भारत में सार्वजनिक जगहों को साफ रखने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाने को लेकर 'सिविक सेंस' की कमी अक्सर चर्चा में रहती है. रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में भी इसका असर साफ दिखाई देता है. लोग कई बार चलती ट्रेन से कचरा बाहर फेंक देते हैं, प्लेटफॉर्म पर खाने-पीने का सामान छोड़ देते हैं या सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचाते हैं. (Photo: Pixels)
स्टेशन परिसर के भवनों, दीवारों और कोच पर लिखना, थूकना और जहां-तहां गंदगी फैलाना जैसी आदतें न सिर्फ रेलवे की साफ-सफाई पर असर डालती हैं, बल्कि करोड़ों रुपये से तैयार सार्वजनिक संपत्ति की हालत भी खराब करती हैं. अब रेलवे ने ऐसी हरकतों पर शिकंजा कसने के लिए जुर्माने की रकम बढ़ा दी है. रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म या ट्रेन के अंदर कचरा फेंकना अब सीधे ₹1,000 तक भारी पड़ सकता है. (Photo: Pixels)
इतना ही नहीं, अगर मौके पर जुर्माने की रकम नहीं चुकाई गई, तो मामला कोर्ट तक जा सकता है और वहां ₹2,000 तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है. रेल मंत्रालय ने 24 अगस्त को इस संबंध में राजपत्र अधिसूचना जारी की है. रेलवे ने साफ-सफाई से जुड़े 2012 के नियमों में संशोधन किया है. इसके तहत पहले लागू अधिकतम ₹500 के जुर्माने को बढ़ाकर अब ₹1,000 कर दिया गया है. (Photo: Pixels)
संशोधित नियमों में रेलवे परिसरों में साफ-सफाई बनाए रखने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने से जुड़े कई प्रावधान शामिल हैं. नए नियमों के मुताबिक रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म या ट्रेन के कोच के अंदर कचरा फेंकना या तय जगह के अलावा कहीं कचरा छोड़ना दंडनीय होगा. यानी यात्री या रेलवे परिसर में मौजूद कोई अन्य व्यक्ति अगर जानबूझकर गंदगी फैलाता है, तो उस पर ₹1,000 तक की पेनल्टी लगाई जा सकती है. (Photo: Pixels)
इसके अलावा रेलवे परिसर में खाना बनाना, नहाना, थूकना, पेशाब करना और शौच करना भी प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल है. जानवरों या पक्षियों को खाना खिलाना, गाड़ी, बर्तन या कपड़े धोना और रेलवे परिसर में सामान रखना भी नियमों के खिलाफ है. रेलवे की संपत्ति को खराब करने वाली गतिविधियों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है. बिना अनुमति ट्रेन के कोच या रेलवे की किसी संपत्ति पर पोस्टर लगाना, संदेश लिखना या चित्र बनाना प्रतिबंधित है. ऐसी गतिविधियां रेलवे की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाती हैं और इनके खिलाफ भी जुर्माना लगाया जा सकता है और सजा तक का भी प्रावधान है. (Photo: Pixels)
संशोधित नियमों में अधिकृत वेंडर और हॉकर की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं. उन्हें स्टेशन पर पर्याप्त डस्टबिन या कचरा कंटेनर उपलब्ध कराने और जमा हुए कचरे के उचित निपटारे की व्यवस्था करनी होगी. नियमों के तहत पेनल्टी वसूलने का अधिकार स्टेशन मास्टर या स्टेशन मैनेजर, कमर्शियल विभाग के टिकट कलेक्टर, ऑपरेटिंग विभाग के समान रैंक के अधिकारी और रेलवे प्राधिकरण की ओर से अधिकृत अधिकारियों को दिया गया है. अगर कोई व्यक्ति मौके पर जुर्माने की रकम नहीं चुकाता है, तो उसके खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है और मामला कोर्ट तक पहुंच सकता है. ऐसी स्थिति में ₹2,000 तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है. (Photo: Pixels)
रेलवे भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्थाओं में से एक है और रोजाना करोड़ों लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में रेलवे परिसरों को साफ रखना सिर्फ रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है. यात्रियों का व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण है. कूड़ेदान कुछ कदम दूर होने के बावजूद प्लेटफॉर्म पर कचरा फेंकना, ट्रेन की खिड़की से प्लास्टिक या खाने का पैकेट बाहर फेंकना, दीवारों और कोच पर लिखना या सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचाना ऐसी आदतें हैं जो सार्वजनिक संपत्ति के प्रति हमारी जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करती हैं. (Photo: Pixels)
नए नियमों के जरिए रेलवे ने आर्थिक दंड को बढ़ाकर संदेश साफ कर दिया है कि सार्वजनिक जगहों पर गंदगी फैलाने या रेलवे की संपत्ति को खराब करने को हल्के में नहीं लिया जाएगा. हालांकि, इन नियमों का असली असर तभी दिखेगा जब जुर्माने के साथ-साथ लोगों के व्यवहार में भी बदलाव आए और सार्वजनिक संपत्ति को अपनी संपत्ति की तरह सुरक्षित रखने की आदत विकसित हो. (Photo: Pixels)
राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से संशोधित नियम लागू हो चुके हैं. अब अहम सवाल यही है कि रेलवे इन प्रावधानों को जमीन पर कितनी सख्ती से लागू करता है और क्या बढ़ा हुआ जुर्माना यात्रियों के बीच बेहतर सिविक सेंस विकसित करने में कामयाब होता है. (Photo: Pixels)