़ाकर उच्च शिक्षा तक करने की मांग है. इससे उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जिनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च लंबे समय तक चलता है.

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ग्रेच्युटी, फैमिली पेंशन में हो सुधार

कर्मचारी संगठनों ने डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी, फैमिली पेंशन और पेंशन के कम्युटेड हिस्से से जुड़े लाभों में भी सुधार की मांग की है. पेंशन का कम्युटेड हिस्सा वह रकम है, जिसे पेंशनर एकमुश्त ले सकता है और इसके बदले उसकी मासिक पेंशन कुछ कम हो जाती है. कर्मचारी पक्ष चाहता है कि इस कम हुए हिस्से को 12 साल बाद फिर से बहाल करने के पुराने प्रावधान को बेहतर तरीके से लागू किया जाए.

न्यूनतम वेतन तय करने का फॉर्मूला बदले

8वें वेतन आयोग से कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतन तय करने के तरीके में भी बदलाव की मांग की है. कर्मचारी प्रतिनिधियों ने परिवार के खर्च का आधार तय करने वाले मापदंड को 3 से बढ़ाकर 3.6 यूनिट करने का सुझाव दिया है. सरल भाषा में समझें तो न्यूनतम वेतन तय करते समय परिवार की जरूरतों और खर्च को ज्यादा महत्व देने की बात कही गई है. इसका सीधा असर शुरुआती वेतन के स्तर पर पड़ सकता है. यह सुझाव श्रम मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर आधारित बताया गया है.

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प्रमोशन नहीं मिला तो MACP में हो सुधार

कई कर्मचारियों को लंबे समय तक प्रमोशन नहीं मिल पाता. ऐसे कर्मचारियों के लिए मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम (MACPS) के तहत तय समय पर वित्तीय बढ़ोतरी का प्रावधान है. कर्मचारी संगठनों ने इस योजना में मौजूद विसंगतियों को दूर करने की मांग की है. इसके अलावा वेतन के मौजूदा स्तरों में भी बदलाव का सुझाव दिया गया है. कर्मचारी पक्ष का कहना है कि जिन वेतन स्तरों का मौजूदा काम और जिम्मेदारी के हिसाब से सही तालमेल नहीं है, उन्हें मिलाकर ज्यादा बेहतर वेतन ढांचा तैयार किया जाए.

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रेलवे कर्मचारियों को जोखिम-कठिनाई भत्ता

रेलवे से जुड़े कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष रेलवे कर्मियों के लिए जोखिम और कठिनाई भत्ता देने की मांग उठाई है. रेलवे कर्मचारियों के काम में कई बार जोखिम और कठिन परिस्थितियां शामिल होती हैं. कर्मचारी पक्ष चाहता है कि इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग से भत्ता तय किया जाए.

डिफेंस सिविलियन कर्मियों के लिए खास भत्ता

डिफेंस से जुड़े सिविलियन कर्मचारियों के लिए भी विशेष मांग रखी गई है. जो कर्मचारी हथियार, बारूद, कैमिकल्स या विस्फोटक बनाने, संभालने या स्टोर करने जैसे जोखिम वाले काम में लगे हैं, उनके लिए विशेष जोखिम भत्ता और इंश्योरेंस कवर की मांग की गई है. यानी ऐसे कर्मचारियों को उनके काम से जुड़े अतिरिक्त जोखिम के बदले आर्थिक सुरक्षा देने की मांग है.

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8वें वेतन आयोग का दायरा बढ़ाने की है मांग

कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग का दायरा बढ़ाने की भी मांग की है. उनका कहना है कि इसका लाभ सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. ग्रामीण डाक सेवक (GDS), अर्धसैनिक बलों और केंद्रीय स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों को भी इसके दायरे में शामिल करने का सुझाव दिया गया है. कर्मचारी पक्ष का कहना है कि 7वें वेतन आयोग में इन वर्गों को शामिल नहीं किया गया था, इसलिए इस बार दायरा बढ़ाया जाना चाहिए.

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अभी क्या हुआ है और आगे क्या होगा?

फिलहाल कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने अपनी मांगें और सुझाव सरकार के सामने रखे हैं. इनका मतलब यह नहीं है कि सभी मांगें मंजूर हो गई हैं. 7वें वेतन आयोग को लागू करने में केंद्र सरकार पर 2016-17 में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त खर्च आया था. ऐसे में 8वें वेतन आयोग में अगर पुरानी पेंशन, मेडिकल सुविधा, शिक्षा भत्ता, जोखिम भत्ता, वेतन ढांचे और दूसरे लाभों से जुड़ी बड़ी मांगों को मंजूरी मिलती है, तो सरकार के खर्च में भी बड़ा इजाफा हो सकता है.

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कर्मचारी और पेंशनर संगठनों से मिले सुझावों और उनकी मांगों की समीक्षा कार्मिक विभाग (DoPT) और वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से की जाएगी. इसके बाद अंतिम प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जाएगा. 8वें वेतन आयोग की शर्तों यानी Terms of Reference को तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और अलग-अलग मंत्रालयों, राज्य सरकारों से भी राय ली जा रही है. देखना होगा कि किन मांगों को आयोग की प्रक्रिया में जगह मिलती है.

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